
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Monkeypox Update: Cases In Canada Exceed 1000
मंकीपॉक्स स्मॉल पॉक्स जैसी एक बीमारी है। आमतौर पर यह मध्य अफ्रीका के देशों में पाए जाते हैं लेकिन कभी-कभी अफ्रीका के बाहर भी यह बीमारी देखी जाती है। मंकीपॉक्स संक्रमण में मरीज को बुखार आता है, और शरीर पर दाने निकलने लगते हैं। 80 प्रतिशत से अधिक लोगों में यह बीमारी खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है और मरीज को बहुत अधिक तकलीफ नहीं होती। इसीलिए, बीमारी के लक्षणों के आधार पर उसका इलाज किया जाता है। कुछ गम्भीर मामलों में गम्भीर लक्षण दिखायी दे सकते हैं,उन्हें निमोनिया हो सकता हा या मरीज की मृत्यु हो सकती है। वॉकहॉर्ट हॉस्पिटल, मुंबई के कंसल्टेंट फिजिशियन जिनेंद्र जैन (Dr. Jinendra Jain, Consultant Physician, Wockhardt Hospitals, Mira Road, Mumbai) के अनुसार, मंकीपॉक्स में गम्भीर बीमारी और मृत्यु की संभावना मंकीपॉक्स में बहुत कम है इसीलिए, इस बात को लेकर बहुत अधिक परेशान नहीं होना चाहिए।
डॉ. जैन क मंकीपॉक्स ऑर्थोपॉक्स वायरस के परिवार का एक वायरस है। यह 1980 के दशक से पहले होने वाले चेचक की बीमारी का भी कारण माना जाता था। मंकीपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति से दूसरे लोगों तक फैल सकता है। इसीलिए, पीड़ित व्यक्ति द्वारा छूने के बाद अगर किसी वस्तु या सतह को दूसरे लोग छूते हैं तो उन्हें भी मंकीपॉक्स हो सकता है।
मंकीपॉक्स के लिए कोई वैक्सीन अभी तक नहीं बनी है लेकिन, जिन लोगों की उम्र 40-50 साल के हैं और उन्हें इससे पहले चेचक का टीका लगाया गया था उन्हें मंकीपॉक्स का खतरा बहुत कम है। क्योंकि स्मॉलपॉक्स की वैक्सीन लगाने के बाद जो एंटीबॉडीज बनती हैं वही एंडीबॉडीज मंकीपॉक्स से भी सुरक्षा दिलाती हैं। इसीलिए, स्मॉल पॉक्स की वैक्सीन ले चुके लोगों को डरने की जरूरत नहीं या उन्हें वैक्सीन लेने की भी जरूरत नहीं।
डॉ. जिनेंद्र जैन के अनुसार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक मंकीपॉक्स के प्रसार को रोकने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे-