डॉक्टर ने बताया ज्यादा देर तक धूप में रहना बन सकता है स्किन कैंसर, पहचान करने का तरीका भी जान लें

Skin cancer from sun exposure: धूप के संपर्क में आने से त्वचा का निखार खराब हो जाना आम समस्या है। लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि धूप के संपर्क में रहना स्किन कैंसर का कारण भी बन सकता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : March 27, 2023 5:34 PM IST

Side effects of sun exposure: गर्मियों का मौसम आ गया है और इस दौरान दोपहर में घर से बार निकलना बिल्कुल भी सेफ नहीं है। वैसे तो धूप भी हमारे शरीर के लिए जरूरी होती है, क्योंकि इससे हमें विटामिन डी तो मिलता ही है, साथ ही मेंटल हेल्थ में सुधार करने और शरीर को कई बीमारियों से बचाए रखने के लिए भी धूप के संपर्क में आना जरूरी होता है। लेकिन आपको पता ही है गर्मियों में आने वाली धूप बहुत तेज होती है और यह सीधी हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाती है। धूप के संपर्क में आने से त्वचा का निखार खराब हो जाना आम समस्या है। लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि धूप के संपर्क में रहना स्किन कैंसर का कारण भी बन सकता है। आगे धूप बढ़ रही है और इस बारे में पूरी व सटीक जानकारी का होना जरूरी है। हमने मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर कशिश कालरा

ने इस बारे में कुछ जरूरी सुझाव दिए, चलिए इनके बारे में जानते हैं।

धूप में ज्यादा देर रहना स्किन कैंसर का कारण

डॉक्टर कशिश कालरा के अनुसार लंबे समय तक धूप के संपर्क में रहना स्किन कैंसर का कारण बन सकता है। ज्यादा देर तक धूप में रहने से 3 प्रकार के स्किन कैंसर हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं -

1. बेसल सेल कार्सिनोमा - यह धूप से होने वाला सबसे आम प्रकार का स्किन कैंसर है। धूप के संपर्क से होने वाले कैंसरों के 90 प्रतिशत मामलों में यही होता है।

2. स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा - स्किन कैंसर का यह प्रकार धूप से बहुत ही कम मामलों में होता है और इसलिए धूप से होने वाले कैंसरों की श्रेणी में दुर्लभ कैंसरों में रखा गया है।

3. मेलानोमा - धूप के संपर्क में सबसे कम मामलों में देखा जाने वाले स्किन कैंसर मेलानोमा ही है, लेकिन यह स्किन कैंसर का सबसे गंभीर प्रकार है।

डॉक्टर ने आगे बताया कि धूप के संपर्क में ज्यादा देर तक रहने का मतलब उन लोगों से है, जो आमतौर पर धूप में काम करते हैं और बचाव के उचित तरीके नहीं अपनाते हैं जैसे कपड़े से ढकना, टोपी पहना और सनस्क्रीन आदि का इस्तेमाल करना आदि।

धूप से स्किन कैंसर का खतरा

डॉक्टर कशिश के अनुसार धूप से स्किन कैंसर होने का ज्यादा खतरा गौरी और कॉकेशियन प्रजाति के लोगों में पाया जाता है। वहीं यदि भारत के लोगों की बात की जाए तो धूप से स्किन कैंसर के मामले भारत में बहुत ज्यादा कॉमन नहीं हैं, लेकिन धूप से स्किन कैंसर के मामले देखे जा सकते हैं। वहीं कॉकेशियन व श्वेत स्किन वाले लोगों में धूप से स्किन कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया है धूप से आमतौर पर तीन प्रकार के स्किन कैंसर हो सकते हैं। इनमें धूप से होने वाला सबसे आम प्रकार का कैंसर बेसल सेल कार्सिनोमा है, जिसका आसानी से इलाज किया जा सकता है। उदाहरण के लिए चेहरे पर किसी भी प्रकार का घाव होना इसका संकेत हो सकता है और ऐसे में जल्द से जल्द डॉक्टर से जांच करवा लेना चाहिए।

सबसे ज्यादा गंभीर है मेलानोमा

धूप से होने वाले स्किन कैंसरों में सबसे ज्यादा गंभीर मेलानोमा है और इसकी पहचान करने के लिए खास तकनीक का उपयोग किया जाता है। मेलानोमा का पता लगाने की तकनीक को ए,बी,सी डी ई (ABCDE) तकनीक कहा जाता है, जो इस प्रकार है -

A से एसिमेट्री - यानी यदि त्वचा पर बना घाव या निशान सिमेट्रिक (समरूप) नहीं है, तो यह मेलानोमा का एक संकेत हो सकता है।

B से बॉर्डर - यदि घाव के किनारे धुंधले से हैं और साफ नहीं हैं, तो यह भी मेलानोमा का संकेत हो सकता है।

C से कलर - यदि स्किन पर बने घाव या निशान का रंग बहुत ज्यादा गहरा नहीं है, हल्का लाल है या स्किन जैसा रंग ही है तो यह मेलानोमा का संकेत है।

D से डायामीटर - यदि घाव का डायामीटर यानी आकार 6 मिलीमीटर से ज्यादा बड़ा है, तो यह मेलानोमा होने का संकेत देता है।

E से इवॉल्विंग - यदि घाव या पहले से मौजूद कोई तिल तेजी से बढ़ रहा है। कुछ ही हफ्तों यो महीनों के भीतर तेजी से बढ़ने वाला कोई घाव या तिल स्किन कैंसर हो सकता है और इसे जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

स्किन कैंसर का इलाज

डॉक्टर कशिश के अनुसार स्किन कैंसर का जितना जल्दी पता लगाकर इलाज शुरू हो जाता है, उसका इलाज उतना ही जल्दी होता है और जटिलताएं होने का खतरा भी कम हो जाता है। स्किन कैंसर की शुरूआत में उसे आसानी से सर्जरी के साथ निकाला जा सकता है। हालांकि, यदि इसकी पहचान करने या डॉक्टर से दिखाने में देरी हो हो जाती है, तो उसे ऑनकोसर्जन को रेफर कर दिया जाता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह फैला है या नहीं।

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