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कब्ज़ होने पर लोग क्या-क्या नहीं करते हैं! लेकिन उन सब में लोग सबसे ज्यादा जिस घरेलू उपचार पर ऐतबार करते हैं वह है ईसबगोल। लेकिन क्या सचमुच ये काम करता है? आपने कभी इस बारे में सोचा है। वैसे तो कई लोगों का मानना है कि ईसबगोल कब्ज के मामले में कुछ भी काम नहीं करता है, क्योंकि वह ईसबगोल नहीं होता है। ईसबगोल लेने के बाद कब्ज के लक्षणों को देखकर वह काम कर रहा है कि नहीं इसका पता चलता है।
ईसबगोल कैसे काम करता है?
ईसबगोल जिलाटिन पदार्थ होता है जो पानी में भिगने के बाद भारी हो जाता है। ये फाइबर से भरपूर होता है इसलिए नैचुरल लैक्ज़टिव का काम करता है। इसको लेने के बाद बॉवेल मूवमेंट ईजी हो जाता है। इसका कुछ भी स्वाद और महक नहीं होता है। डाइजेस्टिव ट्रैक्ट से ये कुछ भी पौष्टिकता ग्रहण नहीं करता है बस पानी मल को आसानी से निकालने में मदद करता है।
वैसे तो ईसबगोल को कब्ज से राहत पाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन ईसबगोल इसका उपचार नहीं है बल्कि मलत्याग करने की प्रक्रिया को आसान करता है। याद रखें कि ईसबगोल में फाइबर प्रचुर मात्रा में रहता है जिसको डायट में शामिल करने पर कब्ज से लड़ने में आसानी होती है। लेकिन जिनका कब्ज़ क्रॉनिक होता है उस मामले में ये काम नहीं करता है वरन् स्थिति को और भी बदतर बना देता है। डॉ. जयश्री शाह, कंसल्टेंट, हेपाटॉलोजिस्ट, गैस्टेरोलॉजिस्ट और थेराप्टिक एन्डोस्कोपिक, जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का कहना है कि अगर किसी को लंबे समय से कब्ज़ की शिकायत है उनको लैक्ज़टिव मलत्याग करने के एक घंटे पहले लेना चाहिए।
ईसबगोल क्यों लेना चाहिए?
ईसबगोल साइलियम ( psyllium) के पौधे से बीज से निकाला जाता है। ये पैकेट में भी मिलता है और मेडिकल स्टोर में आसानी से मिल जाता है। एक गिलास पानी या दूध में ईसबगोल का एक चम्मच मिलाकर पीने से फाइबर की मात्रा बढ़ती है जिससे मल त्याग करने में आसानी होती है। लेकिन अगर आपको लंबे समय से कब्ज की बीमारी है तो इसको लेने से स्थिति और भी खराब हो सकती है। प्राथमिक तौर पर ईसबगोल से कब्ज का उपचार किया जा सकता है लेकिन क्रॉनिक होने पर तुरन्त डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।
लेकिन डॉ. शाह का कहना है कि आप फूड से भी अपने डायट में फाइबर की मात्रा को बढ़ा सकते हैं।
• कार्बोहाइड्रेड की मात्रा डायट में कम करें। भारतीय अक्सर डायट में चार चपाती के साथ एक कटोरी सब्जी लेते हैं लेकिन इसके जगह पर रोटी की मात्रा कम करें और एक कटोरी और सब्जी ले लें। चावल की मात्रा भी कम करने के साथ उसके जगह पर एक चपाती के साथ सब्जी लें।
• दो-तीन तरह के फलों का सलाद लें।
• दो से तीन लीटर पानी जरूर पियें।
कब आप फाइबर की मात्रा को अपने डायट में कम करेंगे?
फाइबर की मात्रा डायट में शामिल करने के पहले ये बात जान लेने की जरूरत है कि आपके शरीर को कितने फाइबर की जरूरत है। क्योंकि अतिरिक्त मात्रा में फाइबर लेने से मतली, उल्टी या दस्त होने की संभावना रहती है।
याद रखें कि डायट में हमेशा फाइबर की मात्रा बढ़ाने से कब्ज के प्रॉबल्म से राहत नहीं मिलती है। एक रिसर्च में पाया गया कि जो इडियोपेथिक कॉन्सिटपेशन से पीड़ित होते हैं उनको फाइबर की मात्रा डायट में कम होने से मोशन पास करने में आसानी हुई। एक रिसर्च में 63 मरीजों को तीन भागों में बांटा गया जिनको क्रमश: हाई फाइबर डायट, नो फाइबर और लो फाइबर डायट दिया गया। और ये पाया गया कि फाइबर की मात्रा कम होने पर रिजल्ट अच्छा मिला। इसका हमेशा फाइबर का जादू कब्ज पर असरदार नहीं होता है। इसलिए हमेशा डॉक्टर से सलाह लेकर ही कोई निर्णय लें।
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अनुवादक: Mousumi Dutta
चित्र स्रोत: Shutterstock.