
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : January 14, 2026 11:36 AM IST
Medically Verified By: Dr. Varun Mittal
Kya High BP Kidney Ko Effect Karta Hai: हाई ब्लड प्रेशर पहले के वक्त में किसी किसी को हुआ करती थी। ज्यादातर उम्रदराज लोगों को इसका सामना करना पड़ता था। लेकिन अब तो, हर दूसरे बंदे को इसकी शिकायत देखने को मिलती है। दरअसल इसका कारण है बदलती जीवनशैली, गलत खान पान। अक्सर लोग हाई बीपी को दिल की बीमारी से ही जोड़कर देखते हैं, लेकिन सच इससे कहीं ज्यादा है। इसका असर कई अंगों पर पड़ता है। उन्हीं में से एक अंग है किडनी, जी हां इससे आपके शरीर का फिल्टर सिस्टम खराब हो सकता है। बता दें कि हाई बीपी और किडनी हेल्थ के बीच एक गहरा और सीधा संबंध है।
किडनी का काम खून को छानना और टॉक्सिक पदार्थों को पेशाब के जरिए बाहर निकालना होता है। लेकिन जब किसी व्यक्ति का बीपी लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने के कारण किडनी की ये नसें धीरे-धीरे हार्ड, मोटी और सिकुड़ने लगती हैं, जिससे किडनी के टिशू तक खून की सप्लाई कम हो जाती है। हमने थोड़ा विस्तार से जानने के लिए आर्टेमिस हॉस्पिटल के किडनी ट्रांसप्लांट डिपार्टमेंटके हेड और ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर वरुण मित्तल से बात की। आइए आपको बताते हैं उन्होंने क्या जानकारी शेयर की।
डॉक्टर कहते हैं कि देखिए, किडनी का काम ही होता है शरीर की सफाई करना, खून को साफ करना, अतिरिक्त पानी निकालना। किडनी के अंदर बहुत ही बारीक रक्त नलिकाएं होती हैं, जिन्हें ग्लोमेरुली कहा जाता है जो खून को फिल्टर करती हैं। जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक ज्यादा रहता है, तो इन नलिकाओं पर लगातार दबाव पड़ता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह दबाव धीरे-धीरे नलिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे किडनी की फिल्टर करने की क्षमताकम होने लगती है।
हाई बीपी लगातार बना रहे तो, किडनी की नाजुक रक्त वाहिकाएं हैं, वो सख्त और मोटी हो सकती हैं, जिससे किडनी तक सही मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता है और नतीजा यह होता है कि फिल्टर ठीक प्रकार से नहीं होता है। यही स्थिति धीरे धीरे क्रोनिक किडनी डिजीज में बदल सकती है ।कई बार किडनी खराब हो जाती है और बहुत बाद में इसका अंदाजा लगता है।
जरूरी नहीं है कि हर मरीज के साथ ऐसा हो। ऐसा तभी होता है जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक कंट्रोल में न रहे, दवाइयां नियमित न ली जाएं और जीवनशैली में सुधार न किया जाए। हाई बीपी और क्रोनिक किडनी रोग के शुरुआती चरणों में आमतौर पर कोई शारीरिक लक्षण नहीं होते हैं, यही कारण है कि नियमित रूप से रक्तचाप की जांच कराना जरूरी है।
जितनी जल्दी बीपी कंट्रोल किया जाए, उतना ही किडनी को नुकसान से बचाया जा सकता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।