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Symptoms of Stroke: स्ट्रोक एक जानलेवा और जीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर देने वाली एक ऐसी स्थिति है। स्ट्रोक को ब्रेन स्ट्रोक भी कहा जाता है और यह तब होता है जब दिमाग के किसी हिस्से में रक्त पहुंचना बंद हो जाता है, जिसके कारण उस हिस्से की कोशिकाएं मरने लगती हैं। रक्त का बहाव आमतौर पर या तो दिमाग के अंदर किसी रक्त वाहिका के फटने या फिर रक्त का थक्का बनने के कारण होता है। यह एक बेहद गंभीर स्थिति है, जिससे दिमाग का कोई एक हिस्सा हमेशा के लिए डैमेज हो जाता है, शरीर का कोई हिस्सा विकलांग हो जाता है और व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। शरीर का कोई हिस्सा अचानक से या बार-बार सुन्न होना इसका एक प्रमुख लक्षण है।
एक्सपर्ट्स भी कहते हैं कि अगर शरीर का कोई हिस्सा बार-बार सुन्न हो रहा है, तो उसे इग्नोर नहीं करना चाहिए क्योंकि यह स्ट्रोक का एक संकेत हो सकता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि ऐसे लक्षण होना सिर्फ ब्रेन स्ट्रोक का ही लक्षण हो कई बार गलत पोजीशन में बैठने या सोने आदि के कारण भी हमारे शरीर का कोई अंग सुन्न हो सकता है। लेकिन बार-बार किसी अंग का सुन्न होना अच्छा संकेत नहीं हो सकता है।
डॉ. राजुल अग्रवाल, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली ने बताया कि स्ट्रोक के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं होती कि क्या करना है, बल्कि यह होती है कि कब करना है। मस्तिष्क शरीर के सबसे संवेदनशील अंगों में से एक है और हर मिनट की देरी लाखों न्यूरॉन्स के नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में हमारा फोकस जल्द और बेहतर इलाज पर है। प्रोटोकॉल और रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम की मदद से हमारी स्ट्रोक टीम मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले ही सक्रिय हो जाती है। यह निरंतर तैयारी, दिन के 24 घंटे और साल के 365 दिन सुनिश्चित करती है कि हम न सिर्फ समय बचा रहे हैं, बल्कि हर सेकंड के साथ किसी की जिंदगी भी बचा रहे हैं।
डॉ. मुकुंद अग्रवाल, एसोसिएट कंसलटेंट (एमडी-पीडियाट्रिक्स, डीएम-न्यूरोलॉजी), रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर कहते हैं कि डॉक्टर की समझ और अनुभव हमेशा महत्वपूर्ण रहते हैं, लेकिन आज की तकनीक ने हमें बहुत मदद दी है। अगर किसी मरीज के मस्तिष्क की कोई नस ब्लॉक होने का शक होता है, तो आधुनिक टेस्ट और मशीनें हमें तुरंत यह दिखा सकती हैं कि मस्तिष्क का कौन सा हिस्सा प्रभावित हुआ है, कौन सा हिस्सा सुरक्षित है और कहां रक्तस्राव का खतरा हो सकता है। इससे डॉक्टर जल्दी और सही निर्णय ले सकते हैं, खासकर ऐसे मामलों में जहां देरी मस्तिष्क की कोशिकाओं को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है।
जैसे-जैसे भारत में स्ट्रोक इलाज के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत हो रहा है, ये नई तकनीक सिर्फ समय नहीं बचातीं, बल्कि मरीज की ठीक होने की प्रक्रिया को भी बेहतर और असरदार बना रही हैं।
डॉ. अमोल सुदके, कंसल्टेंट, न्यूरो साइंस डिपार्टमेंट, व्हाइट लोटस इंटरनेशनल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, मुंबई कहते हैं, “स्ट्रोक के मरीज को सिर्फ तुरंत इलाज की नहीं, बल्कि उम्मीद की भी जरूरत होती है। आधुनिक मशीनों से हम कुछ ही मिनटों में थक्का पहचान सकते हैं, लेकिन शुरुआती दस मिनटों में मरीज और उसके परिवार को भरोसा देना, यह भी एक प्रमुख काम है, जो न्यूरोलॉजिस्ट का होता है। स्ट्रोक देखभाल का भविष्य मशीन और इंसान के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि दोनों का साथ में काम करने में है।”
आज जब हर सेकंड मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए महत्वपूर्ण होता है, न्यूरोलॉजिस्ट के लिए असली वरदान यही है समय को पकड़ पाना, ताकि वे जल्दी हस्तक्षेप कर सकें, इलाज कर सकें और किसी की जिंदगी को फिर से सामान्य बना सकें।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।