
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr Meenakshi Jain
antibiotic overdose (AI generated image)
इंटरनेट की मदद से लोगो को मेडिकल से जुड़ी बहुत सी जानकारियां आसानी से मिल जाती हैं, जो कि अच्छी बात है। लेकिन साथ-साथ इंटरनेट पर कुछ चीजों हमारी हेल्थ को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। इंटरनेट की मदद से लोगों को इतना तो पता चल गया कि बैक्टीरियल इन्पेक्शन में एंटीबायोटिक लेने की जरूरत पड़ती है, लेकिन किस बैक्टीरियल इन्फेक्शन में कौन सी एंटीबायोटिक लेनी है और उसकी कितनी खुराक लेनी है आदि के बारे में तो आपको डॉक्टर ही बता पाएंगे। लेकिन लोग अक्सर खुद से एंटीबायोटिक लेने लगते हैं, जो हेल्थ के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। डॉ. मीनाक्षी जैन, प्रिंसिपल डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, मैक्स सुपर-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल पटपड़गंज के अनुसार यह आदत फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। बिना जरूरत बार-बार इन दवाइयों को खाने से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) गंभीर रूप से कमजोर हो सकती है।
एंटीबायोटिक हमारी इम्यूनिटी को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं, इसे समझने के लिए हमें अपने पेट को समझना होगा। डॉक्टरों का कहना है कि हमारे शरीर का लगभग 70% इम्यून सिस्टम हमारे पेट में होता है। इसे पेट में मौजूद करोड़ों "अच्छे बैक्टीरिया" चलाते हैं, जिन्हें गट माइक्रोबायोम (Gut Microbiome) कहा जाता है। इसलिए अगर आप एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसका सीधा असर आपके पेट पर पड़ता है जिससे आपकी इम्यूनिटी प्रभावित होती है।
जब आप कोई ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक (असरदार एंटीबायोटिक दवा) लेते हैं, तो वह एक मिसाइल की तरह काम करती है। वह बीमारी फैलाने वाले बुरे बैक्टीरिया को तो मारती ही है, लेकिन साथ ही हमारे पेट के उन अच्छे और मददगार बैक्टीरिया को भी नुकसान पहुंचाती है और अगर एंटीबायोटिक की खुराक बड़ी है या बहुत ज्यादा है।
जब आप बार-बार एंटीबायोटिक्स लेते हैं, तो पेट के इन अच्छे बैक्टीरिया को वापस ठीक होने का मौका ही नहीं मिलता। डॉक्टरों की भाषा में इस असंतुलन को डिस्बायोसिस (Dysbiosis) कहते हैं। इसके कारण शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली सुस्त पड़ जाती है। नतीजा यह होता है कि आप बार-बार बदलते मौसम की बीमारियों की चपेट में आने लगते हैं।
इसके अलावा, भारत में मानसून या सर्दियों के दौरान होने वाले ज्यादातर सर्दी-जुकाम वायरल जैसे इन्फ्लूएंजा या डेंगू आदि होते हैं। एंटीबायोटिक्स सिर्फ बैक्टीरिया को मारते हैं, वायरस पर इनका कोई असर नहीं होता। इसलिए, वायरल बीमारी में इन्हें बेवजह खाने से शरीर को सिर्फ एसिडिटी, पेट फूलना और दस्त (डायरिया) जैसी परेशानियां ही मिलती हैं।
इंटरनल मेडिसिन के क्षेत्र में आज सबसे बड़ी चिंता एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की है। जब आप गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेते हैं या थोड़ा ठीक महसूस होने पर दवा का कोर्स बीच में ही छोड़ देते हैं, तो सबसे मजबूत बैक्टीरिया बच जाते हैं और खुद को बदल (म्यूटेट) लेते हैं। समय के साथ ये सुपरबग्स बन जाते हैं। इसका मतलब यह है कि भविष्य में जब हमें टाइफाइड या यूरिन इन्फेक्शन जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां होंगी, तो ये आम और सस्ती दवाइयां हम पर असर करना बंद कर देंगी।
अगर आप अपनी व अपने परिवार की इम्यूनिटी को बचाना चाहते हैं और एंटीबायोटिक के अन्य खतरे से बचाव करना चाहते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है -
हमारे शरीर में मौजूद इम्यून सिस्टम प्रकृति से मिला एक बेहद कवच है, जो हमारे शरीर को अलग-अलग बीमारियों व इन्फेक्शन आदि से बचाने में मदद करता है। इसलिए बिना वजह दवाएं खाकर इसे कमजोर नहीं करना चाहिए। इसे अपना काम करने दें और एंटीबायोटिक का इस्तेमाल सिर्फ आखिरी उपाय के तौर पर ही करें।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल बार-बार एंटीबायोटिक लेने से होने वाले नुकसान के बारे में बताना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।