
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr. Pragya Rashmi
Anger Issue-Biological Age
गुस्सा लगभग हर एक व्यक्ति को आता है। यह एक ह्यूमन इमोशन है, लेकिन अगर यह बार-बार और लंबे समय तक बना रहता है, तो यह न सिर्फ आपके मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है, बल्कि पूरे शरीर पर भी असर डालता है। हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स में कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रज्ञा रश्मि का कहना है कि लगातार गुस्से की स्थिति शरीर को क्रॉनिक स्ट्रेस मोड में डाल देती है, जिससे धीरे-धीरे बायोलॉजिकल एज यानी शरीर की वास्तविक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
डॉ. प्रज्ञा का कहना है कि जब कोई व्यक्ति गुस्से में होता है, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन जैसे कोर्टिसोल और एड्रेनालिन तेजी से बढ़ जाते हैं। ये हार्मोन शरीर को फाइट या फ्लाइट मोड में डाल देते हैं। अगर यह स्थिति बार-बार बनी रहे, तो शरीर लगातार तनाव में रहने लगता है, जिससे कई बायोलॉजिकल प्रोसेस प्रभावित होती है।
डॉ. का कहना है कि हां गुस्से की वजह से आपकी बायोलॉजिकल एज बढ़ती है। NCBI रिसर्च बताते हैं कि लंबे समय तक क्रॉनिक स्ट्रेस और गुस्सा शरीर में सेलुलर लेवल पर बदलाव ला सकता है। यह बदलाव टेलोमीयर की लंबाई को प्रभावित कर सकते हैं, जो सेल्स की उम्र से जुड़े होते हैं। टेलोमीयर जितने छोटे होते हैं, कोशिकाएं उतनी तेजी से बूढ़ी होती हैं।
बार-बार गुस्सा आने से ना सिर्फ बायोलॉजिकल एज बढ़ती है, बल्कि इसका असर हार्ट और ब्रेन दोनों पर भी दिखता है, जैसे-
हार्वड की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रॉनिक गुस्सा और तनाव शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर कर सकते हैं। इसका मतलब है कि शरीर बीमारियों से लड़ने की क्षमता धीरे-धीरे कम कर सकता है। ऐसे में कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं, जैसे- बार-बार इंफेक्शन, धीमी रिकवरी और थकान और कमजोरी इत्यादि महसूस होना।
गुस्से और तनाव के कारण नींद प्रभावित होती है। नींद की कमी खुद एक ऐसा फैक्टर है जो शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है। इसकी वजह से अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में समस्या हो सकती है।
डॉक्टर कहती हैं कि अच्छी बात यह है कि आप इस स्थिति को पहले जैसा कर सकते हैं। बस आपको अपने लाइफस्टाइल में बदलाव की जरूरत होती है, जिससे काफी हद तक आप अपनी स्थिति में सुधार कर सकते हैं, जैसे-
Disclaimer: बार-बार गुस्सा आना सिर्फ मूड की समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदर गहरे स्तर पर बदलाव ला सकता है। लगातार स्ट्रेस की स्थिति शरीर की कोशिकाओं, दिल, दिमाग और इम्यून सिस्टम को प्रभावित करके बायोलॉजिकल एज को तेज कर सकती है। हालांकि, सही लाइफस्टाइल और मानसिक संतुलन अपनाकर इस प्रभाव को रोका जा सकता है।