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क्या गलत डाइट लेने से डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है?

Dementia And Diet Relation: क्या आप जानते हैं कि गलत डाइट लेने से डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है? या यह बस एक मिथक है जो लोगों के बीच फैला हुआ है? आइए डॉक्टर से जानते हैं सच क्या है।

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Written By: Vidya Sharma | Published : September 29, 2025 3:52 PM IST

Kya Humari Diet ka effect Dementia Par Padta Hai: डिमेंशिया याददाश्त से जुड़ी बीमारी मानी जाती है, लेकिन यह सिर्फ यही तक सीमित नहीं है। इससे रोज के काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। वैसे तो यह किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन 65 साल से अधिक उम्र के लोगों में ज्यादा आम है। इस विषय पर पूरी जानकारी पाने के लिए हमने आर्टेमिस हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी एवं मिर्गी कंसल्टेंट डॉक्टर विवेक बरुन से बात की।

उन्होंने बताया कि 'दुनिया भर में करोड़ों लोग इससे पीड़ित है और आपको जानकर हैरानी होगी कि डिमेंशिया के विकसित होने में आपकी खान-पान की बड़ी भूमिका होती है। सही खान-पान को अपनाकर इस बीमारी का खतरा कम किया जा सकता है।' डॉक्टर ने और भी कई जानकारी दी जो हम सभी के लिए जानना बहुत जरूरी है। इसलिए आइए विस्तार से जानते हैं, कि डॉक्टर ने क्या कहा।

कैसे गलत आहार डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है?

आज के दौर में हर व्यक्ति प्रोसेस्ड फूड, चीनी, सैचुरेटेड फैट वगेराह लेता ही लेता है, जो कि मस्तिष्क में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ाते हैं। यह बदलाव दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचाते हैं। न्यूरॉन्स के बीच संचार बाधित करते हैं। लंबे समय तक ऐसा ही डाइट लेने से डिमेंशिया का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसा नहीं है कि सीधे-सीधे डिमेंशिया ही हो जाता है, लेकिन जंक फूड और मीठे ड्रिंक का लगातार सेवन आपकी याददाश्त की क्षमता को तेजी से घटाता है।

अधिक चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट ब्लड शुगर को बढ़ाते हैं। यह मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा कर वैस्कुलर डिमेंशिया का कारण बन सकता है।

डाइट कैसे डिमेंशिया के रिस्क को कम कर सकता है? 

मेडिटरेनियन और माइंड डाइट डिमेंशिया का खतरा कम करती है। इसे खास डिमेंशिया को धीमा करने के लिए ही डिजाइन किया गया है। यह डाइट दिमाग की सूजन घटती है और स्मृति क्षमता को सुरक्षित रखती है। इस डाइट को फॉलो करके डिमेंशिया का जोखिम लगभग 30 से 50 फीसदी तक कम किया जा सकता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड को करें डाइट में शामिल

अगर आप अपनी डाइट में ओमेगा 3 फैटी एसिड जैसे मछली, अलसी के बीज और अखरोट को शामिल करते हैं तो यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं और मानसिक गिरावट को धीमा करते हैं। और भी फूड्स हैं जिन्हें आप अपनी डाइट में ऐड करके डिमेंशिया का खतरा कम कर सकते हैं जैसे-  

एंटीऑक्सीडेंट- एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थ, इसमें कई तरह के फल शामिल हैं, मस्तिष्क को फ्री रेडिकल्स से बचते हैं।

विटामिन b12- विटामिन b12 और फॉलेट से भरपूर खाद्य पदार्थ मस्तिष्क की कार्यक्षमता और न्यूरोट्रांसमीटर संतुलन बनाने में मदद करते हैं। 

इन बीमारियों का भी हो सकता है खतरा

जो आहार टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे का खतरा कम करते हैं, वही हमारे दिमाग को भी सुरक्षित रखते हैं। ऐसे आहार शरीर के मेटाबॉलिक फंक्शन (जैसे शुगर कंट्रोल, वजन संतुलन, रक्त संचार) को सुधारते हैं। जब मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है तो दिमाग की कोशिकाओं को सही मात्रा में ऊर्जा और ऑक्सीजन मिलती है।इससे मस्तिष्क पर तनाव और कम होती है। नतीजतन, दिमाग में स्मृति और सोचने-समझने की क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है।

मेडिटेरेनियन डाइट कैसे अपनाएं

फल, सब्जियां, साबुत अनाज (ब्राउन ब्रेड, राइस, पास्ता), दालें, बीन्स, नट्स और बीज ज्यादा खाएं।

लाल मांस (बीफ, लैम्ब), प्रोसेस्ड मीट (सॉसेज, बेकन), चीनी और मीठी चीजें कम खाएं।

मछली, खासकर ओमेगा-3 से भरपूर (सैल्मन, मैकेरल) नियमित रूप से खाएं।

लो-फैट दूध, दही, चीजें लें।

खाना बनाने में जैतून का तेल, रेपसीड ऑयल; मक्खन, घी से बचें।

रोजाना 6 ग्राम (1 चम्मच) से ज्यादा नमक न लें।

Highlights

  • अगर आप सही डाइट नहीं लेते हैं तो डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है।
  • अपनी डाइट में ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन बी12 को शामिल करें।
  • डिमेंशिया की वजह से टाइप-2, डायबिटीज और मोटापा बढ़ सकता है।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

FAQs

अल्जाइमर रोग से सबसे ज्यादा प्रभावित कौन है?

65 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोग सबसे ज्यादा अल्जाइमर से पीड़ित हैं।

अल्जाइमर के लक्षण क्या हैं?

बातें भूल जाना, चीजों को रखकर भूल जाना, निर्णय लेने में कठिनाई होना आदि अल्जाइमर रोग के लक्षण हो सकते हैं।

अल्जाइमर रोग का इलाज क्या है?

अल्जाइमर का कोई इलाज नहीं है। कुछ दवाइयों और उपचार की मदद से अल्जाइमर के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।

अल्जाइमर रोग किसकी कमी से होता है?

अल्जाइमर रोग मुख्य रूप से एसिटाइलकोलाइन (acetylcholine) की कमी के कारण होता है, जो एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मस्तिष्क में संकेतों को प्रसारित करने में मदद करता है।