क्या मोटे होने से स्तन कैंसर होता है? डॉक्टर से जानें सच

Obese Causes Breast Cancer: मोटापे से ब्रेस्ट कैंसर? आपको भी सुनकर अजीब लगा ना! लेकिन यह सच है। कैसे? यही जानने के लिए हमने अपोलो हॉस्पिटल की हर्निया और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉक्टर अपर्णा गोविल भास्कर से बात की। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा।

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Written By: Vidya Sharma | Published : October 27, 2025 6:02 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Aparna Govil Bhasker

Kya Jyada vajan Wali Mahilao Mai Breast Cancer Ka Khatra Jyada Hota Hai: मोटापा अब कई गंभीर बीमारियों का कारण बन चुका है। यह टाइप २ डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट की बीमारियों के साथ-साथ कई प्रकार के कैंसर का भी खतरा बढ़ जाता है। जैसे फूड पाइप, पेट, थायराइड, अग्न्याशय, बड़ी आंत, प्रोस्टेट, पित्ताशय, गर्भाशय, अंडाशय, मल्टीपलमायलोमा और स्तन कैंसर। जी हां ब्रेस्ट कैंसर भी। स्तन कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर है। साल 2020 में 2.3 मिलियन महिलाओं को यह बीमारी हुई। यह कैंसर से होने वाली मौतों का पांचवां सबसे बड़ा कारण है और हर साल लगभग छह लाख महिलाएं इससे अपनी जान गंवाती हैं।

क्या सही में मोटी महिला को स्तन कैंसर का खतरा होता है? यही जानने के लिए हमने एलएच हीरानंदानी अस्पताल और अपोलो हॉस्पिटल की हर्निया और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉक्टर अपर्णा गोविल भास्कर से बात की। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण में पाया गया है की मोटापा, रजोनिवृत्ति से पहले और बाद में दोनों अवस्थाओं में महिलाओं में स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाता हैं। सामान्य वजन वाली महिलाओं की तुलना में मोटी महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा लगभग 1.3 गुना अधिक होता है। ऐसी महिलाओं में ट्यूमर बड़े होते हैं, हार्मोनल थेरेपी कम असर करती है और कैंसर फैलने की संभावना ज्यादा होती है। आइए जानते हैं डॉक्टर ने और क्या जानकारी दी।

मोटापा स्तन कैंसर को कई तरीकों से प्रभावित करता है

हर उम्र की महिलाओं में मोटापा बीमारी के नतीजों को खराब करता है, इसलिए यह समझना बहुत ज़रूरी है कि मोटापा स्तन कैंसर को कैसे प्रभावित करता है।

अधिक वसा और हार्मोन- शरीर में वसा एक सक्रिय ऊतक होता है जो कई हार्मोन बनाता है। मोटी महिलाओं में शरीर में अधिक वसा के कारण एस्ट्रोजन नामक हार्मोन ज्यादा बनता है। यह स्तन कैंसर के बढ़ने और खराब परिणामों का एक कारण है।

गांठ महसूस करने में कठिनाई- बड़ी और भारी छाती वाली महिलाओं को स्वयं जांच के दौरान छोटी गांठें महसूस नहीं होती। इससे कैंसर का पता देर से चलता है और ट्यूमर बड़ा हो जाता है।

नियमित जांच न कराना- कई मोटी महिलाएं शरीर के प्रति झिझक या शर्म के कारण नियमित मैमोग्राफी नहीं करवातीं, जिससे कैंसर देर से पता चलता है।

डर और आत्मसम्मान की कमी- मोटी महिलाओं में कई बार मौत का डर, आत्मविश्वास की कमी और शर्म की भावना होती है, जिससे वे समय पर डॉक्टर के पास नहीं जातीं।

स्वास्थ्य कर्मियों का पूर्वाग्रह- कुछ बार डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी भी मोटे मरीजों के प्रति नकारात्मक सोच रखते हैं, जिससे इलाज के फैसले प्रभावित हो सकते हैं।

सर्जरी और एनेस्थीसिया की जटिलताएं- मोटे मरीजों में सर्जरी और एनेस्थीसिया के दौरान परेशानी का खतरा ज़्यादा होता है। उन्हें अक्सर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या हार्ट डिज़ीज़ जैसी अन्य बीमारियां भी होती हैं, जिससे ऑपरेशन लंबा और मुश्किल हो सकता है।

रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी में दिक्कतें- स्तन कैंसर हटाने के बाद पुनर्निर्माण सर्जरी (reconstruction) में मोटी महिलाओं को दोगुनी जटिलताएं होती हैं और वे परिणामों से कम संतुष्ट रहती हैं।

रेडियोथेरेपी की अधिक खुराक- बड़े स्तनों वाली महिलाओं को रेडियोथेरेपी की ज्यादा मात्रा की जरूरत होती है, जिससे दिल और फेफड़ों पर बुरा असर पड़ सकता है।

लिम्फेडेमा (सूजन) का खतरा- स्तन कैंसर की सर्जरीके बाद सूजन (लिम्फेडेमा) की समस्या मोटी महिलाओं में अधिक देखी जाती है।

कीमोथेरेपी की सही खुराक तय करना मुश्किल- मोटे मरीजों के लिए दवा की सही खुराक तय करना कठिन होता है। अगर खुराक कम दी जाए तो बीमारी दोबारा लौट सकती है।

वजन घटाने का असर

वजन घटाने से स्तन कैंसर का खतराकाफी कम हो जाता हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, जिन महिलाओं ने 2 से 4.5 किलो वजन घटाया, उनमें स्तन कैंसर का खतरा 13% कम हुआ। और जिन महिलाओं ने 9 किलो या उससे अधिक वजन घटाया, उनमें यह खतरा 26% तक घट गया।

हालांकि, वजन घटाना आसान नहीं है। मोटापे का इलाज उसकी गंभीरता के अनुसार होना चाहिए।

जिनका वजन थोड़ा ज्यादा है या ग्रेड 1 मोटापा है, वे सही डाइट, लाइफस्टाइल मैनेजमेंट, वजन घटाने की दवाएं या एंडोस्कोपिक थेरेपी से फायदा पा सकती हैं। लेकिन जिनका BMI 35 किग्रा/मी² या उससे ज़्यादा है, या BMI 30 किग्रा/मी² के साथ डायबिटीज या हार्ट डिजीज जैसी अन्य बीमारियां हैं, उनके लिए मेटाबोलिक या बेरियाट्रिक सर्जरी ज्यादा असरदार होती है।

एक अध्ययन में 16.7 मोटे मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें पाया गया कि बेरियाट्रिक सर्जरी कराने से मोटापे से जुड़े कैंसर का खतरा 20% तक कम हुआ। एक और अध्ययन में 88,625 गंभीर मोटापे वाले मरीजों में पाया गया कि इस सर्जरी के बाद किसी भी प्रकार के कैंसर का खतरा 33% और मोटापे से जुड़े कैंसर का खतरा 40%  तक कम हुआ।

Highlights

  • मोटापा ज्यादा होने से स्तन कैंसर का खतरा होता है।
  • कम वजन वाली महिलाओं की तुलना में मोटी महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा लगभग 1.3 गुना अधिक होता है।
  • वजन घटाने से स्तन कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता हैं। 

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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