
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : May 5, 2026 10:35 AM IST
Medically Verified By: Dr Shubham Sharma
अस्थमा एक सांस से जुड़ी बीमारी है। इस स्थिति से जूझ रहे मरीजों की सांस की नलियों में सूजन आ जाती है और वे संकरी होने लगती हैं। इसके कारण मरीज को सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट, सीने में जकड़न और बार-बार खांसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा के सही इलाज में डॉक्टर हमेशा इन्हेलर लेने की सलाह देते हैं। लेकिन समाज में इन्हेलर को लेकर कई गलतफहमियां फैली हुई हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि इन्हेलर लेने से अस्थमा ट्रिगर होने लगता है, जबकि कई लोग सोचते हैं कि इसकी आदत पड़ जाती है और फिर बिना इन्हेलर के राहत नहीं मिलती है। क्या ऐसा सोचना सही है? क्या वाकई ऐसा है? आइए जयपुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल के पल्मोनोलोजिस्ट कंसल्टेंट डॉ. शुभम शर्म के वीडियो से समझते हैं कि क्या इन्हेलर लेने से इसकी लत लग जाती है?
डॉक्टर कहते हैं कि अक्सर लोगों को कहते सुना होगा कि इन्हेलर लेने से अस्थमा ट्रिगर हो जाता है। अगर सीधे तौर पर कहें, तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है। इन्हेलर अस्थमा को ट्रिगर नहीं करता। बल्कि यह अस्थमा को कंट्रोल करने में मदद करता है। इन्हेलर के जरिए दवा सीधे फेफड़ों तक पहुंचती है, जिससे सांस की नलियों की सूजन कम होती है और एयरवे खुलने लगते हैं। इससे सांस लेना आसान हो जाता है।
कई बार मरीज को लगता है कि इन्हेलर लेने के बाद भी इसकी बार-बार जरूरत पड़ रही है, इसलिए बीमारी बढ़ रही है। असल में इसका कारण धूल, धुआं, मिट्टी, मौसम जैसी चीजें हैं। इसके अलावा गलत तकनीक से इन्हेलर लेना भी मरीजों की परेशानी को बढ़ा सकता है।
डॉक्टर शुभम का कहना है कि लोगों में यह भी एक मिथक है कि इन्हेलर की लत लग जाती है। मेडिकल साइंस के अनुसार, इन्हेलर कोई नशे वाली चीज नहीं है और इससे शरीर को कोई ऐसी निर्भरता नहीं होती, जिसे आदत कहा जाए।
क्या इन्हेलर लेने से इसकी लत लग जाती है?
अगर किसी मरीज को इन्हेलर बार-बार लेना पड़ रहा है, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि उसका अस्थमा अभी पूरी तरह कंट्रोल में नहीं है या इलाज में बदलाव की जरूरत है। इसे आदत पड़ना कहना सही नहीं होगा।
डॉक्टर बताते हैं कि अस्थमा की दवा अगर गोली या सिरप के रूप में ली जाए, तो उसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। वहीं, इन्हेलर दवा सीधे फेफड़ों तक पहुंचाता है, इसलिए कम डोज में ज्यादा असर मिलता है और साइड इफेक्ट्स का खतरा भी कम होता है। यही वजह है कि दुनिया भर के विशेषज्ञ अस्थमा मैनेजमेंट में इन्हेलर को प्राथमिकता देते हैं।
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कुछ स्थितियों में अस्थमा की परेशानी बढ़ सकती है, जैसे-
ऐसी स्थितियों में अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं। लेकिन इसका कारण इन्हेलर नहीं, बल्कि गलत मैनेजमेंट होता है।
डॉक्टर कहते हैं कि अगर आपको इन्हेलर लेने से किसी तरह का भ्रम या डर लग रहा है, तो ऐसी स्थिति में पल्मोनोलॉजिस्ट या डॉक्टर से खुलकर बात करें। सही जानकारी और सही तकनीक के साथ इन्हेलर अस्थमा के मरीजों के लिए राहत का सबसे असरदार और सुरक्षित तरीका माना जाता है।
Disclaimer : ध्यान रखें कि इन्हेलर अस्थमा को बढ़ाता नहीं, बल्कि उसे कंट्रोल करने में मदद करता है। यह आदत नहीं, इलाज का अहम हिस्सा है।
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