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क्या वायु प्रदूषण बढ़ा सकता है डिमेंशिया का खतरा? जानें क्या कहते हैं शोध

वायु प्रदूषण कई बीमारियों का कारण बनता है। कुछ शोधों में वायु प्रदूषण को डिमेंशिया से भी जोड़ा गया है। कहा जा रहा है कि वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों में डिमेंशिया का खतरा ज्यादा हो सकता है।

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Written By: Anju Rawat | Updated : August 2, 2026 3:12 PM IST

National Institute of Health (NIH) के अनुसार, डिमेंशिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति की सोचने-समझने, याद रखने और तर्क करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। बढ़ती उम्र के साथ डिमेंशिया होने का जोखिम बढ़ जाता है। लेकिन, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सिर्फ बढ़ती उम्र में ही डिमेंशिया होता है। यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने वाली विभिन्न बीमारियों के कारण होने वाले लक्षणों का एक समूह है। डिमेंशिया कई कारणों से हो सकता है- इसमें वायु प्रदूषण भी शामिल हो सकता है। कुछ शोधों में संकेत मिले हैं कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है।

क्या वायु प्रदूषण में रहने से डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है?

Alzheimer's Society के अनुसार, जो लोग लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहते हैं, उनमें डिमेंशिया होने का जोखिम बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, वायु प्रदूषण कई अन्य क्रॉनिक स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को भी बढ़ाता है। आपको बता दें कि वायु प्रदूषण में वाहनों से निकलने वाले धुएं लकड़ी या अन्य ईंधन के जलने से उत्पन्न बेहद सूक्ष्म कण शामिल होते हैं। हालांकि, वायु प्रदूषण सीधे डिमेंशिया का कारण नहीं बनता है। लेकिन, कई अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि जो लोग लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहते हैं, उनमें डिमेंशिया विकसित होने की संभावना अधिक होती है।

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वायु प्रदूषण और डिमेंशिया में क्या संबंध है?

आपको बता दें कि वायु प्रदूषण और डिमेंशिया के बीच सीधा संबंध नहीं है। हालांकि, लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों में डिमेंशिया का खतरा अन्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है। लेकिन, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि कितने समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से डिमेंशिया हो सकता है। कुछ शोधों से पता चला है कि वायु प्रदूषण के बेहद सूक्ष्म कण मस्तिष्क तक पहुंच सकते हैं और नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कुछ अध्ययनों में साबित हुआ है कि वायु प्रदूषकों के संपर्क में आने से याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि वायु प्रदूषण हृदय और रक्त परिसंचरण तंत्र (Circulatory System) को प्रभावित करता है, जिससे मस्तिष्क तक रक्त की आपूर्ति कम हो सकती है। यही स्थिति आगे चलकर वैस्कुलर डिमेंशिया (Vascular Dementia) के जोखिम को बढ़ा सकती है।

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वायु प्रदूषण मस्तिष्क को कैसे प्रभावित कर सकता है?

Alzheimer's Society के अनुसार, वायु प्रदूषण कई तरह की हानिकारक गैसों, रासायनिक यौगिकों, धातुओं और बेहद सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है। अब तक हुए ज्यादातर शोधों में पता चला है कि इन छोटे कणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों और हृदय से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, वायु प्रदूषण, फेफड़ों और हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, इसे लेकर कई वैज्ञानिक शोध उपलब्ध हैं। लेकिन, वायु प्रदूषण मस्तिष्क का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है और इसके संपर्क में आने से डिमेंशिया का जोखिम बढ़ सकता है, इसे लेकर अभी और शोधों की जरूरत है।

इन लक्षणों की न करें अनदेखी

Alzheimer's Association के अनुसार, डिमेंशिया के लक्षण हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकते हैं। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं और धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकते हैं।

  • याद्दाश्त कमजोर हो जाना यानी हाल की ही बातों को भूल जाना
  • अपने जरूरी चीजों को किसी जगह पर रखकर भूल जाना
  • अपने परिचित का इलाका या रास्ता भूल जाना
  • यात्रा करने में परेशानी होने लगना

Disclaimer: वायु प्रदूषण कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है। वायु प्रदूषण को फेफड़ों और हृदय रोगों का एक मुख्य कारण माना जाता है। लेकिन, कुछ रिसर्च में साबित हुआ है कि वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से मस्तिष्क का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है। इतना ही नहीं, कुछ रिसर्च में संकेत मिले हैं कि वायु प्रदूषण डिमेंशिया के खतरे को भी बढ़ाता है। ऐसे में कहा जा रहा है कि जो लोग लंबे समय से वायु प्रदूषण के संपर्क में हैं, उनमें डिमेंशिया समेत कई रोगों का जोखिम ज्यादा हो सकता है।