
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Neurological that could cause brain related problems: दुनिया भर में बढ़ती हुई आबादी के साथ न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से जुड़े मरीजों की संख्या में भी काफी वृद्धि हो रही है। ब्रेन हमारे शरीर का सबसे जरूरी भाग है जो पूरे शरीर को नियंत्रित करता है। मस्तिष्क से जुड़ी हुई बीमारियां विकलांगता और मृत्यु का एक प्रमुख कारण हैं। इसलिए मस्तिष्क रोगों के प्रति लोगों में जागरूकता और सतर्कता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 22 जुलाई को विश्व मस्तिष्क दिवस मनाया जाता है। आइए इस लेख के माध्यम से समझते हैं कि मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली बीमारियां कौन सी हैं, उनके उपलब्ध उपचार क्या हैं और कैसे इनका बचाव करना चाहिए-
डॉ. अमृता जे गोटूर, कंसल्टेंट - न्यूरोलॉजी, धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल, दिल्ली के अनुसार इस साल विश्व मस्तिष्क दिवस की थीम, "ब्रेन हेल्थ एंड प्रिवेंशन", न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को लेकर सतर्कता और जल्द निदान के मिशन को समाहित करती है। इसमें तीन प्रमुख पिलर यानी स्तंभों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। जिसमे जल्द इलाज, टाइमली मैनेजमेंट यानी समय पर प्रबंधन और अपने जीवन शैली में मस्तिष्क विकारों के रोकथाम के लिए पहले से ही तत्पर रहना या रोकथाम पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है। इसलिए आज भले ही हमारे पास सबसे उन्नत उपचार उपलब्ध है, परंतु हमारा प्राथमिक ध्यान रोकथाम पर ही होना चाहिए।
डॉ. राजुल अग्रवाल, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के लिए सबसे प्रभावी उपचार रोग की स्थिति और इसकी गंभीरता पर निर्भर करते हैं। वर्तमान समय में डॉक्टर फंक्शनल एमआरआई, कंप्यूटेड टोमोग्राफी और पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम से बीमारी का निदान करके सटीक उपचार का निर्णय लेते हैं। स्ट्रोक जो विकलांगता और मृत्यु का एक महत्वपूर्ण कारण है, इसके प्रभावों को कम करने के लिए नई चिकित्सा में काफ़ी प्रगति हुई है। इनमें क्लॉट बस्टर ड्रग्स यानी थक्का-रोधी दवाएँ और अन्य उपकरण शामिल हैं जो स्ट्रोक के बाद मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को जल्दी से बहाल कर सकते हैं। पार्किंसंस रोग के लिए जीन थेरेपी और डीप ब्रेन स्टिमुलेशन जैसे उपचार और सर्जिकल तकनीकें अब उपलब्ध हैं, जो रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार कर सकती हैं। इसके अलावा जीन थेरेपी, स्टेम सेल प्रत्यारोपण और इलेक्ट्रिकल ब्रेन स्टिमुलेशन सहित कई आशाजनक नई चिकित्सा के लिए नैदानिक परीक्षण चल रहे हैं। ये वर्तमान में लाइलाज स्थितियों वाले लोगों के जीवन को बदल सकते हैं। हालाँकि अभी भी अल्जाइमर रोग का कोई इलाज नहीं है, शोधकर्ता नए उपचारों पर काम कर रहे हैं जो इसकी प्रगति को धीमा करने या लक्षणों को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
डॉ. अरिंदम घोष, कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, नारायणा हॉस्पिटल, कोलकाता भारत में मुख्य रूप से बढ़ती आबादी गैर-संचारी न्यूरोलॉजिकल विकारों के बोझ का मुख्य कारण है। ऐसे में इन न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए इस बार विश्व मस्तिष्क दिवस की थीम है 'ब्रेन हेल्थ एंड प्रिवेंशन।' भारत और दुनिया भर में पार्किंसंस रोग (पीडी), स्ट्रोक, मिर्गी और विभिन्न मनोभ्रंश विकार आम लोगों को प्रभावित करने वाली न्यूरोलॉजिकल बीमारियाँ हैं। पिछले तीन दशकों में इन बीमारियों के मामले काफी बढ़े हैं। हालांकि यह जानकर खुशी होती है कि दुनिया भर के न्यूरोलॉजिस्ट ने इन बीमारियों के उपचार अंतराल को कम करके और रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करने वाली नीतियों को स्थापित करके इन बीमारियों से होने वाली मौतों को कुछ हद तक कम किया है। इन उपायों और नीतियों में सिर की चोट से बचना, पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर संतुलित आहार खाना, धूम्रपान से बचना, ध्यान, व्यायाम या सैर जैसे तनाव को दूर करने वाले उपाय अपनाना और मधुमेह, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर एवं डिस्लिपिडेमिया जैसी बीमारियों का पर्याप्त ध्यान रखना भी शामिल है। ये सरल उपाय कई दुर्बल करने वाली न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की प्रगति को रोकने काफी मददगार साबित हो सकते हैं।