Doctors’ Day 2020: डॉक्टर व मरीज के बीच में कितना जरूरी है कम्फर्ट जोन? जानें एक्सपर्ट की राय

डॉ बिधान चंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को हुआ था, ये पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री भी थे। राष्ट्रीय डॉक्टर्स के मौके पर आज हम आपको एक डॉक्टर और मरीज के बीच में हेल्दी रिलेशनशिप की महत्ता बता रहे हैं।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Published : July 1, 2020 1:56 PM IST

इंसान की जिंदगी में जितनी अहमियत एक डॉक्टर की होती है शायद उतनी और किसी की नहीं होती। भले ही भगवान मनुष्य को पैदा करता है, लेकिन जिंदगी डॉक्टर्स ही देते हैं। इसलिए कहते हैं 'डॉक्टर खुदा तो नहीं, लेकिन खुदा से कम भी नहीं है।' डॉक्टर्स की इसी सेवा को सम्मान देने के लिए अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग दिन डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। हमारे देश भारत में राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस 1 जुलाई को प्रसिद्ध डॉ बिधान चंद्र रॉय की याद में मनाया जाता है। डॉ बिधान चंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को हुआ था, ये पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री भी थे। राष्ट्रीय डॉक्टर्स के मौके पर आज हम आपको एक डॉक्टर और मरीज के बीच में हेल्दी रिलेशनशिप की महत्ता बता रहे हैं।

प्रसिद्ध चिकित्सक सर विलियम ओस्लर ने बहुत खूब कहा है “अच्छा चिकित्सक बीमारी का इलाज करते हैं; महान चिकित्सक उस रोगी का इलाज करते हैं जिसे बीमारी है।” यानि कि यह जरूरी है कि एक डॉक्टर को अपने मरीज को बीमरी से परे जानने की जरूरत होती है। साथ ही एक मरीज को भी अपने डॉक्टर के साथ खुलकर बात करनी चाहिए। कई शोधों में यह साफ हो चुका है जिस डॉक्टर-मरीज के रिश्ते में एक अच्छा कम्फर्ट जोन होता है वहां बीमारी जल्दी हील होती है यानि कि मरीज को समय से पहले आराम मिलता है।

क्लीनिकल साइकालजिस्ट और साइकथेरपिस्ट प्राची एस वैश्य का कहना है “अगर मरीज और डॉक्टर के बीच अच्छा कम्फर्ट जोन होता हैं तो दवा का असर जल्दी होता है। अगर डॉक्टर और मरीज खुलकर बात करते हैं तो मरीज अपने डॉक्टर द्वारा बताए गए सभी निर्देशों और सुझावों का गंभीरता से पालन करता है और किसी तरह के साइड इफेक्ट दिखने पर खुलकर बात करते हैं। साथ ही डॉक्टर भी अपने मरीज से पर्सनली बात करते हैं।” क्लीनिकल साइकालजिस्ट और साइकथेरपिस्ट प्राची एस वैश से बातचीत के आधार पर जानते हैं कि एक मरीज और डॉक्टर के बीच में हेल्दी रिलेशनशिप की क्या भूमिका है।

प्रश्न-1. एक डॉक्टर किस तरह मरीज के साथ कम्फर्ट जोन बना सकता है?

उत्तर-1. समय की कमी के चलते कई बार डॉक्टर और मरीज के बीच में कम्फर्ट जोन नहीं बन पाता है। जिससे डॉक्टर और पेशेंट दोनों को ही कम्फर्ट जोन बनाने में दिक्कत आती है और यह रिश्ता सिर्फ प्रोफेशनल ही रह जाता है। हालांकि कुछ सिंपल स्टेप्स की मदद से एक डॉक्टर और मरीज कम समय में भी हेल्दी और कम्फर्ट जोन बना सकते हैं।

i. अपने समय को अच्छी तरह से मैनेज कर डॉक्टर और मरीज कम्फर्ट जोन स्थापित कर सकते हैं। अगर डॉक्टर अपने समय को अच्छी तरह ये यूज़ कर रहे हैं तो वह कम समय में भी अपने मरीज को बेहतर तरह से जान सकते हैं।

ii. अगर डॉक्टर चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ मरीज से मिले तो एक मरीज साइकालॉजिकली आधा रिलैक्स हो जाता है और डॉक्टर पर उसका भरोसा भी बढ़ जाता है। ऐसे में डॉक्टर मरीज से जो भी पूछें वह उसका सच-सच जवाब देते हैं और डॉक्टर की बातों को गंभीरता से फॉलो भी करते हैं।

iii. जब भी डॉक्टर अपने मरीज से मिलें तो शुरुआत 'आप कैसे हैं?' या 'आज आप कैसा महसूस कर रहे हैं' जैसे सवाल से करनी चाहिए। इससे रोगी को महसूस होता है कि डॉक्टर वाकई उसकी बात को सुनना चाहता है।

iv. क्योंकि जब एक मरीज डॉक्टर के पास जाता है तो बहुत सारी उम्मीदों और आशाओं के साथ जाता है। ऐसे में भले ही डॉक्टर मरीज की उम्मीदों पर खरा न उतर पाए लेकिन कोशिश करनी चाहिए कि वह मरीज की बातों को ध्यान से सुनें और उन्हें पूरा करने की कोशिश करें।

v. डॉक्टर्स का कम्युनिकेशन लेवल बहुत अच्छा होना चाहिए। डॉक्टर को कम्युनिकेशन तकनीक में माहिर होने की जरूरत है। डॉक्टर कहती हैं कि मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे उनके कुछ दोस्तों ने बताया कि अब उनके कोर्स में कम्युनिकेशन की क्लासेस भी जोड़ी जा रही हैं। यानि कि बेहतर परिणाम के लिए बेहतर कम्युनिकेशन होना बहुत जरूरी है।

vi. कई बार डॉक्टर में​टल स्ट्रेस की वजह से, मरीज की बिगड़ती तबीयत को देखकर या फिर कई बार मरीज के परिवार की तरह से मिलने वाले खराब बर्ताव के चलते चिड़चिड़े हो जाते हैं और कुछ ऐसा बोल जाते हैं जो उन्हें नहीं बोलना चाहिए। डॉक्टर्स कैसे खुद को कंट्रोल रखें और नाजुक वक्त में कुछ ऐसी बात न बोल दें जिससे मरीज की तबीयत और भी ज्यादा खराब हो जाए इसलिए ट्रेनिंग मिल रही है जो बहुत जरूरी भी है और हर डॉक्टर को इस दिशा में खुद पर भी काम करना चाहिए।

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प्रश्न-2. एक मरीज अपने डॉक्टर के साथ हेल्दी रिलेशन की शुरुआत कैसे कर सकता है?

उत्तर-2. मरीज और डॉक्टर के बीच में कम्फर्ट जोन रहे, ये सिर्फ डॉक्टर की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि इसके लिए मरीज को भी प्रयास करना चाहिए। कुछ आसान टिप्स को अपनाकर एक मरीज भी अपने डॉक्टर के साथ हेल्दी रिलेशनशिप की शुरुआत कर सकता है।

i. अगर आप सालों से या पिछले कुछ समय में किसी डॉक्टर को विजिट कर रहे हैं लेकिन आप उनके साथ कम्फर्टबल नहीं हैं तो आपको एक्सप्रोर कर अपना डॉक्टर बदलना चाहिए। आप चाहें तो 3-4 डॉक्टर से कन्सल्ट कर अपने लिए बेस्ट डॉक्टर चुन सकते हैं। इस केस में भले ही आपको हर बार फीस देनी चाहिए लेकिन आपको अपने कम्फर्ट के हिसाब के डॉक्टर से ही परामर्श लेना चाहिए।

ii. मरीज को अपने डॉक्टर के साथ खुलकर बात करनी चाहिए। अगर मरीज को डॉक्टर की कोई बात समझ नहीं आ रही है या कहीं पर परेशानी हो रही है तो हां में हां भरने के बजाय उस विषय पर खुलकर बात करनी चाहिए। इससे धीरे धीरे डॉक्टर भी आपके साथ पर्सनली बात करना शुरू करेंगे।

iii. मरीज को डॉक्टर के वक्त की और उनकी बाउन्डरी की कद्र करनी चाहिए। जब मरीज ऐसा करेगा तो डॉक्टर भी उनके साथ उसी तरह का बर्ताव करेंगे। क्योंकि डॉक्टर बहुत बिजी होते हैं और उन्हें एक ही समय पर कई चीजों पर नजर रखनी होती है। इसलिए मरीज यह कतई न सोचे कि वह फीस दे रहा है तो जैसा वो बोले डॉक्टर वैसा करेंगे। बल्कि डॉक्टर के पर्सनल स्पेस की कद्र करनी चाहिए।

iv. अगर मरीज को डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं से या सुझाव से आराम मिलता है तो डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए। मरीज चाहे तो डॉक्टर की सराहना मैसेज लिखकर भी कर सकता है या अगली बार डॉक्टर के पास जाना पड़े तो फेस टू फेस भी यह बात बोल सकता है। इससे आपके बीच में अच्छी बॉंडिंग तो बनेगी ही साथ ही डॉक्टर को भी आपक अप्रीशीऐशन पसंद आएगा।

प्रश्न-3. डॉक्टर के लिए कुछ टिप्स बताइए जिससे वह अपने मरीज के साथ बेहतर कम्युनिकेशन लेवल विकसित कर पाएं

उत्तर-3. जैसा कि हम पहले बता चुके हैं कि डॉक्टर को मरीज से मिलते ही एक मुस्कान के साथ पूछना चाहिए कि 'आप कैसे हैं?' या 'आज आप कैसा महसूस कर रहे हैं?' इससे मरीज काफी रिलेक्स हो जाता है और उसे लगता है कि डॉक्टर उसकी बात को गंभीरता से सुनने के लिए तैयार हैं।

i. शुरु के कम से कम 1 से 2 मिनट तक डॉक्टर को सिर्फ मरीज को बोलने का मौका देना चाहिए।

ii. जब एक डॉक्टर और मरीज की कन्सलटेशन खत्म हो तो डॉक्टर को मरीज को बोलना चाहिए कि अगर पर्चे में लिखी दवा के दौरान उन्हें किसी भी तरह के साइड इफेक्ट्स दिखते हैं या वह दवा लेते वक्त अच्छा महसून नहीं करते हैं तो तुरंत उनसे संपर्क करें। इससे मरीज का डॉक्टर पर भरोसा और भी ज्यादा बढ़ जाएगा और वह निश्चिंत होकर दवा का सेवन करेगा।

प्रश्न-4. डॉक्टर्स काफी बिजी रहते हैं, ऐसे में नए मरीजों को देखने के साथ ही पुराने मरीजों के साथ फॉलो अप कैसे किया जाए?

उत्तर-4. यह बिल्कुल सही है कि फॉलो अप बहुत जरूरी है। लेकिन कई बार मरीज इसका फायदा भी उठाने लगते हैं और हर छोटी-छोटी बात के लिए डॉक्टर को फोन करते हैं। इसलिए जब मरीज पहली बार डॉक्टर के पास आए तो उसी दौरान डॉक्टर को यह साफ कर देना चाहिए 'यह जरूरी नहीं है कि वह उनकी हर कॉल का या हर सवाल का समय पर जवाब दे पाएंगे, हालांकि वह कोशिश करेंगे।'' डॉक्टर को अपने पास एक अलग नंबर रखना चाहिए जिससे वह अपने मरीजों को बोल सकते हैं कि वह उस नंबर पर मैसेज कर सकते हैं और समय मिलने पर वह उनका जवाब जरूर देंगे। अगर डॉक्टर शुरू में ही यह बात मरीज के साथ क्लीयर कर देंगे तो मरीज भी डॉक्टर के वक्त की कद्र करेंगे और बेवजह उन्हें परेशान नहीं करेंगे।

हालांकि कई बार कन्सलटेशन फीस से बचने के लिए भी मरीज बार बार डॉक्टर के पास जाने से बचते हैं और फोन पर ही बात करना मुनासिब समझते हैं। इस स्थिति में डॉक्टर्स फॉलो अप के लिए एक समय निर्धारित कर सकते हैं जिसमें वे सिर्फ फॉलो अप वाले मरीजों को ही देखें।

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प्रश्न-5. बेहतर रिलेशन बनाने के लिए क्या किसी मरीज को डॉक्टर के बर्थ डे पर, मैरिज एनिवर्सरी पर या फिर किसी पर्सनल इवेंट पर विश करना चाहिए?

उत्तर-5. बर्थ डे या मैरिज एनिवर्सरी पर विश करना बहुत पर्सनल हो जाता है। अगर किसी मरीज की डॉक्टर के साथ उस लेवल की बॉन्डिंग पहले से है तब ही बर्थ डे पर विश करना चाहिए। हालांकि न्यू ईयर, फेस्टिवल या किसी और ओकेज़न पर विश किया जा सकता है।

प्रश्न-6. किसी डॉक्टर के साथ कंसल्ट करते वक्त एक मरीज को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

उत्तर-6. - अपनी भाषा और टोन पर संयम रखें.

- यदि आपको पर्चे में लिखी गई पुरानी दवाओं से आराम नहीं हुआ तो डॉक्टर पर चिल्लाने या गलत तरीके से बात करने के बजाय आराम से अपनी बात रखें।

- डॉक्टर को अपनी बीमारी और लक्षणों के बारे में विस्तार से जानकारी दें। यह समझने की भूल न करें कि आपके हिंट देने से डॉक्टर अपने आप ही आपकी बीमारी को समझ लेंगे।

- कंसल्टेशन खत्म होने के बाद डॉक्टर को थैंक्यू जरूर बोलें। इससे आप दोनों के बीच में एक हेल्दी रिलेशन बनेगा और पॉ​जीटिव वाइब्स रहेंगी।