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पिछले कुछ वर्षों में विशेषज्ञों द्वारा यह अनुभव किया गया है कि, एक आम युवा से लेकर बड़े-बड़े सेलिब्रिटी तक हृदय रोगों (Cardiovascular Disease) की चपेट में आ रहे हैं। हाल ही में कई जानी-मानी हस्तियों की कम उम्र में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी दिल की बीमारियों से मौत होने की बात सामने आ चुकी है। इससे ना सिर्फ लोगों में डर पैदा होती है बल्कि लोगों को सीख लेने की भी जरूरत है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (National Library of Medicine) में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, नॉन कम्युनिकेबल डिजीज की बात करें तो इसमें हृदय रोग, कैंसर, क्रॉनिक रेस्पिरेट्री इलनेस, डायबिटीज आदि शामिल हैं। जो करीब 60% मौतों का कारण है। इनमें अकेले हृदय रोग 17.7 मिलियन मौतों के लिए जिम्मेदार हैं और प्रमुख कारण भी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में दुनिया भर में इन मौतों का पांचवा हिस्सा विशेष रूप से युवा आबादी में है।
एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबई के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर संतोष कुमार डोरा कहते हैं कि, 'भारतीय युवाओं में हृदय रोगों खासकर हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट, स्ट्रोक और कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) की संभावना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जिसे समय रहते रोकना बहुत जरूरी है। यह जानलेवा है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि इन के कारणों को पहचाना जाए और उससे बचाओ के उपाय किए जाएं साथ ही उपचार के लिए किसी अच्छे चिकित्सक से सलाह ली जाए।'
हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है। यह बिना किसी चेतावनी के ही काफी हावी हो सकता है। इसके लक्षण भी तुरंत देखने को नहीं मिलते है। धूम्रपान करना, शराब का सेवन करना, खराब खाना खाने की आदतें जैसे अधिक नमक और अधिक फैट से बनी चीजें खाना, ज्यादा वजन बढ़ना, जीवन में स्ट्रेस ज्यादा बढ़ना हाइपर टेंशन के कुछ मुख्य कारण हैं। हाई ब्लड प्रेशर अगर ठीक नहीं किया जाता है तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेल होना और आंखों से जुड़ी समस्या में बदल सकता है।
दुनिया भर में हुई रिसर्च के मुताबिक टाइप 2 डायबिटीज से हृदय रोगों का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ता है। जितने लम्बे समय तक आपको डायबिटीज होंगी, उतना ही ज्यादा आपका दिल की बीमारी होने का रिस्क बढ़ जाएगा। टाइप 2 डायबिटीज के मरीज हृदय रोगों जैसे ब्लड वेसल डेमेज होना, हाई ब्लड शुगर लेवल आदि के ज्यादा रिस्क में रहते हैं।
स्टडीज ने यह साबित कर दिया है कि लंबे समय तक स्ट्रेस रहना व्यक्ति को अन हेल्दी ऑप्शन चुनने पर मजबूर कर सकती है। अगर काम से जुड़ी स्ट्रेस देखने को मिल रही है तो खराब लाइफस्टाइल चॉइस की संख्या भी बढ़ सकती है। स्टडीज ने यह भी दर्शाया है कि ऐसी स्ट्रेस के मरीज आगे जा कर हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल और डायबिटीज जैसी बीमारियों के रिस्क में ज्यादा रहते हैं।
यह एक आवश्यक मॉलिक्यूल है जो आपका शरीर प्राकृतिक रूप से प्रोड्यूस करता है। आप खाद्य पदार्थों जैसे अंडे, श्रींप का सेवन करने से भी इसे प्राप्त करते हैं। अगर इसका मात्रा काफी ज्यादा हो जाती है तो कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यह आपके सॉफ्ट टिश्यू और आर्टरीज जैसे ऑर्गन में प्लैक डिपोजिट का कारण बन सकता है जिससे आपका माइकार्डियल इन्फार्क्शिन या एंजिना का रिस्क बढ़ सकता है।
आपकी सेहत के लिए मोटापा काफी रिस्की होता है। यह डायबिटीज का कारण बन सकता है, जो कार्डियो वैस्कुलर डिजीज और स्ट्रोक में परिवर्तित हो सकती है। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के मुताबिक, मोटा व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर और टाइप 2 डायबिटीज का ज्यादा रिस्की होता है जो दिल की बीमारियों का कारण बन सकती हैं।
अगर आप एक दिन में एक सिगरेट का डिब्बा पीते हैं तो इससे आपके जीवन में रिस्क उन लोगों के मुकाबले चार गुणा बढ़ जाता है जो धूम्रपान नहीं करते हैं। स्मोकिंग करने से आपके आस पास के लोगों के लिए भी खतरा बढ़ जाता है।
बढ़ा हुआ वायु प्रदूषण भी दिल से जुड़े डिसऑर्डर को बढ़ाने में एक अहम भूमिका निभा रहा है। इससे हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, स्ट्रोक और एरिथमिया का खतरा बढ़ जाता है। स्टडीज के मुताबिक प्रदूषित हवा में रहने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
अगर आपके माता-पिता 55 साल की उम्र से पहले ही हृदय रोगों के मरीज बन जाते हैं तो आपके भी ऐसी ही बीमारी के मरीज बनने की 50% संभावना बढ़ जाती है।
(Inputs By: Dr. Santosh Kumar Dora, Senior Cardiologist, Asian Heart Institute, Mumbai)