
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 14, 2024 8:31 AM IST
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Management of pain in pelvic floor: पेल्विक फ्लोर एरिया में दर्द (pelvic floor pain) या पेडू में दर्द एक तकलीफभरी स्थिति है लेकिन, अक्सर इसकी तरफ लोगों का ध्यान नहीं जाता। आमतौर पर लोगों को इस स्थिति के बारे में काफी देर से पता चलता है और इसकी जांच भी तब करायी जाती है जब दर्द बहुत अधिक बढ़ जाता है और व्यक्ति इस तकलीफ की वजह से परेशान हो जाता है। पेल्विक फ्लोर पेन की समस्या महिलाओं और पुरुषों (pelvic floor pain) दोनों में देखी जाती है।
पेल्विक फ्लोर अलग-अलग मसल्स का एक समूह है। यह प्यूबिक बोन से होते हुए टेलबोन तक फैला होता है। मानव शरीर में ब्लैडर (bladder), मूत्रमार्ग, मलाशय और कोलोन जैसे अंग पेल्विक फ्लोर को सपोर्ट देते हैं। महिलाओं में गर्भाशय तो वहीं पुरुषों में प्रोस्टेट को भी सपोर्ट देने का काम पेल्विक फ्लोर ही करता है।
डॉ. राघवेंद्र रामनजुलु (Dr Raghavendra Ramanjulu, Lead Consultant , Pain and Palliative Medicine, Aster CMI Hospital, Bangalore) का कहना है कि पेल्विक फ्लोर का दर्द टेलर बोन के दर्द से मिलता-जुलता-सा होता है। इसीलिए, कई बार लोग इस दर्द को पहचान नहीं पाते।यही वजह है कि कई बार लोग इस दर्द को coccydynia or tailbone pain समझ लेते हैं। इन दोनों ही स्थितियों में पेडू या पेल्विक एरिया में दर्द होता है लेकिन दोनों ही स्थितियों के कारण और उनके इलाज के तरीके अलग होते हैं।
पेट के नीचले हिस्से की मसल्स में दर्द और परेशानी (discomfort or pain in the muscles)
कनेक्टिव टिश्यूज में दर्द
ब्लैडर, यूट्रस, प्रोस्टेट और रेक्टम जैसे अंगों में दर्द
चलने-फिरने और उठते-बैठते समय दर्द महसूस करना
सभी जरूरी टेस्ट और डायग्नोसिस के बाद डॉक्टर आपको पेल्विक फ्लोर पेन से आराम दिलाने वाले उपायों के बारे में बता सकते हैं। आमतौर पर दर्द को कम करने के लिए ये उपाय किए जा सकते हैं-
इनकी मदद से पेल्विक एरिया में तनाव और दर्द को कम करने की कोशिश की जाती है।
दर्द, तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन को कम करने के प्रयास किए जाते हैं ताकि पेल्विक फ्लोर पर दबाव और दर्द कम किया जा सके।
डाइटरी फाइबर से भरपूर डाइट लेने की सलाह दी जा सकती है ताकि कॉन्स्टिपेशन जैसी स्थितियों से बचा जा सके।
हाइड्रेटेड रहने के लिएअधिक से अधिक मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जाती है।