
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : April 21, 2026 2:49 PM IST
Medically Verified By: Dr. J. B. Sharma
भारत में लंग कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
Early Symptoms of lung Cancer: फेफड़ों का कैंसर आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारियों में से एक है। अक्सर इसकी शुरुआत बहुत ही सामान्य लक्षणों से होती है, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही बाद में बीमारी को गंभीर बना देती है। दिल्ली के एक्शन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल ऑन्कोलॉजी एंड इम्यूनोथेरेपी, एक्शन कैंसर हॉस्पिटल के मेडिसिन एवं थेराप्यूटिक्स विभाग के निदेशक डॉ. जे.बी. शर्मा बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति में फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो इसका इलाज सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
डॉ. जे.बी. शर्मा के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर तब शुरू होता है जब फेफड़ों की कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं। आमतौर पर यह समस्या लंबे समय तक धूम्रपान करने, प्रदूषण, धूल-धुएं या जहरीले केमिकल्स के संपर्क में रहने से पैदा होती है।
भारत में जब फेफड़ों के कैंसर की बात आती है, तो अक्सर लोग समझते हैं कि यह बीमारी सिर्फ धूम्रपान करने वालों को होती है, लेकिन जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं उन्हें भी यह बीमारी हो सकती है। शुरुआती चरण में फेफड़ों के कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है और शरीर में कोई स्पष्ट संकेत नहीं देता है। लेकिन जैसे ही फेफड़ों के कैंसर शरीर के एक हिस्से से दूसरे में फैलने लगता है, फेफड़ों के कैंसर के लक्षण सामान्य रूप से दिखने लगते हैं।
लंग कैंसर धूम्रपान न करने वालों को भी हो सकता है।
लंग कैंसर का इलाज संभव है।
डॉ. जे.बी. शर्मा का कहना है कि भारत और अन्य विकासशील देशों में जिस तरह से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है, उस स्थिति में फेफड़ों के कैंसर का खतरा लगभग हर व्यक्ति को है। लेकिन कुछ लोगों में फेफड़ों के कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है। इसमें शामिल हैः
इसके अलावा परिवार में कैंसर का इतिहास होने पर भी फेफड़ों के कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। अगर ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण लगातार दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
हां, अगर फेफड़ों के कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए, तो इसका इलाज पूरी तरह से संभव है। फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए धूम्रपान से दूरी बनाएं, अगर आप प्रदूषित क्षेत्र में रहते हैं तो घर से बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करें। हर 3 महीने में एक बार हेल्थ चेकअप करवाएं।
डॉक्टर बताते हैं कि फेफड़ों के कैंसर के प्रति जागरूकता और समय पर जांच ही इसके खिलाफ सबसे मजबूत हथियार हैं।अगर आप अपने शरीर के संकेतों को समझें और समय रहते कदम उठाएंगे, तो फेफड़ों के कैंसर से बचाव और इसका इलाज भी संभव है।
फेफड़ों के कैंसर का पहला चरण सबसे शुरुआती अवस्था है। इसका मतलब है कि कैंसर छोटा है और केवल फेफड़ों तक ही सीमित है। यह लिम्फ नोड्स या शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैला है। अक्सर इसी अवस्था में उपचार सबसे प्रभावी होता है और जीवित रहने की दर भी सबसे अधिक होती है।
कोलन (बड़ी आंत) कैंसर के शुरुआती लक्षणों में मल त्याग की आदतों में बदलाव (लगातार कब्ज या दस्त), मल में खून आना या मल का रंग गहरा होना, पेट में लगातार दर्द, ऐंठन या गैस, बिना किसी कारण के वजन कम होना, और थकान महसूस होना शामिल हैं।
फेफड़ों के कैंसर का पता लगातार खांसी (जो 3 सप्ताह से अधिक रहे), खून वाली खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द और बिना कारण वजन कम होने से चलता है। फेफड़ों के कैंसर का पता लगाने के लिए लो-डोज सीटी स्कैन (LDCT), छाती का एक्स-रे, बलगम की जांच (cytology) और बायोप्सी जैसे टेस्ट किए जाते हैं।
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