चौंकाने वाली रिपोर्ट: दिल्ली में पैर फ्रैक्चर होने मामले 15 से 20 प्रतिशत बढ़े, जानें इसका मानसून कनेक्शन

Foot fracture cases in monsoon: हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार मानसून में लोगों को पैर से जुड़े फ्रैक्चर होने का खतरा ज्यादा रहता है और इस कारण से अस्पतालों में भी पैर फ्रैक्चर के मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : August 19, 2023 1:07 PM IST

जब भी हम किसी दुर्घटना का शिकार होते हैं या फिर हम किसी अन्य कारण से गिर जाते हैं, तो सबसे ज्यादा चोट लगने का खतरा पैरों व उसके आसपास के हिस्सों को ही होता है। मानसून के मौसम में पैर और टखने के दर्द की घटनाओं में 15 से 20 प्रतिशत वृद्धि देखी गई है। सड़कों पर बने हुए गड्ढे व टूटी-फूटी खराब सड़कों पर दुर्घटनाएं होने का खतरा ज्यादा मानसून में ही रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि सड़कों पर पानी भर जाने के कारण ये गड्ढे पानी से भर जाते हैं और दिखाई नहीं देते हैं। हालांकि खराब जूते व चप्पल भी पैर में फ्रैक्चर के प्रमुख कारणों में से एक हैं। डॉक्टर्स द्वारा दी गई जानकारियों के अनुसार खराब सड़कों और खराब जूतों के कारण पैरों में मोच और यहां तक कि फ्रैक्चर की शिकायतों में बढ़ोतरी देखी गई है। डॉक्टर बता रहे हैं कि अस्पताल के ओपीडी में हर दिन टखने की चोट और फ्रैक्चर वाले 3 से 4 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। अगर समय रहते इस चोट पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसके दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं।

कम उम्र में फ्रैक्चर का खतरा ज्यादा

बच्चों की हड्डियां कमजोर होती हैं, क्योंकि वे विकसित हो रही होती है और इसलिए गिरने-फिसलने से उन्हें फ्रैक्चर होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।इससे टखने, लिगामेंट्स और पैर की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ना भी इसका कारण हो सकता है। लेकिन, मानसून के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी बरतनी बहुत जरूरी है। क्योंकि बरसात के दिनों में सड़कों पर गड्ढे हो जाते हैं। ऐसे समय में सड़क पर चलते समय पैर फिसलने या पैर की हड्डी टूटने की संभावना अधिक रहती है।

अस्पतालों में आ रहे ज्यादा मरीज

दिल्ली स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के ऑर्थोपेडिक सर्जन गौरव खेरा ने कहा कि, मरीज फिसलने या गिरने के कारण टखने में चोट के इलाज के लिए आते हैं। लेकिन, फिलहाल अस्पताल के ट्रामा केयर सेंटर में बारिश के मौसम में हर दिन पैर फ्रैक्चर के 3 से 4 मरीज आ रहे हैं। आम शिकायतों में टखने की चोट, सौम्य लिगामेंट चोटें, लिगामेंट टूटना या फ्रैक्चर शामिल हैं।

अलग-अलग तरीकों से इलाज

फ्रैक्चर के उपचार के लिए प्लास्टर कास्ट की आवश्यकता होती है। इस अवधि के दौरान, घायल टखने पर वजन डालने से बचने के लिए वजन उठाने से मना किया जाता है। कुछ अन्य गंभीर मामलों में प्लेट और स्क्रू से फ्रैक्चर को ठीक करना आवश्यक हो सकता है। ऐसे मामलों में मरीज को पूरी तरह ठीक होने में अधिक समय लगता है। पैर या कमर में फ्रैक्चर को ठीक होने में तीन सप्ताह लगते हैं। फिर ऐसे मरीजों को फिजियोथेरेपी की सलाह दी जाती है। ऐसे में समय पर इलाज बहुत जरूरी है। अन्यथा चोट और भी खराब हो सकती है. इसलिए मानसून के दौरान सड़क पर चलते समय सावधानी बरतनी जरूरी है।

रीढ़ की हड्डी में भी हो ही परेशानियां

डॉक्टर गौरव ने आगे कहा कि, सड़क पर बारिश का पानी जमा होने के कारण सड़कों पर गड्ढों जमे हुए हैं। इस गड्ढों से गाडी चलाते समय पीठ पर चोट लगने की संभावना अधिक होती हैं। सड़क के गड्ढों से रीढ़ की हड्डी में परेशानी, कमर में झटका लगने से कमर दर्द, रीढ़ की हड्डी ऊपर-नीचे होने पर कमर दर्द, धक्कों से हड्डी टूटने की आशंका, बुजुर्गों में कमर दर्द बढ़ जाता है। आमतौर पर बाइक सवारों को स्पोंडिलोसिस, लम्बर स्पोंडिलोसिस, स्लिप डिस्क रोग होने का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा, यदि ऑस्टियोपोरोसिस या सार्कॉइड के मरीज हैं, तो उन्हें कमर और पीठ दर्द होने का खतरा रहता हैं।

ध्यान रखना जरूरी

डॉक्टर गौरव ने कहा कि खासतौर पर मानसून के मौसम में चोट लगने से खुद का बचाव करना विशेष रूपसे जरूरी है। इसलिए बाहर पैदल चलते हुए या फिर गाड़ी या बाइक आदि चलाते समय विशेष सावधानी बरतें। मानसून में अच्छे और स्पोर्ट देने वाले जूतों का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। चिकनी सतह वाले ऊँची एड़ी और सैंडल का उपयोग करने से बचें। गीली या असमान सतहों पर चलते समय सावधान रहें। पोखरों, कीचड़ और अन्य बाधाओं से सावधान रहें जिनके कारण आप फिसल सकते हैं या अपना संतुलन खो सकते हैं।

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