डेंगू को बढ़ने से रोकने के लिए एक्सपर्ट ने बताया क्या है सबसे ज्यादा जरूरी, बरसात के मौसम से पहले जान लें ये बात

National Dengue Day: गर्मियों के मौसम में मच्छर तेजी से पनपने लगते हैं और इस कारण से डेंगू जैसी मच्छर जनित बीमारियों के मामले भी बढ़ जाते हैं। इस लेख में एक्सपर्ट से जानें डेंगू जैसी बीमारियों को कंट्रोल करने के लिए कौन सी चीज सबसे ज्यादा जरूरी है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : May 16, 2023 4:07 PM IST

Dengue control measures: दिल्ली जैसे शहरों में गर्मियों का मौसम आते ही मच्छरों का डंक शुरू हो जाता है। बरसात के मौसम से पहले ही मच्छरों ने लोगों को परेशान कर दिया है और बरसात का मौसम आते-आते डेंगू व अन्य मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हर बार की तरह डेंगू से निपटने के लिए देश के स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं और खूब मेहनत भी करते हैं, लेकिन फिर भी किसी न किसी कारण से डेंगू का खतरा बढ़ जाता है। डेंगू के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए उसकी रोकथाम के सही तरीकों को जानना जरूरी है। बारिश का मौसम जल्दी ही आने वाला है और इसके साथ ही दिल्ली में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। डेंगू के बढ़ते मामलों से बचने के लिए हमने इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट और पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉक्टर राजेश चावला से बात की जिन्होंने डेंगू को बढ़ने से रोकने के लिए सबसे जरूरी चीजों के बारे में हमें जानकारी दी।

डेंगू से निपटने के लिए वेक्टर कंट्रोल जरूरी

डॉक्टर राजेश चावला के अनुसार बरसात के मौसम में डेंगू के तेजी से बढ़ने वाले मामलों में निपटने के लिए वेक्टर कंट्रोल जरूरी होता है। वेक्टर का मतलब वाहक है यानी जिसकी मदद से यह वायरस लोगों में फैलता है। डॉक्टर राजेश ने बताया एडीज मच्छर डेंगू वायरस का वाहर है और इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए इस मच्छर को पनपने से रोकना जरूरी है। सरल शब्दों में कहें तो मच्छरों को पनपने से रोकना ही डेंगू के लिए वेक्टर कंट्रोल तकनीक है।

वेक्टर कंट्रोल कैसे किया जाता है

डॉक्टर चावला ने बताया कि वेक्टर कंट्रोल तकनीक रणनीतियां अपनाई जाती हैं, जिनमें एनवायरमेंटल मैनेजमेंट, केमिकल कंट्रोल और बायोलॉजिकल कंट्रोल आदि शामिल है। ये रणनीतियां कुछ इस प्रकार हैं -

एनवायरमेंटल मैनेजमेंट

इसमें उन जगहों को हटाया या साफ किया जाता है, जहां मच्छर पनप रहे होते हैं। मच्छर आमतौर पर ठहरे हुए पानी में अंडे देते हैं जैसे किसी जगह पर बरसात का पानी रुका हुआ होना, पुराने टायर, कूलर या कोई पुरानी टंकी में भरा हुआ पानी आदि।

केमिकल कंट्रोल

इसमें कीटनाशकों के इस्तेमाल से मच्छरों और उनके लार्वा को मारा जाता है। यह तरीका वेक्टर कंट्रोल में काफी प्रभावी रूप से काम करता है, लेकिन यह वातावरण के लिए हानिकारक भी हो सकता है। साथ ही इनका ज्यादा इस्तेमाल करने से मच्छरों पर इन दवाओं का असर होना भी कम हो सकता है।

बायोलॉजिकल कंट्रोल

इस तकनीक में मच्छरों को कम करने के लिए प्राकृतिक प्रेडिटर्स का इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के लिए बैसिलस थुरिंजिनिसिस नामक एक खास बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया जाता है, जो मच्छरों को लिए विषाक्त होते हैं। यह बैक्टीरिया मनुष्यों के लिए सुरक्षित और मच्छरों के लिए हानिकारक होता है।

हालांकि, डेंगू से बचने के लिए खुद की देखभाल करना भी बहुत जरूरी है। उदाहरण के लिए घर पर खिड़की दरवाजे बंद रखें, पूरे कपड़े पहनें और मच्छरदानी आदि का इस्तेमाल भी करते रहें। साथ ही यदि आपको डेंगू से जुड़े किसी प्रकार के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि डेंगू जैसी बीमारियों का जल्द से जल्द इलाज शुरू करना स्थिति को गंभीर होने से बचा सकता है।