
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Blood disorder: खून हमारे शरीर का एक बहुत जरूरी हिस्सा है, जिसे स्वस्थ रखना भी बहुत जरूरी है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों में ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने के साथ-साथ ब्लड हमारे शरीर में कई जरूर काम करता है। चोट लगने के बाद खून निकलना एक आम प्रक्रिया है, लेकिन अगर खून छोटी सी चोट के बाद भी ज्यादा निकल रहा है, तो यह खून से जुड़ा कोई विकार हो सकता है। हीमोफीलिया भी एक प्रकार का ब्लड डिसऑर्डर है, जिसमें चोट लगने पर ज्यादा खून बहना और नाक व मसूड़ों से खून आने की समस्या होने लगती हैं। इसे ब्लीडिंग डिसऑर्डर भी कहा जाता है। बहुत से लोग हीमोफीलिया को एक प्रकार का कैंसर समझ लेते हैं, लेकिन यह कैंसर नहीं होता है। हीमोफीलिया आमतौर पर ब्लड क्लॉटिंग प्रक्रिया को प्रभावित करता है और इस कारण से इसके कई जानलेवा समस्याएं विकसित हो सकती हैं। हीमोफीलिया जैसी जानलेवा स्थिति से बचने के लिए उसके प्रति पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है। चलिए एक्सपर्ट्स से जानते हैं क्या है हीमोफीलिया
मैक्स सुपर स्पेशलिटी के एसोसिएट डायरेक्टर सेंट्रल ऑफ बोन मेरो ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट डॉक्टर पवन कुमार ने बताया कि हीमोफीलिया एक जेनेटिक ब्लड डिसऑर्डर है। हीमोफीलिया आमतौर पर 3 प्रकार का होता है और इसके प्रकारों को हीमोफीलिया ए, बी और सी के नाम से जाना जाता है। इस ब्लड डिसऑर्डर में आमतौर पर ब्लीडिंग होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है और छोटी सी चोट से ज्यादा रक्तस्राव होने लगता है।
डॉक्टर पवन कुमार ने बताया कि हीमोफीलिया का ए और बी प्रकार आमतौर पर पुरुषों में ज्यादा देखा जाता है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि यह बीमारी सिर्फ पुरुषों में ही देखी जाती है, महिलाओं को भी हीमोफीलिया की शिकायत हो सकती है। नोट करने की बात यह है कि जिन महिलाओं को हीमोफीलिया की शिकायत है, पेरेंटल डायग्नोसिस करना बहुत जरूरी होता है ताकि स्थिति की रोकथाम की जा सके। गर्भवती महिलाओं में भी हीमोफीलिया की जांच की जा सकती है और डिलीवरी के साथ इसका इलाज करना जरूरी है।
डॉक्टर पवन कुमार ने बताया कि हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में हर किसी की पर्याप्त जानकारी होना बहुत जरूरी है। डॉक्टर पवन के अनुसार रिप्लेसमेंट थेरेपी ही हीमोफीलिया का एक संभव इलाज हो सकता है। हालांकि, हीमोफीलिया के दौरान हो रही ब्लीडिंग को रोकने के लिए सामान्य रूप से रक्तस्राव को रोकने की तकनीक का इस्तेमाल भी किया जाता है।
भारत में हीमोफीलिया का इलाज के लिए रिप्लेसमेंट थेरेपी व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है। लेकिन इस साल सरकार भारत में हीमोफीलिया के सभी मरीजों के लिए रिप्लेसमेंट थेरेपी को उपलब्ध कराने के विचार कर रही है। डॉक्टर पवन कुमार ने कहा कि मैं हीमोफीलिया से जुड़ी स्थिति की जागरुकता बढ़ाने के लिए सभी के आगे आग्रह करता हूं और सरकार के इस कदम का समर्थन करता हूं।