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Promoting Understanding And Support About Autism:ऑटिज्म एक अस्थायी समस्या है जो कुछ बच्चों के जीवन को प्रभावित कर सकती है। ऑटिज्म उनकी राह का रोड़ा नहीं बन सकता। हालांकि, इससे बाहर निकलने के लिए सही समय पर सही सपोर्ट की जरूरत पड़ती है। कई बार माता-पिता को ऐसा महसूस हो सकता है कि उनका बच्चा कहीं अटक गया है और अपनी ही दुनिया में खोया रहता है, अपनी भावनाएं या विचार शेयर नहीं करता और ऐसे में माता-पिता को इस बात की चिंता होने लगती है कि बच्चे का भविष्य क्या होगा। लेकिन, यह फेज उनकी यात्रा को समझने और उसमें साथ देने का है, ऐसे में बच्चे को ढेर सारा प्यार दें और उनकी जरूरतों को समझकर उनकी मदद करें। यह कहना है डॉ. प्रदीप महाजन (Dr Pradeep Mahajan, Regenerative medicine Researcher & Founder of StemRx Hospital & Research centre) का जो ऑटिस्टिक बच्चों को बहुत करीब से देखते हैं।
डॉ. महाजन बता रहे हैं कि ऑटिज्म में बच्चे की मदद करने उनके सही विकास और समझ को विकसित करने के लिए किस तरह के उपाय अपनाए जा सकते हैं और इन सबमें माता-पिता या आसपास के लोगों की क्या भूमिका हो सकती है।
ऑटिज्म बच्चों और उनके माता-पिता के लिए एक मुश्किल पहेली जैसा हो सकता है। क्योंकि, ऑटिज्म में बच्चों को अपने दोस्तों से बात करने में मुश्किल आ सकती है। उन्हें शोर-गुल, तेज आवाज और भीड़ से असुविधा हो सकती है। इसी तरह बच्चों को कई बार यह बता पाना मुश्किल हो जाता है कि उनके भीतर क्या विचार चल रहे हैं, वे रोते हैं-चिल्लाते हैं और कई बार शांत भी बैठ सकते हैं। ऐसे में माता-पिता के लिए बच्चे की चिंता करना स्वाभाविक है।
डॉ. प्रदीप महाजन कहते हैं कि, हर ऑटिस्टिक बच्चा अलग होता है। उनमें से कुछ बहुत क्रिएटिव या अपनी चीजों को अच्छी तरह मैनेज करने में सक्षम होते हैं। कुछ बच्चों को बहुत अधिक मदद की जरूरत पड़ सकती है तो वहीं कुछ को केवल थोड़े-से गाइडेंस और सपोर्ट की। ऑटिज्म को सही समय पर पहचान पाना और उसका इलाज शुरू करने से ये मुश्किलें आसान हो सकती हैं और बच्चे का विकास ठीक तरीके से हो सकता है।
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशन उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।