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What Are The Causes of Lung Cancer Other Than Smoking: जब भी लंग कैंसर की बात होती है, तो सबसे पहले ध्यान धूम्रपान (स्मोकिंग) की ओर जाता है, क्योंकि यह इस बीमारी का सबसे बड़ा और प्रमुख कारण माना जाता है। तंबाकू के धुएं में मौजूद हानिकारक रसायन फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। धूम्रपान करने वालों में लंग कैंसर के मामले अन्य लोगों की तुलना में कई गुना ज्यादा पाए जाते हैं। हालांकि, डॉक्टरों और विशेषज्ञों के अनुसार, लंग कैंसर सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही नहीं होता, बल्कि ऐसे कई अन्य कारण भी हैं, जो इस खतरनाक बीमारी का जोखिम बढ़ाते हैं। भारत जैसे देश में, जहां वायु प्रदूषण, रासायनिक एक्सपोजर और खानपान में मिलावट आम है, वहां लंग कैंसर के कई और मुख्य कारण हो सकते हैं तो आइए उसके बारे में जाने।
अगर आपके परिवार में किसी को पहले लंग कैंसर हो चुका है, तो आपके लिए भी इसका खतरा अधिक हो सकता है। कुछ लोगों में कैंसर-प्रवृत्त जीन मौजूद होते हैं, जिससे बिना धूम्रपान किए भी यह रोग विकसित हो सकता है। यह लंग कैंसर होने के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।
(और पढ़ें - जानें लंग कैंसर से सबसे ज्यादा मौत क्यों होती है?)
कुछ प्रोफेशनल इंडस्ट्रीज जैसे फैक्ट्रियां, निर्माण क्षेत्र या खदानों में काम करने वाले लोग हानिकारक रसायनों जैसे एस्बेस्टस, बेंजीन और क्रोमियम के संपर्क में आते हैं। लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क में रहना फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ता है।
पीने के पानी या भोजन में मौजूद आर्सेनिक (arsenic) एक जहरीला तत्व है, जो फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकता है। भारत के कई राज्यों, खासकर पश्चिम बंगाल, बिहार और असम में भूजल में आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाई गई है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे क्षेत्रों में यह लंब कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है।
वाहनों और मशीनों से निकलने वाला धुआं, विशेष रूप से डीजल और पेट्रोल के उत्सर्जन में मौजूद हानिकारक कण, लंग कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं। ट्रैफिक वाले क्षेत्रों में लंबे समय तक रहने या काम करने वाले लोगों, जैसे ड्राइवरों, को इससे अधिक जोखिम होता है। शहरी क्षेत्रों में यह बड़ी परेशानी बनता जा रहा है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, वायु प्रदूषण लंग कैंसर का एक प्रमुख कारण है। खासकर पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कण फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश करते हैं और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर का खतरा (Risk of cancer) बढ़ जाता है। प्रदूषित हवा से बचाव बेहद जरूरी है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
फेफड़ों के कैंसर के 0 से 4 तक स्टेज होती हैं।
फेफड़ों में कैंसर तब शुरू होता है, जब फेफड़ों की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर बना लेती हैं। यह आमतौर पर लंबे समय तक धूम्रपान या जहरीले रसायनों के संपर्क में रहने से होता है।
धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों को फेफड़ों के कैंसर का सबसे अधिक जोखिम होता है।
फेफड़ों के कैंसर का इलाज, उसकी स्टेज पर निर्भर करता है। इसमें सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी शामिल हैं।