डायबिटीज के 4 मरीजों में से 1 को होती है थायरॉइड, इन एक्सपर्ट टिप्स की मदद से थायरॉइड मैनेज कर सकते हैं शुगर पेशेंट्स

डायबिटीज में थायरॉ़इड से जुड़ी गड़बड़ियों का भी रिस्क अधिक होता है। इसीलिए, अगर आपको थायरॉइड और डायबिटीज दोनों हैं, तो अपनी सेहत पर थोड़ा अधिक ध्यान देना जरूरी है।

डायबिटीज के 4 मरीजों में  से 1 को होती है थायरॉइड, इन एक्सपर्ट टिप्स की मदद से थायरॉइड मैनेज कर सकते हैं शुगर पेशेंट्स

Written by Sadhna Tiwari |Updated : May 25, 2025 3:56 PM IST

Managing thyroid in diabetes: भारत में बढ़ रही लाइफस्टाइल डिजिजेज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 10  लोगों में से 1 व्यक्ति को थायरॉइड की समस्या होती है  और हर 11 लोगों में से 1 व्यक्ति को डायबिटीज की बीमारी है। लेकिन बहुत कम लोगों को यह पता है कि ये दोनों बीमारियां आपस में जुड़ी हुई हैं। जी हां आंकड़ों के अनुसार, टाइप 2 डायबिटीज वाले हर 4 में से 1 व्यक्ति को हाइपोथायरॉइडिज्म भी होता है। इस कंडीशन में थायरॉइड ग्लैंड ठीक तरीके से काम नहीं करता। इसी तरह इन दोनों ही बीमारियों में शरीर का एनर्जी लेवल पर असर पड़ सकती हैं।

क्या है थायरॉइड और डायबिटीज के बीच का कनेक्शन?-How Diabetes and Thyroid are connected?

थायरॉइड एक तितली के आकार की ग्रंथि है जो गर्दन के नीचे, एडम्स एप्पल के ठीक नीचे स्थित होती है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है, जो यह प्रभावित करती है कि शरीर ऊर्जा का उपयोग और भंडारण कैसे करता है। थायरॉइड हार्मोन और इंसुलिन शरीर के एनर्जी मैनेजर्स की तरह हैं, यानी ये हमारे शरीर की एनर्जी को मैनेज करते हैं। थायरॉइड हार्मोन यह नियंत्रित करते हैं कि शरीर कितनी तेजी से ऊर्जा का उपयोग करता है, जबकि इंसुलिन ब्‍लड शुगर के स्तर को मैनेज करने में (Hormones to manage blood sugar level) मदद करता है। ये दोनों मिलकर आपके मेटाबॉलिज्‍म को ठीक तरीके से चलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए, जब थायरॉइड के काम में अड़चन आती है, तो यह ब्‍लड शुगर के लेवल को बढ़ा सकता है, या फिर इसके विपरीत भी हो सकता है।

इस बारे में डॉ. रोहिता शेट्टी, मेडिकल अफेयर्स हेड, एबॅट इंडिया ने कहा, “डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों को आमतौर पर अपने ब्लड शुगर लेवल की जानकारी होती है और उन्‍हें पता होता है कि इसे कैसे नियंत्रित करना है। लेकिन थायरॉइड की समस्याओं के कई लक्षणों (Symptoms of thyroid) पर ध्यान नहीं जाता, जो ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकते हैं।

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थायरॉइड और ब्लड शुगर का आपस में गहरा संबंध (Thyroid and blood sugar levels) है। इसलिए थायरॉइड की नियमित जांच करवाना जरूरी है। सही देखभाल से थायरॉइड की समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे लोग स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।”

डायबिटीज़ मरीजों में थायरॉइड के लक्षण-Symptoms of thyroid diabetes patients should not ignore.

मेदांताा हॉस्पिटल दिल्ली में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट  डॉ. परजीत कौर  (Dr. Parjeet Kaur, Endocrinologist, Medanta, Delhi), ने कहा, “थायरॉइड की समस्याओं को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, और बहुत से लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्‍हें यह समस्‍या है। डायबिटीज़ से ग्रस्‍त कई लोगों को थायरॉइड की समस्या हो सकती है, लेकिन इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। आपको अगर ये लक्षण दिखायी दें तो अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें। ये लक्षण हैं-

  • थकान
  • भूलने की बीमारी
  • नींद से जुड़ी परेशानियांं
  • वजन बढ़ना
  • कब्ज
  • ड्राई स्किन की प्रॉब्लम
  • ठंड बर्दाश्त न होना
  • मांसपेशियों में ऐंठन और आंखों में सूजन

कम सक्रिय थायरॉइड ग्लैंड की वजह से आपको कमजोरी, वजन बढ़ने, मूड और दिल की धड़कन को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि यह ग्रंथि इन कार्यों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए, खासकर टाइप 2 डायबिटीज़ के साथ जी रहे लोगों के लिए थायरॉइड की नियमित जांच करवाना बहुत जरूरी है।”

कुछ रिसर्च के अनुसार, डायबिटीज़ और थायरॉइड एक साथ होना किडनी की समस्याओं, दिल के ठीक से काम न करने और रक्त संचार से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।  इनसे डायबिटिक रेटिनोपैथी (जब हाई ब्लड शुगर रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाता है), नसों को नुकसान और हृदय रोग जैसी कॉम्प्लिकेशन्स हो सकती हैं।

डायबिटीज मरीजों में होने वाले थायरॉइड के प्रकार

हाइपोथायरॉइडिज्म:

हाइपोथायरॉइडिज्म शरीर में इंसुलिन के उपयोग को धीमा कर देता है। इससे इंसुलिन खून में ज्यादा समय तक रहता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक कम हो सकता है। यह मेटाबॉलिज्म को धीमा करता है, जिससे वजन बढ़ता है और इंसुलिन रेंजिस्‍टेंस बढ़ता है। इससे ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। डायबिटीज़ से पीडि़त लोगों में सबसे आम थायरॉइड समस्या सबक्लिनिकल हाइपोथायरॉइडिज्म है, जिसमें आपकी थायरॉइड ग्रंथि सामान्य रूप से काम नहीं करती, लेकिन इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। टाइप 2 डायबिटीज़ रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव के कारण हाइपोथायरॉइडिज्म का खतरा बढ़ा सकता है।

हाइपरथायरॉइडिज्म

हाइपरथायरॉइडिज्म मेटाबॉलिज्‍म को तेज कर देता है। इससे शरीर भोजन से ग्लूकोज को तेजी से अवशोषित करता है। हालांकि, कोशिकाएँ इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है (हाइपरग्लाइसीमिया)। इससे डायबिटीज वाले लोगों के लिए ग्लूकोज स्तर को स्थिर रखना मुश्किल हो जाता है।

हाइपोथायरॉइडिज्म और हाइपरथायरॉइडिज्म, दोनों ही ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित करते हैं, इसलिए नियमित निगरानी और प्रबंधन जरूरी है।

कैसे करें दोनों बीमारियों को मैनेज?

थायरॉइड को ठीक करने से डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। स्वस्थ खानपान, नियमित रूप से एक्‍सरसाइज करने और डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर दवाएं लेने से थायरॉइड और ब्लड शुगर दोनों को नियंत्रण में रखा जा सकता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित थायरॉइड जांच और ब्लड शुगर टेस्ट से किसी भी बदलाव का जल्दी पता लगाया जा सकता है।

अपना ख्याल रखना बेहद जरूरी है। एक्टिव रहने, अच्‍छा खाना खाने और पर्याप्त नींद लेने से बहुत मदद मिल सकती है। अगर आपको थायरॉइड और डायबिटीज दोनों हैं, तो अपनी सेहत पर थोड़ा अतिरिक्त ध्यान देना जरूरी है। ऐसा करने से आप बेहतर महसूस करेंगे और अपनी पसंदीदा गतिविधियों के लिए अधिक ऊर्जा मिलेगी।

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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