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How does air pollution affect your fertility: भारत के ज्यादातर बड़े शहर इन दिनों वायु प्रदूषण की वजह से परेशान है। प्रदूषण सिर्फ सांस लेने में दिक्कत या आंखों में जलन ही नहीं लाता, बल्कि प्रजनन क्षमता (Fertility) पर भी गहरा असर डाल रहा है। अब तक कई रिसर्च में ये बात सामने आ चुकी है कि वायु प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले महिलाओं और पुरुषों की फर्टिलिटी इसकी वजह से घट सकती है। दिल्ली, नोएडा जैसे शहरों में जब वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है, तब ये जानना जरूरी हो गया है कि वायु प्रदूषण कैसे प्रजनन क्षमता को कम सकता है।
दिल्ली के बिड़ला फर्टिलिटी सेंटर की फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. प्राची बनेरा के अनुसार, हम रोज़ाना जिस हवा में सांस लेते हैं, जिस पानी का उपयोग करते हैं और जिन रसायनों के संपर्क में आते हैं, वे सभी हमारे शरीर में विषाक्त पदार्थों का निर्माण करती है। ये विषाक्त पदार्थ शुक्राणुओं (Sperms), अंडाणुओं (Eggs), हार्मोन और प्रजनन अंगों पर बुरा असर डालते हैं। सबसे ज्यादा चिंता वाली बात यह है कि ये बदलाव धीरे-धीरे और लंबे समय में दिखाई देते हैं, इसलिए ज्यादातर लोग कारण समझ ही नहीं पाते है।
डॉ. प्राची बनेरा का कहना है कि वायु प्रदूषण में मौजूद PM2.5, PM10 और ओजोन जैसे कण टेस्टिकल्स के कारण पुरुषों में इंफ्लेमेशन बढ़ता है। अगर ये इन्फ्लेमेशन लंबे समय तक रहता है, तो इससे स्पर्म काउंट कम होने लगता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ रिसर्च द्वारा की गई स्टडी में ये बात सामने आई है कि जो पुरुष लंबे समय तक वायु प्रदूषित क्षेत्रों में रहते है, उनकी स्पर्म की गतिशीलता और आकार सामान्य से कम हो जाता है। पुरुष में मौजूद PM2.5, PM10 पुरुषों मे DNA fragmentation को बढ़ाते है। जब पुरुष के स्पर्म सही नही होते है, तो महिलाओं को प्रेगनेंसी कंसीव करने में दिक्कत आती है।
फर्टिलिटी एक्सपर्ट बताती है कि वायु प्रदूषण के कण महिलाओं की फर्टिलिटी को भी बुरी तरह से प्रभावित करते है। प्रदूषण में मौजूद Chemicals शरीर में ‘Endocrine Disruptors’ की तरह काम करते हैं, जो एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और FSH-LH जैसे हार्मोन को असंतुलित करते हैं। इससे महिलाओं को पीरियड्स अनियमित होना, ओव्यूलेशन में रुकावट और PCOS की संभावना बढ़ना जैसी परेशानी हो सकती है। प्रदूषित हवा में मौजूद फ्री रेडिकल्स अंडाणुओं को ऑक्सीडेटिव डैमेज पहुंचाते हैं। इससे महिलाओं में एग्स रीजव करने की क्षमता कम हो जाती है। जिसके कारण महिलाओं को नॉर्मल तरीके से प्रेगनेंसी कंसीव करने में दिक्कत आती है।
यह बात कम लोग जानते हैं कि प्रदूषण सिर्फ नैचुरल प्रेगनेंसी ही नहीं, बल्कि IVF और IUI जैसी मेडिकल तरीके से कंसीव करने वाली प्रेग्नेंसी के चांस को भी कम कर देता है।
डॉ. प्राची बनेरा के साथ हुई बातचीत के आधार पर हम ये कह सकते है कि प्रदूषण हमारे प्रजनन स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। प्रदूषण महिलाओं और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी को हार्मोनल, जेनेटिक और शारीरिक स्तर पर नुकसान पहुंचाता है। अगर समय रहते वायु प्रदूषण को कंट्रोल न किया जाए, तो ये सिर्फ फेफड़े और फर्टिलिटी ही नही, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।