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मेनोपॉज एक नेचुरल प्रक्रिया है जो 45 वर्ष की उम्र के बाद हर महिला के जीवन में शुरू हो सकती है। मेनोपॉज शुरू होने के साथ ही महिलाओं में पीरियड्स आना बंद हो सकते हैं। मेनोपॉज की स्थिति जब शुरू होती है तो आमतौर पर देखा जाता है कि महिलाओं के पीरियड्स 12 या उससे अधिक समय नहीं आते। इसके बाद महिलाओं के पीरियड्स आना धीरे-धीरे पूरी तरह से बंद हो जाते हैं। मेनोपॉज की उम्र आमतौर पर 45 से 50 के बीच की मानी जाती (Age of menopause) है लेकिन, अब कुछ महिलाओं में मेनोपॉज 40 की उम्र के बाद ही शुरू हो जाता है। मेडिकल जगत में इसे अर्ली मेनोपॉज या प्रीमेच्योर मेनोपॉज (Premature Menopause) भी कहा जाता है। डॉ. विद्या भट्ट (Dr. Vidya V Bhat, Medical Director, RadhaKrishna Multispeciality Hospital, Bengaluru) बता रही हैं कि क्यों कुछ महिलाओं के मेनोपॉज जल्दी शुरू हो जाते हैं और क्या हैं इसके कारण।
मेनोपॉज जल्दी आने के कई कारण (Menopause ke karan) हो सकते हैं जैसे, जेनेटिक्स, कोई सर्जरी या किसी प्रकार की ऑटोइम्यून डिजिजका प्रभाव। हालांकि, शहरों में रहने वाली महिलाओं में अर्ली मेनोपॉज का रिस्क अधिक होता है। डॉ. विद्या भट्ट के अनुसार, शहरों में रहने वाली महिलाओं में मेनोपॉज जल्दी आने के ये कारण (Causes of early menopause in urban women) हो सकते हैं-
शहरी इलाकों में रहने वाली महिलाओं को हाई-प्रेशर वाली जॉब (High pressure work conditions) करनी पड़ती हैं। कई-कई घंटों तक चलने वाला काम, आर्थिक समस्याएं और समाज की उम्मीदों का बोझ भी उठाना पड़ता है। इन सबकी वजह से होने वाले तनाव का असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। क्रोनिक स्ट्रेस की वजह से महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स के स्तर में बदलाव हो सकते हैं, इससे ओवरी के लिए काम करने में भी दिक्कतें आ सकती हैं। वहीं, मानसिक तनाव के काऱण मेंस्ट्रुअल साइकिल(irregular menstrual cycles) अनियमित हो सकते हैं और इससे ओवरी जल्दी ही काम करना बंद कर सकती है।
पर्यावरण से जुड़े कारणों से भी महिलाओं के मेंस्ट्रुअल साइकिल और महिलाओं के स्वास्थ्य पर असर हो सकता है। ट्रैफिक का धुआं, पेस्टिसाइड्स, प्लास्टिक के कण जैसी चीजें एस्ट्रोजेन लेवल पर असर डाल सकती है। कुछ स्टडीज के अनुसार, इन हानिकारक तत्वों के सम्पर्क में अधिक समय तक रहने से महिलाओं के गर्भाशय पर असर हो सकता है और इससे ओवरी की कार्यक्षमता भी कम हो सकती है। इससे अर्ली मेनोपॉज का खतरा बढ़ सकता है।
फास्ट फूड खाने का कल्चर (Fast food culture) और प्रोसेस्ड फूड्स खाने से शहरी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं में मोटापा (obesity), इंसुलिन रेजिस्टेंस (insulin resistance) और इंफ्लेमेशन (inflammation) का रिस्क बढ़ सकता है। इसके अलावा बहुत सी महिलाओं में विटामिन डी की कमी (Vitamin D) और कैल्शियम की कमी (calcium deficiencies) जैसी स्थितियां देखी जाती हैं जो कम समय तक धूप में रहने की वजह से हो सकती हैं। इन न्यूट्रिएंट्स की कमी से प्रजनन क्षमता कम हो सकती है।
फिजिकली एक्टिव ना रहना और कसरत ना करने जैसी आदतें उन महिलाओं में अधिक देखी जाती हैं जो शहरों में रहती हैं और डेस्क जॉब्स करती हैं। कई घंटों तक एक ही जगह पर बैठकर ऑफिस का काम करना, स्क्रिन पर लम्बे समय तक वीडियो गेम खेलना या फिल्में देखने जैसी आदतों के कारण एस्ट्रोजेन का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे ओवरऑल रिप्रॉडक्टिव हेल्थ पर असर पड़ सकता है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।