क्या आपको भी पड़ते हैं नींद के दौरे तो हो जाएं सावधान, इस बीमारी से ग्रस्त हैं आप

ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस ने इस बीमारी पर एक सर्वे किया और पाया कि यह एक दिमागी बीमारी है, जो लंबे समय तक चलती है।

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Written By: Anshumala | Published : September 3, 2018 3:03 PM IST

नींद किसे प्यारी नहीं लगती है लेकिन बड़े-बूढ़ों की बातें तो आपने सुनी ही होगी कि कम नींद आना या ज्यादा नींद आना, दोनों ही बीमारी है। कम नींद आने पर क्या-क्या करना चाहिए ताकि आपको भरपूर नींद आए इस बारे में तमाम जानकारियां इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। संभव है कि आप डॉक्टर की सलाह पर स्लीपिंग पिल से अपनी अधूरी नींद को पूरी भी कर लें।

लेकिन तब क्या हो जब आप पूरे दिन नींद में ही रहें? कभी भी नींद आ जाए और आप बिस्तर पर लुढ़क जाएं। ऑफिस, बस, ट्रेन या मेट्रो में बैठे-बैठे अचानक सो जाएं? पूरे-पूरे दिन आपके मस्तिष्क पर सुस्ती छाई रहे। क्या आपको लगता है कि शरीर खुद को रिलैक्स करने के लिए ऐसा करता है? अगर हां, तो आप गलत हैं, क्योंकि संभव है कि आप ''नार्कोलेप्सी'' से पीड़ित हों।

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ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस से हाल ही में इस बीमारी पर एक सर्वे किया है और पाया कि यह एक दिमागी बीमारी है, जो लंबे समय तक चलती है। हालांकि, अभी तक वैज्ञानिक इस बीमारी का ठोस कारण पता लगाने में असफल रहे हैं लेकिन उनका मानना है कि जेनेटिकल समस्याएं या किसी वायरस के संयोग से व्यक्ति नार्कोलेप्सी का शिकार हो सकता है।

महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही यह बीमारी सामान्य तौर पर पाई जाती है। इस बीमारी के लक्षण मरीज में लम्बे समय से हो सकते हैं लेकिन बीमारी का पता बहुत दिनों बाद चलता है। इस बीमारी में आपका शरीर आपके मष्तिस्क कि हिसाब से काम नहीं करता है बल्कि आप कभी भी सो जाते हैं, कभी ज्यादा कभी थोड़ा। यह नींद का दौरा पड़ने जैसा है।

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क्या होता है इस बीमारी में?

· नार्कोलेप्सी एक लंबी मानसिक बीमारी है।

· पीड़ित व्यक्ति को कभी भी नींद आने की समस्या होती है।

· सोने, जागने की सामान्य प्रक्रिया का बेकाबू होना

· पूरे दिन नींद आना और जागे रहने में परेशानी।

· किसी भी काम पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी।

· अचानक नींद आना।

· पीड़ित व्यक्ति में स्लीपिंग पैरालाइसिस की परेशानी।

· सोने के दौरान और जागने से पहले अधिक सपने आना

क्यों होती है नार्कोलेप्सी

क्रोनिक सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी होती है यह बीमारी। जब शरीर में हायपोक्रिटन हार्मोन या ऑरेक्जिन की कमी होने लगती है, तो यह बीमारी होती है। कई बार हार्मोन को पैदा करने वाले टिशुओं पर एंटिबॉडी के प्रभाव से भी यह होती है। इसमें व्यक्ति हमेशा सुस्त महसूस करता है। हालांकि, नार्कोलेप्सी के ज्यादातर कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।

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क्या है इसका इलाज

· नार्कोलेप्सी का कोई स्पष्ट इलाज नहीं है।

· दवा से कम हो सकता है नींद के दौरे का असर।

· तय अंतराल पर सोने से कम पड़ेंगे नींद के दौरे।

· जागे रहने के लिए कुछ दवाओं की मदद लें।

· लाइफस्टाइल में आवश्यक बदलाव लाएं।

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