क्या आपको पता है कि डायबिटीज होने पर दिल की बीमारी के बिना भी दिल का दौरा या स्ट्रोक की संभावना दो से चार गुना अधिक बढ़ जाती है। इसका कारण यह है, दिल का दौरा पड़ने पर दिल की मांसपेशियों के एक हिस्से को रक्त नहीं मिल पाता है और रक्त के प्रवाह की कमी के कारण दिल के टिश्यूज़ को निष्क्रिय करने की वजह बन सकता है। इसमें कोई शक नहीं है कि हर हार्ट अटैक जानलेवा होता है और इसपर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत पड़ती है। ज्यादातर लोगों में, दिल के दौरे के पूर्व-लक्षणों में जो समस्याएं महसूस होती हैं वह हैं- छाती में दर्द और तेज़ सांस। लेकिन कुछ मामलों में, किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। दिल का ऐसा दौरा जिसमें मरीज़ को किसी प्रकार का दर्द या अन्य लक्षण दिखाई नहीं पड़ते , उसे साइलेंट हार्ट अटैक (silent heart attack) कहा जाता है। एक साइलेंट हार्ट अटैक किसी को भी पड़ सकता है, लेकिन मधुमेह या डायबिटीज़ से पीड़ित लोगो कों इस प्रकार का दिल का दौरा पड़ने की संभावना अधिक होती है। डायबिटीज़ के पीड़ित लोगों को होनेवाले दिल के दौरों में से लगभग 25-30% साइलेंट हार्ट अटैक ही होते हैं, जो कि डायबिटीज़ का एक महत्वपूर्ण और बड़ा नुकसान माना जाता हैं। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जे.सी. मोहन ( डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल, दिल्ली) बता रहे हैं डायबिटीज़ के मरीज़ों को पड़नेवाले इस दिल के दौरे के बारे में।
साइलेंट या अन्य किसी भी प्रकार के हार्ट अटैक का कारण ज़्यादातर एथेरोस्क्लेरोसिस (atherosclerosis) होता है। यह एक ऐसी स्थिति है जहां, दिल की धमनियां बहुत अधिक सिकुड़ जाती हैं। अनियंत्रित डायबिटीज़ की वजह से खून के थक्के नहीं बनते, खून जम जाता है और डायबीटिक्स की रक्त धमनियों में बननेवाले प्लैक में भी बदलाव होते हैं। इन सबकी वजब से हाइपरग्लेसेमिया या हाई ब्लड शुगर की समस्या हो सकती है जो दिल की सेहत पर बुरी तरह असर डालता है।
डायबीटिक्स आमतौर पर नर्व डैमेज़ या ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी ((autonomic neuropathy) के कारण सीने में दर्द महसूस नहीं कर पाते हैं, जो कि अनियंत्रित मधुमेह के कारण होता है। यदि आपको पहले भी साइलेंट हार्ट अटैक पड़ चुका है, तो आपको एक और गंभीर हार्ट अटैक पड़ सकता। इसीलिए आपको नियमित रूप से अपने डॉक्टर से परामर्श करते रहना चाहिए और आपकी स्थिति की सही जानकारी प्राप्त करते रहना चाहिए।
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मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति में, दिल का दौरा पड़ने का एकमात्र लक्षण, कभी-कभी ब्लड शुगर बढ़ने और कमज़ोरी (जो दूर नहीं होती) के तौर पर दिखाई पड़ सकता है। अगर किसी व्यक्ति काे लगता है कि उसे दिल का दौरा पड़ सकता है, तो तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए। साइलेंट हार्ट अटैक के खतरे का पता, स्ट्रेस टेस्ट या एकोकार्डियोग्राम (दिल का अल्ट्रासाउंड), ईसीजी, मेडिकल इतिहास और दिल के एंजाइम की जांच की मदद से लगाया जा सकता है।
साइलेंट हार्ट अटैक पड़ने का अनुमान लगाने का कोई तरीका नहीं है, लेकिन आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए, खतरनाक और अनियंत्रित डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा, सुस्त जीवन शैली जैसे खतरनाक कारकों की संख्या जितनी अधिक होती है, साइलेंट हार्ट अटैक होने की संभावना उतनी अधिक होती है। रूटिन हार्ट स्क्रीनिंग, कोलेस्ट्रोल की जांच, ब्लड प्रेशर और इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम टेस्ट और ब्लड ग्लूकोज़ की की मदद से साइलेंट हार्ट अटैक पड़ने का खतरा कम हो सकता है।
दिल के दौरे से उबरने का सबसे अच्छा तरीका है जल्द से जल्द इलाज प्राप्त करना। जिन लोगों को सही समय पर डॉक्टरी मदद मिलती है, उनका बचना आसान हो जाता है। ऐसे मामलों में दिल का दौरा पड़ने पर आधुनिक उपचार की मदद से लगभग 90% मामलों में सफलता पायी जा सकती है। जबकि एक साइलेंट हार्ट अटैक पड़ने पर, मरीज को स्ट्रोक की जानकारी नहीं होती और किमती समय बर्बाद हो जाता है, जिससे दिल को बहुत अधिक नुकसान होता है। साइलेंट हार्ट अटैक से मरनेवालों की संख्या, सीने में दर्द महसूस करनेवालों से लगभग 2 गुना है।
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