Electrolyte imbalance के लक्षण क्या हैं?

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन होने पर कौन-कौन-सी बीमारियां होने की संभावना रहती है, जानें!

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Written By: Editorial Team | Updated : October 6, 2017 6:36 PM IST

क्या आपने कभी इस बारे में सोचा कि क्यों डिहाइड्रेशन की वजह से आपका शरीर सूजा हुआ या फूला हुआ दिखता है? जब आपके शरीर को पानी की कमी महसूस होती है तो वह शरीर के तरल पदार्थ के स्तर को बनाए रखने की कोशिश करता है। दूसरे शब्दों में, यह होमिओस्टैसिस (homeostasis) प्रक्रिया है जिसके माध्यम से आपका शरीर बाहरी वातावरण में बदलाव के बावजूद आपके शरीर के आंतरिक वातावरण को व्यवस्थित रखने की कोशिश करता है। जब आपके शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो आपका शरीर एंटीडिअरीटिक हार्मोन (antidiuretic hormone), वैसोप्रेसिन (vasopressin) का निर्माण करता है जो आपकी किडनी को पानी बचाने के संकेत देता है। यह वह तरल है जो पेशाब के माध्यम से शरीर के बाहर निकल जाता है। इस तरह, आपके शरीर में पानी की भयंकर कमी नहीं होने पाती।

होमिओस्टैसिस ग्रीक भाषा का एक शब्द है, जो 'होमो' और 'स्टैटिस' से बना है। 'होमो' का अर्थ है 'इसी तरह' और 'स्टैटिस' यानि 'स्थायी स्थिर' क्रमशः और जैसा कि आप समझ सकते हैं, यह आपके अस्तित्व के लिए यह महत्वपूर्ण है। लेकिन होमिओस्टैसिस के काम करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आपके शरीर में एक अच्छा इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन रहे। कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फेट और सोडियम जैसे मिनरल या खनिजों को इलेक्ट्रोलाइट्स कहा जाता है। इन खनिजों में बिजली का संचार होता है जो सोचने और देखने जैसी शारीरिक गतिविधियों के लिए आवश्यक बिजली के आवेगों को उत्पन्न करने में मदद करते हैं।

इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन क्या है?

इलेक्ट्रोलाइट के असंतुलन (electrolyte imbalance) के कई कारण हो सकते हैं। डायरिया से लेकर कोई जानलेवा बीमारी भी इसकी वजह हो सकती है। इन दोनों के अलावा, कुछ सामान्य कारणों में डिहाइड्रेशन, एक्सरसाइज, विटामिन डी की कमी, नशीली दवाओं की लत, लैक्सेटिव का अधिक सेवन (laxative abuse), सर्जरी, सिरोसिस या हार्ट फेलियर जैसे कारण भी इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन की वजह बन सकते हैं। अज्ञात या इडियोपैथिक कारणों से इलेक्ट्रोलाइट्स का गंभीर नुकसान हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान भी यह समस्या काफी सामान्य है।

इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन के लक्षण क्या हैं?

यदि यह संवेदनशील संतुलन गड़बड़ा जाए, तो शरीर ख़राब हो जाता है और कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसकी वजह से मांसपेशियों में ऐंठन, पेट की समस्याएं, चिंता, ब्लड प्रेशर में बदलाव, हृदय की धड़कन बदलने और चक्कर जैसी तकलीफें होने लगती हैं।

सोडियम का असंतुलन:

हाइपरनेट्रामिया (Hypernatremia) या हाइपोनाइट्रेमिया (hyponatremia) वह स्थिति है, जहां शरीर में सोडियम की बहुत अधिक कमी हो जाती है। बहुत ज्यादा सोडियम की वजह से डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, मांसपेशियों में ऐंठन, मतली, उल्टी, सही तरीके से सांस लेने में तकलीफ, बहुत ज़्यादा प्यास लगना और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं।1 शरीर में कम सोडियम के चलते  मतली, उल्टी, भूख न लगना और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती है। बुजुर्गों को सोडियम की कमी के कारण चलने में तकलीफ और उन्हें अक्सर गिर जाने जैसी समस्याएं हो सकती है। अक्यूट हाइपोनाइट्रेमिया (Acute hyponatremia) भी मस्तिष्क में पानी के संग्रहण के कारण न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकता है।2

पोटैशियम का असंतुलन:

जब रक्त में पोटैशियम की मात्रा बढ़ जाती है, तो यह हमारे लिए जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है जैसे कि धड़कन की गति बिगड़ना,  न्यूरोलॉजिकल डिस्फंक्शन और हार्ट फेलियर। यह हृदय की मांसपेशियों का संकुचन बंद कर देता है, जिसकी वजह से  व्यक्ति की अचानक मृत्यु हो सकती है।.3

कैल्शियम का असंतुलन:

शरीर में कैल्शियम की कमी, विटामिन डी के कम सेवन के कारण हो सकती है। इसके लक्षण मांसपेशियों की कमज़ोरी, ऐंठन, चिड़चिड़ापन, दौरा,  मानसिक क्षमता को नुकसान, थकान, चिंता, कमज़ोर याद्दाश्त , निराशा, एकाग्रता या फोकस में कमी और पागलपन आदि हो सकते हैं। कैल्शियम के अंसतुलन की वजह से त्वचा का रूखापन, मोटे बाल,  एक्जिमा, सोरायसिस, डर्मटाइटिस, दांतों आने में देरी और नाखून कमज़ोर होने जैसी समस्याएं होती हैं। ज्यादा मात्रा में कैल्शियम लेने से किडनी स्टोन, हड्डियों में दर्द, पेट से जुड़ी समस्याएं, डिहाइड्रेशन  और चिंता, काग्निटिव समस्याएं और अनिद्रा जैसी दिमागी बीमारियां होती है।5

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अनुवादक-Sadhna Tiwari

चित्रस्रोत-Shutterstock Images.

संदर्भ:

1. Kim, S. W. (2006). Hypernatemia : Successful Treatment. Electrolytes & Blood Pressure : E & BP, 4(2), 66–71. https://doi.org/10.5049/EBP.2006.4.2.66

2. Sahay, M., & Sahay, R. (2014). Hyponatremia: A practical approach. Indian Journal of Endocrinology and Metabolism, 18(6), 760–771. https://doi.org/10.4103/2230-8210.141320

3. Viera, A. J., & Wouk, N. (2015). Potassium Disorders: Hypokalemia and Hyperkalemia. American family physician, 92(6).

4. Lehnhardt, A., & Kemper, M. J. (2011). Pathogenesis, diagnosis and management of hyperkalemia. Pediatric Nephrology (Berlin, Germany), 26(3), 377–384. https://doi.org/10.1007/s00467-010-1699-3

5. Schafer, A. L., & Shoback, D. M. (2016). Hypocalcemia: Diagnosis and treatment.

6. Goltzman, D. (2016). Approach to hypercalcemia.

7. Soar, J., Perkins, G. D., Abbas, G., Alfonzo, A., Barelli, A., Bierens, J. J., … & Handley, A. J. (2010). European Resuscitation Council Guidelines for Resuscitation 2010 Section 8. Cardiac arrest in special circumstances: electrolyte abnormalities, poisoning, drowning, accidental hypothermia, hyperthermia, asthma, anaphylaxis, cardiac surgery, trauma, pregnancy, electrocution. Resuscitation, 81(10), 1400-1433.

8. Upala, S., Jaruvongvanich, V., Wijarnpreecha, K., & Sanguankeo, A. (2016). Hypomagnesemia and mortality in patients admitted to intensive care unit: a systematic review and meta-analysis. QJM: An International Journal of Medicine, 109(7), 453-459.

9. Knochel JP. Hypophosphatemia. West J Med. 1981 Jan;134(1):15-26. Review.

PubMed PMID: 7010790; PubMed Central PMCID: PMC1272444.

10. Knochel, J. P. (1977). The pathophysiology and clinical characteristics of severe hypophosphatemia. Archives of Internal Medicine, 137(2), 203-220.

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