आप चीजें भूल जाते हैं या फिर आपका दिमाग फालतू डेटा समझ कर उसे डिलीट कर देता है? न्यूरोलॉजिस्ट से जानें
चीजों को भूल जाना जरूरी नहीं है कि कोई बीमारी ही हो क्योंकि यह दिमाग की एक सामान्य प्रक्रिया भी हो सकती है। न्यूरोलॉजिस्ट ने इस बारे में बताया कि किस तरह हमारा दिमाग गैस जरूरी यादों को डिलीट कर देता है और अक्सर आप उसे बीमारी समझ बैठते हैं।
भूलने की बीमारी तो आपने सुना ही होगा, अक्सर जब कोई व्यक्ति बार-बार चीजें भूल जाता है तो उसे मजाक में कह दिया जाता है कि आपको भूलने की बीमारी हो गई है। लेकिन क्या चीजों को भूल जाना सच में कोई बीमारी होती है या फिर अक्सर ऐसा होना नॉर्मल है। डॉ. विवेक बरुण, सीनियर कंसल्टेंट, एपिलेप्सी एंड न्यूरोलॉजी, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स के अनुसार कई बार चीजों को भूलना नॉर्मल हो होता है, जिसे दिमाग खुद भुला देता है। सरल शब्दों या फिर आजकल की बोलचाल की भाषा में कहें तो कुछ चीजों को दिमाग फालतू का डेटा समझ कर डिलीट कर देता है, जैसे आप अपने फोन की स्टोरेज को बचाने के लिए फालतू की फोटोज और वीडियोज को डिलीट कर देते हैं। दरअसल, दिमाग के खुद से चीजें भुलाने की तकनी को अक्सर एडेप्टिव फॉरगेटिंग कहा जाता है। हालांकि, कई बार भूलना न्यूरोलॉजिकल या अन्य किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है। इसलिए पूरी जानकारी के लिए लेख को पूरा जरूर पढ़ें।
भूलना हर बार बीमारी नहीं होती
डॉ. विवेक ने बताया कि कई बार चीजों को भूलना कोई बीमारी नहीं होती है। कभी-कभी हम किसी का नाम, फोन नंबर या अपना चश्मा कहीं रखकर भूल जाते हैं। ऐसे में कई बार हमें ये लगने लगता है कि हमारी याददाश्त कमजोर पड़ने लगी है। लेकिन जरूरी नहीं है कि हर मामले में यह भूलने की बीमारी ही हो। न्यूरोसाइंस के हिसाब से देखा जाए तो इसके पीछे का सच कुछ अलग ही है। कुछ बातें दिमाग सोच-समझकर भूल जाता है और ऐसा करना दिमाग की सेहत के लिए सही भी है।
कुछ चीजों को क्यों भुला देता है दिमाग?
दरअसल, हमारा दिमाग दिन में लाखों सूचनाओं को प्रोसेस करता है, ऐसे में अगर दिमाग हर छोटी-बड़ी चीज को याद रखने की कोशिश करेगा तो यह उसके लिए मुश्किल होने लगता है। ऐसे में दिमाग दिनभर में हुई सभी चीजों को फिल्टर करता है और जो भी जानकारी उसे व्यर्थ लगती है या सबसे कम जरूरी लगती है उसे भुला देता है या यूं कह लीजिए डिलीट कर देता है।
Nature Reviews Neuroscience के द्वारा पब्लिश की गई एक रिसर्च में बताया गया कि भूलना दरअसल दिमाग में होने वाला एक एक्टिव बायोलॉजिकल बदलाव है। इस प्रक्रिया में यादों से जुड़े न्यूरॉन में इस तरह बदलाव होता है कि कम जरूरी बातें अपने आप धीरे-धीरे गायब होने लगती हैं और जरूरी बातों पर पकड़ अच्छी बनी रहती है। हमारा दिमाग किसी जरूरी जानकारी को बार-बार याद करने की प्रक्रिया में उससे जुड़ी गैर-जरूरी यादों को कमजोर कर देता है। इससे भविष्य में उस याद तक पहुंचना आसान हो जाता है और मानसिक उलझन कम हो जाती है।
लेकिन हर बार इसे सामान्य भी न समझें
जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया कि जरूरी नहीं है कि भूलने की आदत नेचुरल प्रोसेस ही हो, क्योंकि यह कुछ लोगों में सच में भूलने की बीमारी भी हो सकती है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति बार-बार चीजें भूल जाता है या फिर उसकी याददाश्त बहुत कमजोर हो चुकी है तो ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट्स से बात करना बेहद जरूरी हो सकता है। उदाहरण के लिए पहले मिले किसी व्यक्ति को पहचान न पाना, जरूरी बातें भूल जाना और चाबी जैसी चीजों को बार-बार भूल जाना या गाड़ी में ही छोड़ देना आदि किसी न किसी न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत हो सकता है और ऐसे में आपको न्यूरोलॉजिस्ट या किसी दूसरे हेल्थ स्पेशलिस्ट से बात करने की सलाह दी जाती है।
डिसक्लेमर: जरूरी नही है कि भूलना कोई बीमारी हो और ऐसा भी हो सकता है यह कोई न्यूरोलॉजिकल बीमारी हो, इसलिए अगर आपको बार-बार भूलने की दिक्कत है, तो डॉक्टर से इस बारे में जरूर संपर्क करें। इस लेख का उद्देश्य केवल शैक्षणिक एवं सूचनात्मक है, जानकारियां देना है, जो किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है। Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।