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मानसून में मांस खाते हैं, तो उसके ताजा होने की पुष्टि जरूर करें। © Shutterstock
अधिकतर लोगों को मानसून के दिनों में सड़क किनारे बिकने वाली गरमा-गर्म चाय और पकोड़ों के साथ अनहेल्दी जंक फूड, मांस से बनी आइटम ललचाती है। सड़क पर बिकने वाली नॉनवेज रेसिपी लोग टूटकर खाते हैं पर क्या आप जानते हैं कि मानसून में भी नॉनवेज का सेवन खासकर बाहर बिकने वाली नॉनवेज खाना हानिकारक साबित हो सकता है? इससे आप कई तरह के बैक्टीरियल इंफेक्शन के शिकार हो सकते हैं। फंगी और बैक्टीरिया के लिए नम और आर्द्र वातावरण एक आदर्श प्रजनन स्थल के रूप में कार्य करता है और मौसम में तेजी से बदलाव उन्हें अपनी आबादी को कई गुना बढ़ाने के लिए उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराते हैं।
चूंकि, इस मौसम में मनुष्य के शरीर को कई सारे पेट के संक्रमणों और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जिनमें कई तरह की एलर्जी और दस्त भी शामिल है। डॉक्टर अक्सर पाचन तंत्र की चिंताओं को देखते हुए सलाह देते हैं कि मांस का सेवन कम करना चाहिए या उसकी मात्रा कम कर देनी चाहिए लेकिन क्या मानसून में हमारे पाचन और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ के पीछे मांस ही वास्तविक कारण है?
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मानसून में रोग-प्रतिरोधक क्षमता होती है कम
मानसून में मनुष्य के शरीर की रोग-प्रतिरोधकता कम हो जाती है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को अधपके या प्रदूषित खाने से दूर रहना चाहिए। भारत में ज्यादातर लोग ताजा मांस और चिकन खरीदने के लिए आस-पड़ोस के कसाई की दुकान पर भरोसा करते हैं। काफी लोग यह समझते ही नहीं हैं कि कई बार यह दुकानदार और विक्रेता मांस और पॉल्ट्री को अस्वच्छ और अस्वस्थ तरीके से रखते हैं। कई बार तो इन्हें ऐसी जगह पर प्रोसेस किया जाता है जिन पर अत्यधिक बोझ होता है। खासकर, कत्लखानों और पॉल्ट्री फॉर्म्स में अमानवीय परिस्थितियों में इन्हें रखा जाता है। उन्हें कई तरह के रसायनों के इंजेक्शन लगाए जाते हैं जो नॉन-वेज खाने वालों के लिए गंभीर स्वास्थ्य चिंता की वजह बनते हैं। फिर चाहे उनका सेवन मानसून के अलावा अन्य मौसम में ही क्यों न किया जाए।
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मांस की क्वालिटी देखें
पेट के संक्रमणों के लिए मांस को दोष देने की बजाय, खेती के समय मांस का क्वालिटी चेक न होने को दोष देना चाहिए। मांस के अपने पसंदीदा व्यंजन के सुरक्षित सेवन के लिए मांस खाने वालों के लिए यह अनिवार्य हो जाता है कि वे प्रोडक्ट के ताजा होने की पुष्टि करें। खासकर, यदि वे पैकिंग वाला मांस खरीद रहे हैं। यदि इस सीजन में उनके स्टोरेज और संरक्षण के तरीके सही नहीं हैं तो वह मांस अत्यधिक नमी की वजह से खराब हो सकता है और प्रदूषित हो सकता है। ऐसे मांस को खाना किसी भी सूरत में स्वास्थ्यकर नहीं होगा।
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मांस धोने से बात नहीं बनती
इस सीजन में मांस के दूषित होने के खतरों को देखते हुए भरोसेमंद स्रोत से मांस खरीदना महत्वपूर्ण होता है। पॉल्ट्री से जुड़ी बीमारियां नम मौसम में ज्यादा फैलती हैं और सिर्फ धोने से मांस से हानिकारक बैक्टीरिया खत्म नहीं होते। इस मुद्दे के समाधान के तौर पर जैपफ्रेश ऑनलाइन फ्रेश मीट ब्रांड्स ने खेतों से सीधे घर तक मांस पहुंचाने की जिम्मेदारी ली है। जैपफ्रेश के सीईओ और सह-संस्थापक दीपांशु मनचंदा कहते हैं कि हमनें ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया है जो ग्राहकों को सुरक्षित और ताजा मांस सुनिश्चित करता है। सुरक्षा और गुणवत्ता के लिहाज से अनिश्चितता से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। पॉल्ट्री के साथ काम कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मांस को सही तरीके से विकसित किया गया है। बीमारियों से बचाया गया है और नियमित रूप से वेटनरी डॉक्टरों ने दौरे किए हैं। हर स्तर पर सख्त क्वालिटी चेक्स के बाद खरीद से लेकर डिलीवरी तक हाई-मेंटेनेंस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है ताकि पैकेजिंग सुरक्षित और स्वच्छ तरीके से डिलीवर हो सके।
दोहरी परत वाली पैकेजिंग के साथ, लंबे समय तक प्रोडक्ट को ठंडे तापमान में रखा जाता है। इससे बिना किसी लीकेज के प्रोडक्ट को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। इससे मानसून में भी मांस सुरक्षित और ताजा बना रहता है। निश्चित तौर पर ठंडी हवाएं और रिमझिम बारिश आपको नॉन-वेज व्यंजनों के लिए ललचाती होंगी जैसे कि चिकन कीमा पैटिस या चिकन समोसा या पॉपकॉर्न। ऑनलाइन मीट बेचने वाले ब्रांड्स पर भरोसा कर आप निश्चिंत हो सकते हैं जो आपको हाई-क्वालिटी मांस खरीदने का वादा करते हैं। यह किसी की भी सेहत से समझौता नहीं करते।