
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : June 16, 2026 11:29 AM IST
Medically Verified By: Dr Bipeenchandra Y Bhamre
हार्ट वाल्व
आपने घर में भी माताएं, बहनें या सास व ननदें होंगी, जो अक्सर सांस फूलने, जल्दी थक जाने या कमजोरी महसूस होने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं। वे अक्सर सोचती हैं कि ऐसा स्ट्रेस उनकी बढ़ती उम्र, काम के बोझ या शरीर की थकान की वजह से हो रहा होगा। लेकिन उन्हें पता नहीं होता कि कई बार ये लक्षण हार्ट वाल्व की बीमारी के हो सकते हैं, जो बिना ज्यादा परेशानी के धीरे-धीरे बढ़ती रहती है।
इसलिए सर एच. एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के कार्डियक सर्जन डॉक्टर बिपीनचंद्र भामरे कहते हैं कि महिलाओं को ऐसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। वह बताते हैं कि हार्ट वाल्व की बीमारी हार्ट के उन वाल्वों से जुड़ी होती है, जो शरीर में खून के सही फ्लो को बनाए रखने का काम करते हैं। जब दिल का एक या एक से ज्यादा वाल्व ठीक से काम नहीं करता तो, तब इसे हार्ट वाल्व की बीमारी कहा जाता है। आइए इसके बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं।
डॉक्टर भामरे बताते हैं कि कई बार वाल्व संकुचित, कठोर या मोटा हो जाता है, जिससे ब्लड फ्लो सही तरीके से नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति को वाल्व स्टेनोसिस कहा जाता है। इस बीमारी का खतरा बढ़ती उम्र, परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास, हाई बी.पी, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, हार्ट फेल्योर, हार्ट अटैक, रूमेटिक बीमारी, एंडोकार्डाइटिस और कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण बढ़ सकता है।
नहीं, ऐसा नहीं है। डॉक्टर कहते हैं कि "यह बीमारी पुरुषों और महिलाओं दोनों को हो सकती है, लेकिन कुछ महिलाएं अक्सर इसके लक्षणों को पहचान नहीं पातीं हैं या डॉक्टर के पास जाने में देर कर देती हैं। कई महिलाएं अपनी परेशानी को छिपाकर चुपचाप सहती रहती हैं। बता दें कि PubMed में प्रकाशित एक अध्ययन Heart Valve Structure and Function in Development and Disease के अनुसार "वाल्व की बीमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य की एक बड़ी समस्या है और बढ़ते सबूत बताते हैं कि इसके विकास की असामान्य प्रक्रियाएं ही इस बीमारी के पनपने का कारण बनती हैं।"
हार्ट वाल्व डिजीज होने पर महिलाओं में जल्दी थकान होना, सांस फूलना, चक्कर आना, दिल की धड़कन तेज महसूस होना, पैरों या टखनों में सूजन आना और रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह तनाव, मेनोपॉज, नींद की कमी, बढ़ती उम्र या घर और नौकरी की जिम्मेदारियों की वजह से हो सकता है, इसलिए लगातार बने रहे तो हार्ट हेल्थ और अन्य मेडिकल चेकअप बहुत जरूरी है। अक्सर महिलाएं परिवार और घर की देखभाल में इतनी व्यस्त हो जाती है कि अपने बारे में सोचना या अपनी सेहत का ख्याल रखना ही भूल जाती है।
डॉक्टर बताते हैं कि जांच और इलाज में देरी करने से बीमारी बढ़ सकती है और बाद में इसका इलाज ज्यादा मुश्किल हो सकता है। अगर हार्ट वाल्व की गंभीर बीमारी का समय पर इलाज नहीं किया जाए, तो यह हार्ट फेल्योर, दिल की धड़कन का अनियमित होना और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।
डॉक्टर बताते हैं कि महिलाएं अपने ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएं, दवाइयां समय पर लें, रोजाना हल्का-फुल्का व्यायाम करें, अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें। साथ ही संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
डिस्क्लेमर: महिलाओं को अपनी सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए। साथ ही अगर आपको बार-बार थकान महसूस हो रही है, चक्कर आ रहे हैं या पैरों में सूजन आ रही है तो डॉक्टर से सलाह लें। बहुत जरूर है कि आप नियमित तौर पर अपना चेकअप कराएं।