
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr. Sonia Lal Gupta
brain capacity world brain day
आपने भी अपने जीवन में किसी न किसी को यह कहते जरूर सुना होगा कि इंसान अपने दिमाग का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा ही इस्तेमाल करते हैं और अक्सर यह कहते सुना होगा कि अगर एक इंसान अपने दिमाग का 100 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल कर दे तो पता नहीं क्या हो जाएगा। यह विचार फिल्मों, किताबों और विज्ञापनों में भी खूब दिखाया गया है। हालांकि, आधुनिक न्यूरोसाइंस के अनुसार यह पूरी तरह एक मिथक या सच इस बारे में हम मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल में जॉइंट मैनेजमेंट की डायरेक्टर और सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सोनिया लाल गुप्ता से जानेंगे।
रिसर्च और मेडिकल इमेजिंग स्कैन्स से यह साबित होता है कि इंसान का दिमाग का हर एक हिस्सा काम करता है और हर काम के अनुसार कोई न कोई हिस्सा एक्टिव होकर काम कर रहा होता है। इसका मतलब यह नहीं कि सभी हिस्से एक ही समय पर समान रूप से सक्रिय रहते हैं, बल्कि अलग-अलग गतिविधियों के दौरान मस्तिष्क के अलग-अलग क्षेत्र काम करते हैं।
उदाहरण के तौर पर जब चलना, बोलना, सुनना, पढ़ना, याद करना या फिर किसी भावना को महसूस करना यह हर एक काम दिमागके किसी न किसी हिस्से द्वारा किया जाता है। यहां तक कि नींद के दौरान भी हमारा दिमाग सक्रिया रहता है। यहां तक कि बॉडी के फंक्शन या कार्य जो आप खुद कंट्रोल नहीं कर रहे होते बल्कि अपने आप चल रहे होते हैं उन्हें भी हमारा दिमाग ही कंट्रोल कर रहा होता है जैसे सांस लेना, दिल का धड़कना, शरीर का तापमान कंट्रोल रखना और यादों को सेव रखना व समय पर उन्हें याद करना।
यह दरअसल शुरुआत के समय फैला ही एक ऐसा भ्रम है, जिस में मेडिकल साइंस इतना एडवांस नहीं था और दिमाग व खोपड़ी से जुड़ी जानकारियां सीमित थी। इस दौरान लोगों को बीच कई धारणाएं होती थी और इस तरह की कुछ धारणाएं ज्यादा लोकप्रिय हो जाती थीं क्योंकि यह विचार लोगों को इसलिए भी आकर्षित करता है क्योंकि यह इंसान के अंदर छिपी संभावनाओं और क्षमताओं को बढ़ाने की उम्मीद जगाता है।
हालांकि, मेडिकल साइंस के अनुसार दिमाग के किसी निष्क्रिय हिस्से को सक्रिय करना या फिर दिमाग की क्षमता बढ़ाना दोनों अलग-अलग चीजें हैं। हमारा मस्तिष्क पहले से ही पूरी क्षमता के साथ काम कर रहा होता है, लेकिन इसकी क्षमता को बढ़ाया भी जा सकता है। नियमित रूप से सीखने, अभ्यास करने और सही जीवनशैली की जरिए इसकी क्षमता को सुधारा जा सकता है।
मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया न्यूरोप्लास्टिसिटी पर आधारित होती है, जिसमें दिमाग नए अनुभवों और सीखने की प्रक्रिया के अनुसार अपने न्यूरल कनेक्शन में बदलाव करता है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नई चीजें सीखना, किताबें पढ़ना, रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेना और सामाजिक रूप से सक्रिय रहना दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
इसके अलावा ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल और धूम्रपान जैसी आदतों पर नियंत्रण रखना भी जरूरी है, क्योंकि ये मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं। बार-बार सिरदर्द, दौरे पड़ना, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बोलने में परेशानी, अचानक याददाश्त कम होना या व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के संकेत हो सकते हैं।
दिमाग का केवल 10 प्रतिशत इस्तेमाल करने की बात भले ही एक लोकप्रिय मिथक है, लेकिन सही आदतों, लगातार सीखने और वैज्ञानिक तरीकों से अपनी मानसिक क्षमता को बेहतर बनाना संभव है। स्वस्थ मस्तिष्क ही बेहतर सोच, सीखने और बेहतर जीवन की नींव है।
Dr Sonia Lal Gupta Senior Neurologist (Headache & Stroke Specialist) Joint Managing Director - Metro Group of Hospitals
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल दिमाग के स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ बेहद जरूरी जानकारियां देना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।