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क्या सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही लंग कैंसर होता है? जानिए फेफड़ों के कैंसर से जुड़ी भ्रांतियां और सच!

World Lung Cancer Day 2024: वर्तमान समय में लंग कैंसर के इलाज पर कई तरह की रिसर्च चल रही हैं लेकिन हमें अपने स्तर पर किसी गलतफहमी में पड़कर देर नहीं करनी है। खुद भी जागरूक होना है और दूसरों को भी जागरूक करना है।

क्या सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही लंग कैंसर होता है? जानिए फेफड़ों के कैंसर से जुड़ी भ्रांतियां और सच!
Smoking can also make diabetic retinopathy worse.
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Bhavna Bansal

Written by Atul Modi |Published : August 1, 2024 6:20 PM IST

World Lung Cancer Day 2024: कैंसर की बीमारियों में लंग कैंसर को सबसे घातक माना जाता और पूरी दुनिया में हर साल यह बीमारी लाखों लोगों की जान लेती है। लंग कैंसर से निपटने की दिशा में कई रिसर्च हुई मगर इसके बावजूद लोगों में इसे लेकर कई तरह की गलतफहमियां, या यूं कहें कि कई तरह के मिथक अभी तक बने हुए हैं। इन मिथक की वजह से कई लोग लंग कैंसर के लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं और बाद में उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। ‘वर्ल्ड लंग कैंसर डे’ के मौके पर यह लेख लंग कैंसर से जुड़े सभी मिथकों को तोड़ेगा और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाएगा, क्योंकि अगर हमें इस बीमारी का प्रभावी तरीके से मुकाबला करना है तो सही जानकारी का होना बहुत आवश्यक है।

मिथक 1: केवल धूम्रपान करने वालों को ही लंग कैंसर होता है!

सत्य: धूम्रपान, लंग कैंसर का एक मुख्य कारण जरूर है लेकिन जो लोग धूम्रपान नहीं करते उन्हें भी यह बीमारी अपनी चपेट में ले सकती है। एक रिसर्च के अनुसार जितने लोग लंग कैंसर का शिकार होते हैं उनमें से 85% मामलों में धूम्रपान एक मुख्य कारण होता है, लेकिन बाकी मामलों में वायु प्रदूषण, रेडियोएक्टिव गैस और कुछ आनुवंशिक कारणों से भी लंग कैंसर का खतरा हो सकता है।

मिथक 2: युवाओं को लंग कैंसर की बीमारी नहीं होती है!

सत्य: लंग कैंसर के ज्यादातर मामले बुजुर्ग लोगों में देखे गए हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि युवाओं को यह बीमारी अपनी चपेट में नहीं लेती। लगभग 10% लंग कैंसर के मामले 50 साल से कम उम्र के लोगों में पाए गए हैं।

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मिथक 3: लंग कैंसर की बीमारी केवल पुरुषों को होती है!

सत्य: पुरुष और महिला, दोनों ही इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। पुराने समय में सिर्फ पुरुष ही धूम्रपान करते थे इसलिए उन्हें इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता था, लेकिन अब महिलाओं में भी लंग कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है। यहां तक कि कुछ देशों में तो यह बीमारी महिलाओं की कैंसर से मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। जो महिलाएं कभी धूम्रपान नहीं करती, आनुवंशिकी और हार्मोनल कारणों से उन्हें भी इस बीमारी का खतरा बढ़ा है।

मिथक 4: लंग कैंसर हमेशा जानलेवा होता है!

सत्य: अगर शुरुआती दौर में बीमारी का पता चल जाए और उसका इलाज शुरु हो जाए तो इसके गंभीर परिणाम को टाला जा सकता है। मान लीजिए कि शुरुआती दौर में ही किसी को लंग कैंसर की बीमारी का पता चल जाए तो उसके अगले पांच साल तक जीवित रहने की दर 56% तक हो सकती है जबकि बाकी मामलों में यह दर सिर्फ 20% है। बीते कुछ समय में मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की की है, इसलिए आधुनिक उपचार, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी की बदौलत कई रोगियों के जीवित रहने की संभावनाएं बढ़ी हैं और उनके जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार आया है।

मिथक 5: लंग कैंसर के जोखिम को कम करने का कोई तरीका नहीं है!

सत्य: लंग कैंसर के सभी मामलों को रोका तो नहीं जा सकता मगर इसके जोखिम को कम किया जा सकता है। इसका सबसे पहला और प्रभावी तरीका है धूम्रपान से बचना। एक्टिव या पैसिव दोनों तरह के धूम्रपान से परहेज करना होगा। इसके अलावा स्वस्थ तथा संतुलित आहार और नियमित व्यायाम लंग कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम करने में मदद करता है।

मिथक 6: जब तक देर ना हो जाए, लंग कैंसर के लक्षणों का पता नहीं चलता!

सत्य: कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि शुरुआती दौर में लंग कैंसर के लक्षणों का पता ना चले, लेकिन हमें छोटी से छोटी बातों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खांसी, सीने में दर्द, सांस में तकलीफ और वजन का घटना, अगर किसी को इस तरह के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच करवाएं। समय पर इन लक्षणों का उपचार और शुरुआती इलाज आगे किसी गंभीर परिणाम से बचा सकता है।

लंग कैंसर की वक्त पर पहचान और सही इलाज के लिए हमें इन मिथकों को तोड़ना बहुत जरूरी है। इस खतरनाक बीमारी के बारे में जितनी ज्यादा और जितनी सटीक जानकारी होगी, इसकी पहचान और इलाज भी उतना ही आसान होता चला जाएगा। वर्तमान समय में लंग कैंसर के इलाज पर कई तरह की रिसर्च चल रही हैं लेकिन हमें अपने स्तर पर किसी गलतफहमी में पड़कर देर नहीं करनी है। खुद भी जागरूक होना है और दूसरों को भी जागरूक करना है। ‘वर्ल्ड लंग कैंसर डे’ के अवसर पर लोगों को कैंसर के खिलाफ चल रहीं जंग में एकजुट करने के लिए हम सबको प्रतिबद्ध होना चाहिए।

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(Inputs: डॉ. भावना बंसल, सीनियर कंसल्टेंट और एचओडी, हिस्टोपैथोलॉजी, ऑनक्वेस्ट लैबोरेटरीज़ )

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