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क्या सिर्फ मोटे लोगों को ही हाइपरटेंशन होता है?

क्या यह सच है कि जो लोग मोटे होते हैं उन्हें हाइपरटेंशन होने की संभावना अधिक होती है? अगर आपके मन में भी यही सवाल है तो आइए डॉक्टर से ही सच जान लेते हैं।

क्या सिर्फ मोटे लोगों को ही हाइपरटेंशन होता है?
VerifiedVERIFIED By: Dr. Sunil Rana

Written by Vidya Sharma |Updated : February 16, 2026 9:24 AM IST

आजकल हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) को लेकर एक आम धारणा है कि यह सिर्फ मोटे लोगों की बीमारी है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सच्चाई इससे कहीं ज्यादा व्यापक है। बढ़ा हुआ वजन हाई बीपी का बड़ा जोखिम कारक जरूर है, लेकिन यह समस्या सामान्य वजन वाले लोगों में भी देखी जा रही है। एशियन हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर और सीनियर फिजिशियन डॉ. सुनील राणा बताते हैं, ‘यह मान लेना गलत है कि सिर्फ मोटे लोगों को ही हाइपरटेंशन होता है। हालांकि मोटापा एक बड़ा रिस्क फैक्टर है, लेकिन तनाव, अनियमित जीवनशैली, अधिक नमक का सेवन, धूम्रपान और आनुवंशिक कारणों से भी हाई बीपी हो सकता है।’

जब डॉक्टर से पूछा गया कि फैट और हाइपरटेंशन के बीच क्या संबंध है, तो डॉक्टर ने बताया कि जब शरीर में फैट, खासकर पेट के आसपास की चर्बी बढ़ती है, तो यह हार्मोनल असंतुलन और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देती है। इससे रक्त वाहिकाएं संकरी होने लगती हैं और दिल को खून पंप करने में ज्यादा दबाव लगाना पड़ता है। यही स्थिति आगे चलकर हाई बीपी का कारण बनती है। डॉ. कहते हैं, ‘अधिक फैट शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ाता है और धमनियों को सख्त करता है, जिससे ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा रह सकता है।’ आइए हम इस विषय पर थोड़ा और विस्तार से जानते हैं।

मोटे लोगों में हाइपरटेंशन के कारण क्या हैं?

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क्या मोटे लोगों में अलग लक्षण दिखते हैं?

हाई बीपी को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण साफ तौर पर नजर नहीं आते। फिर भी कुछ लोगों में सिरदर्द, चक्कर, धुंधला दिखना, सीने में भारीपन या सांस फूलना जैसे संकेत मिल सकते हैं। मोटे लोगों में ये लक्षण जल्दी और अधिक गंभीर रूप में दिख सकते हैं, खासकर यदि साथ में डायबिटीज या हृदय रोग भी हो।

क्या यह अन्य बीमारियों का कारण बनता है?

हां। मोटे लोगों में हाई बीपी होने पर हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी की बीमारी और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉक्टर चेतावनी देते हैं, ‘यदि मोटापा और हाई बीपी साथ हों तो यह ‘डबल रिस्क’ की स्थिति है। ऐसे मरीजों को नियमित जांच और सख्त लाइफस्टाइल कंट्रोल की जरूरत होती है।’

क्या इलाज अलग होता है?

सामान्य तौर पर हाई बीपी की दवाएं सभी मरीजों के लिए समान सिद्धांत पर काम करती हैं। लेकिन मोटे मरीजों में डॉक्टर वजन घटाने पर विशेष जोर देते हैं। कई बार दवाओं की खुराक और संयोजन व्यक्ति की स्थिति के अनुसार बदले जाते हैं। डॉक्टर कहते हैं कि ‘मोटे मरीजों में सिर्फ दवा पर्याप्त नहीं होती। जब तक वजन कम नहीं होगा, बीपी को लंबे समय तक नियंत्रित रखना मुश्किल हो सकता है’ डॉक्टर बताते हैं।

फैट अधिक हो तो हाई बीपी कंट्रोल करने के उपाय

रोजाना कम से कम 30-45 मिनट तेज चाल से चलना- अगर आप अपने फैट को कम करना चाहते हैं, साथ ही बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना चाहते हैं तो रोजाना कम से कम 30-45 मिनट के लिए चलें। ऐसा करने से आपकी हार्ट मसल्स मजबूत होती हैं, जिससे वह कम प्रयास के साथ ज्यादा ब्लड पंप कर पाएंगी। वहीं फैट बर्न होने से शरीर में जमा एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न होती है, जिससे विसेरल फैट यानी कि पेट की चर्बी घटती है।

नमक की मात्रा 5 ग्राम प्रतिदिन से कम रखना- हम सभी को यह पता होना चाहिए कि नमक में मौजूद सोडियम शरीर में पानी को रोकने का काम करता है। यानी कि जब शरीर में सोडियम ज्यादा हो जाता है, तो रक्त का वॉल्यूम बढ़ जाता है। स्टडी के अनुसार, एक हेल्दी वयस्क को दिन भर में 5 ग्राम (लगभग एक छोटा चम्मच) से कम नमक लेना चाहिए। नमक कम करने से न सिर्फ बीपी तुरंत नियंत्रित होता है, बल्कि यह किडनी की फंक्शनिंग को भी सुधारता है और फ्यूचर में होने वाले स्ट्रोक के जोखिम को भी कम करता है।

तले-भुने और प्रोसेस्ड फूड से दूरी- खाने के मामले में भारतीयों को कोई पीछे नहीं छोड़ सकता है। खासकर अगर हम समोसे, पकोड़े, चिप्स और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों की बात करें तो। लेकिन इनमें ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट की मात्रा बहुत अधिक होती है जो बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाते हैं और आर्टेरीज में जमा होकर उन्हें संकरा बना देता है। साथ ही प्रोसेस्ड फूड में नमक और प्रिजर्वेटिव्स भी मिले होते हैं, जो बीपी के मरीजों के लिए जहर की तरह काम करते हैं। इसलिए आपके लिए बहुत जरूरी है कि आप इन चीजों से दूरी बनाएं ताकि ब्लड प्रेशर सही रहे।

फल, हरी सब्जियां और फाइबर युक्त आहार लेना- डॉक्टर आपको फल, हरी सब्जी और अन्य फाइबर रिच फूड खाने को इसलिए कहते हैं क्योंकि यह हमारे डाइजेशन को इम्प्रूव करते हैं। ओट्स, दलिया, साबुत अनाज और हरी सब्जियां भी इनमें शामिल हैं। यह बॉडी से एक्स्ट्रा फैट को बाहर निकालने में मदद करती हैं। साथ ही फलों और सब्जियों में पोटेशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो सोडियम से होने वाले बुरे असर को कम कर ब्लड प्रेशर को बैलेंस रखता है। 'DASH डाइट' (Dietary Approaches to Stop Hypertension) इसी सिद्धांत पर आधारित है। रंग-बिरंगी सब्जियां और फल एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं, जो नसों की सूजन को कम कर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।

तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान- इसे अलावा स्ट्रेस लेने से भी बीपी हाई होता है और मोटापा बढ़ता है। इन दोनों को ठीक करने के लिए आप योग व मेडीटेशन कर सकते हैं। मानसिक तनाव शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन बढ़ाता है, जो हार्ट रेट और रक्तचाप को अस्थायी रूप से बढ़ा देते हैं। अगर लंबे समय तक स्ट्रेस रहे, तो यह स्थायी हाई बीपी का कारण बन सकता है। योग, प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम और मेडीटेशन नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं।

पर्याप्त नींद लेना- इस सब के अलावा सोते समय हमारा शरीर रिपेयरिंग मोड में होता है। अगर आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं, तो शरीर का स्ट्रेस लेवल बढ़ जाता है और मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे फैट बढ़ना शुरू होता है। साथ ही कम नींद लेने से आपके ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने वाले हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि हर रात 7-8 घंटे की गहरी नींद जरूर लें। यह हृदय को आराम देगी और रक्तचाप को प्राकृतिक रूप से कम रखने में मदद करेगा।

मोटे लोगों के लिए कौन-सी एक्सरसाइज फायदेमंद?

तेज चलना, साइकिलिंग, तैराकी, हल्की जॉगिंग और योग सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माने जाते हैं। शुरुआत धीरे-धीरे करें और डॉक्टर की सलाह से ही व्यायाम बढ़ाएं।

कौन-सी आदतें बीपी बढ़ाती हैं?

  • ज्यादा नमक और शराब का सेवन- नमक में मौजूद सोडियम शरीर में पानी रोकता है, जिससे नसों पर दबाव बढ़ता है। वहीं अगर आप अधिक मात्रा में शराब पीते हैं तो यह हार्ट की मसल्स को कमजोर करता है और बीपी बढ़ाता है।
  • धूम्रपान- आपको पता होना चाहिए कि तंबाकू में मौजूद निकोटीन रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है, जिससे दिल को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। और ऐसी स्थिति में चेस्ट पेन भी हो सकता है।
  • देर रात तक जागना- अच्छी सेहत के लिए यह हर किसी के लिए जरूरी है कि वह पर्याप्त मात्रा में नींद ले। ऐसा इसलिए क्योंकि नींद की कमी स्ट्रेस हार्मोन यानी कि कोर्टिसोल को बढ़ाने का काम करती है। यह सीधे तौर पर हमारे ब्लड प्रेशर को प्रभावित करते हैं।
  • बिना डॉक्टर की सलाह दवा बंद कर देना- कई लोगों की आदत होती है, उन्हें लगता है कि वह ठीक हो गए हैं। बिना डॉक्टरी सलाह के दवाई बंद करना आपके बीपी को अचानक खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है और स्थिति बिगड़ सकती है। यहां तक कि आगे चलकर हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा भी बन सकता है।
  • नियमित जांच न कराना- ऐसा नहीं है कि आपने एक बार जांच करवाई और फिर डॉक्टर की दी हुई दवा खाना शुरु कर दिया। आपको समय दवाई खाने के साथ-साथ अपने बीपी और अगर अन्य बीमारी है तो उसकी भी जांच करवानी चाहिए।

किन गलतियों से बचें?

  • ‘मैं ठीक महसूस कर रहा हूं’ सोचकर दवा छोड़ना- आप ऐसे गलती बिल्कुल न करें, कि 'मैं ठीक हूं' या 'मुझे कुछ नहीं हुआ'। हमारे माता-पिता भी यही गलती करते हैं। उन्हें समझाएं और कोई भी समस्या होने पर डॉक्टर को दिखाएं। साथ ही भले ही आप ठीक हों, लेकिन रूटीन चेकअप को कभी इग्नोर न करें।
  • घरेलू नुस्खों पर पूरी तरह निर्भर रहना- कई लोग अपनी समस्याओं को घर पर अपने या पुराने जमाने के नुस्खों की मदद से ठीक करने की कोशिश करते हैं। यह नुस्खे आपकी सेहत पर भारी पड़ सकते हैं। खासकर अगर आप इंटरनेट पर दिखाए गए उपायों को अपना रहे हैं तो यह जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए बिना किसी डॉक्टर की सलाह के कोई भी गलत कदम न उठाएं।
  • अचानक क्रैश डाइट शुरू करना- इसके अलावा हम में से कई लोग ऐसे हो सकते हैं जो वजन घटाने के लिए एकदम से खाना छोड़ देना या बहुत कम कैलोरी वाली डाइट लेना शुरू कर देते हैं। आपका ऐसा करना शरीर के लिए शॉक की तरह होता है। इससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बिगड़ जाता है, जो हार्ट बीट और ब्लड प्रेशर को अनियंत्रित कर सकता है। वहीं अगर आप बैलेंस डाइट व न्यूट्रिशन नहीं लेते हैं तो शरीर में कमजोरी और तनाव पैदा होता है, जिससे बीपी बढ़-घट सकता है।
  • अत्यधिक भारी एक्सरसाइज करना- साथ ही अगर आप हाइपरटेशन और मोटापा, दोनों ही परेशानियों से एक साथ जूझ रहे गैं तो अचानक बहुत भारी वजन उठाना या इंटेंस वर्कआउट करना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इससे दिल पर अचानक बहुत अधिक दबाव पड़ता है, जो स्ट्रोक या हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा देता है। इसलिए हमेशा हल्की एक्सरसाइज से शुरुआत करें और फिर धीरे-धीरे मीडियम और फिर हार्ड एक्सरसाइज करें।

अंत में, एक्सपर्ट का मानना है कि हाई बीपी सिर्फ मोटे लोगों की समस्या नहीं है, लेकिन मोटापा इसे गंभीर जरूर बना सकता है। समय पर जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह से इस खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।