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खराश का सबसे सामान्य कारण सर्दी-जुकाम है। कई बार बहुत तेज चीखने, कुछ गलत खा लेने या किसी दवा के असर के कारण भी गले में खराश, सूजन और खिचखिच हो जाती है। © Shutterstock.
गले में खराश होना परेशानी तो है पर असल में यह और कई परेशानियों का संकेत है। वायरल इंफेक्शन के साथ ही और भी कई बीमारियां हैं जिनके कारण गले में खराश और सूजन हो जाती है। इस हालत में अगर लापरवाही की जाए तो समस्या और बढ़ सकती है। इसलिए जरूरी है कि गले में खराश के दौरान कुछ सावधानियां जरूर बरतें (Things to avoid in Sore throat)। आइए जानें क्या हैं ये सावधानियां।
सूजन और गले में खराश होने पर कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं। इसके कारण न आप ठीक से बात कर पाते हैं और न ही खाना खा पाते हैं। कई बार तो यह इतनी ज्यादा हो जाती है कि पानी निगलने में भी कठिनाई होने लगती है। पर असल में यह बीमारी नहीं है, केवल बीमारी का संकेत है। ऐसे में इस और बहुत ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
गले में खराश और सूजन का सबसे आम कारण संक्रमण यानी इंफेक्शन है। पर यह इंफेक्शन ही सौ से ज्यादा प्रकार का होता है। अगर बात जुकाम के कारण होने वाली गले की खराश की करें तो इसके लिए भी 200 कारण हो सकते हैं। कई बार बहुत तेज चीखने, कुछ गलत खा लेने या किसी दवा के असर के कारण भी गले में खराश, सूजन और खिचखिच हो जाती है। इसलिए सबसे पहले आपको इसका कारण जानना होगा। तभी उपचार कर पाएंगे।
खराश का सबसे सामान्य कारण सर्दी-जुकाम है। इसलिए जैसे ही हल्की सी भी खराश महसूस हो तो ठंडा पानी पीना छोड़ देना। सामान्य तापमान का या घड़े का पानी पिएं। ठंडा पानी पीने से गले की खराश और जुकाम दोनों ही बढ़ सकता है।
तली हुई यानी डीप फ्राइड चीजें भी गले की खराश को बढ़ा सकती हैं। इनमें मौजूद तेल गले के अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए इन चीजों को भी अवॉडइ करें। खासतौर से पकौड़े, परांठे तो बिल्कुल न खाएं। वरना इससे कफ की समस्या भी बढ़ सकती है।
बहुत ज्यादा बोलने, चीखने से वोकल कॉर्ड को नुकसान पहुंचता है। जिसकी वजह से गले में सूजन आ जाती है। इससे आपको गले में दर्द महसूस होगा और बात करना मुश्किल होगा। इसलिए जरूरी है कि जब गले में दर्द हो, बोलने में दिक्कत आ रही हो तो कम से कम बोलें। इससे गले को आराम मिलेगा।
थकान बढ़ जाने और हरारत के कारण भी आवाज बैठ जाती है। कुछ लोगों को आवाज बैठने के बाद जुकाम भी हो जाता है। इन दोनों समस्याओं से बचने के लिए जरूरी है कि काम के साथ आराम पर भी ध्यान दें। जब भी थकान महसूस हो तो आराम का वक्त निकालें।
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