माइग्रेन को नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक, लक्षणों को पहचानकर अपनाएं ये घरेलू इलाज

माइग्रेन एक अनुवांशिक बीमारी है, जो खानपान, वातावरण में बदलाव, बढ़ते तनाव या कभी-कभी बहुत अधिक सोने से भी हो सकता है। इसकी शुरुआत बचपन, किशोरावस्था या वयस्क होने पर कभी भी हो सकती है।

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Written By: Anshumala | Published : August 25, 2018 10:09 AM IST

अक्सर सिरदर्द की समस्‍या बनी रहती है तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। आम लगने वाला यह सिरदर्द माइग्रेन भी हो सकता है। बेहतर होगा कि इसके लक्षणों को समझें और सतर्क रहें। माइग्रेन भी एक तरह का सिरदर्द है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति को रह-रहकर सिरदर्द के बहुत तेज अटैक पड़ते हैं।

लगभग चार में से एक महिलाएं और 12 में से एक पुरुष माइग्रेन की समस्या से जूझते हैं। अमेरिका में इस समस्या से लगभग 30 प्रतिशत लोग ग्रस्त हैं, जबकि भारत में इससे कहीं ज्यादा लोग माइग्रेन की समस्या से परेशान हैं।

माइग्रेन सामान्य तौर पर होने वाला एक विशिष्ट प्रकार का सिरदर्द है। अक्सर इसका दर्द कान व आंख के पीछे अथवा कनपटी में भी होता है। यह दर्द सिर के किसी भी भाग में हो सकता है। सर गंगाराम अस्पताल के न्यूरो एंड स्पाइन विभाग के निदेशक डॉ. सतनाम सिंह छाबड़ा का मानना है, "माइग्रेन ने लगभग 20 प्रतिशत महिलाओं को अपना शिकार बना रखा है। बावजूद इसके लोग माइग्रेन को गंभीरता से नहीं लेते हैं और न ही इसका उचित उपचार कराते हैं।

डॉ. छाबड़ा ने कहा कि इस दर्द का असली कारण है- रक्त कोशिकाओं के फैलने एवं उनके नाड़ी तंतुओं से स्रावित रसायन, जो इन रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं। माइग्रेन में सिर के आधे भाग में दर्द होता है इसलिए माइग्रेन को अधकपारी भी कहते हैं।

पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को यह समस्या ज्यादा होती है और बहुत कम ही महिलाएं इसका उपचार कराती हैं। यह एक अनुवांशिक बीमारी है, जो खानपान, वातावरण में बदलाव, बढ़ते तनाव या कभी-कभी बहुत अधिक सोने से भी हो सकता है। इसकी शुरुआत बचपन, किशोरावस्था या वयस्क होने पर कभी भी हो सकती है। कभी-कभी उल्टी, जी मिचलाना आदि की शिकायत भी हो सकती है। अगर उपचार न हो तो यह दर्द 4-5 घंटों तक रह सकता है।"

छाबड़ा के अनुसार, बायोफीडबैक, योग, एक्यूप्रेशर और नियमित व्यायाम आदि से माइग्रेन के दौरे को घटाने में मदद मिलती है। माइग्रेन से बचने के लिए सिरदर्द उत्पन्न करने वाले कारणों से बचना चाहिए, जैसे ऊंची आवाज में गाने सुनना, तनावग्रस्त रहना आदि। साथ ही दर्दनिवारक दवाओं का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए।

माइग्रेन के लक्षण

जी मिचलाना, शरीर में असहज महसूस होना।

सिर में भारी पन।

सिर के पीछे की भाग जो गर्दन से सटा होता है, उसमे दर्द होना।

तेज रोशनी से आंख में जोर पड़ना।

ज्यादा शोर होने पर चिड़चिड़ापन महसूस करना।

हर वक्त तनाव में रहना।

माइग्रेन से होने वाला दर्द ज्‍यादातर शाम को होता है।

इससे आंखों में भी तकलीफ रहती है।

माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय

1 माइग्रेन के शिकार व्‍यक्‍ति को दर्द होने पर अपने सिर पर ठंडे पानी से भीगा हुआ कपड़ा 25 से 30 मिनट तक रखना चाहिए।

2 गुस्से में न रहें। अपने दिमाग को थोड़ा शांत रखने की कोशिश करें। इससे मस्तिष्क को आराम मिलता है, जिससे आपको दर्द में राहत मिलती है।

3 कई बार खाली पेट रहने से भी माइग्रेन की समस्या बढ़ जाती है। इस दर्द से बचने के लिए निश्चित अंतराल पर कुछ न कुछ खाते रहें ताकि पेट खाली न रहे।

4 भरपूर सोना जरूरी है। कम सोने की आदत से भी माइग्रेन की समस्या को बढ़ाता है। प्रतिदिन कम से कम 8 घंटा सोएं।

5 डायट में पौष्टिक चीजों को करें शामिल। प्रोटीन पाने के लिए प्रोटीन युक्त डायट जैसे दूध, दही, पनीर, दाल, मांस और मछली आदि का सेवन करें। साथ ही हरी सब्जियों को खाने में जरूर शामिल करें।

6 किसी भी शारीरिक रोग से बचे रहने का बेहतर और सस्ता उपाय है योग और ध्यान करना। इससे तनाव कम होता है।

7 इसके अलावा मसालेदार भोजन, जंक फूड और डिब्बाबंद फूड, अल्कोहल, धूम्रपान का सेवन न करें। बहुत तेज व चुभने वाली रोशनी से बचना चाहिए।

(इनपुट : आईएएनएस)

चित्रस्रोत : Shutterstock.

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