जलने पर न करें अनदेखा, इन उपायों को आजमाने से दूर होगी जलन

शरीर का कोई भी भाग बहुत कम जला होता है, तो फर्स्ट डिग्री बर्न कहते हैं। इसमें डॉक्टर के पास जाने की जरूरत तब तक नहीं होती जब तक कि जलने का असर ऊतकों पर न पड़ा हो।

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Written By: Anshumala | Published : August 8, 2018 6:08 PM IST

अक्सर घर पर किचन में खाना पकाते हुए महिलाओं की त्वचा गर्म बर्तन छूने, गैस, तेल, भाप या फिर माचिस जलाते समय स्किन जल जाती है। त्वचा जब जलती है, तो दर्द और जलन भी बहुत होता है। तेज जलन और दर्द से बचने के लिए लोग खुद से उपचार करने लगते हैं। कई बार जानकारी के अभाव में तत्काल रूप से बरती जाने वाली सावधानियां और आवश्यक उपचार नहीं कर पाते। यदि कभी भी घर में काम करते हुए त्वचा जल जाए या गलती से बच्चों की त्वचा गर्म पानी, आइरन छूने, दिवाली में पटाखे जलाते समय जल जाए, तो जल्दबाजी में उल्टा-सीधा कदम उठाने से बचें। कुछ खास बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए। मामूली रूप से जलने के घाव तो समय के साथ भर जाते हैं, लेकिन गंभीर रूप से जलने पर संक्रमण को रोकने और घावों को भरने के लिए विशेष देखभाल जरूरी होती है।

फर्स्ट डिग्री बर्न

फर्स्ट डिग्री बर्न वह होती है, जब त्वचा हल्के से लेकर गंभीर रूप से जलती है। शरीर का कोई भी भाग बहुत कम जला होता है, तो फर्स्ट डिग्री बर्न यानी प्रथम श्रेणी का जलना कहते हैं। इसमें डॉक्टर के पास जाने की जरूरत तब तक नहीं होती जब तक कि जलन बहुत अधिक न हो या फिर जलने का असर ऊतकों पर न पड़ा हो।

सेकेंड डिग्री बर्न

सेकेंड डिग्री बर्न जब कोई जलता है, तो इसमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। चिकित्सक के पास जाना जरूरी होता है। फर्स्ट डिग्री में त्वचा की सबसे ऊपरी परत एपिडर्मिस प्रभावित होती है लेकिन सेकेंड डिग्री बर्न में जलन में दर्द होता है, कई बार सूजन और लालिमा आ जाती है। जलने वाला भाग तीन इंच से बड़ा हो तो डॉक्टर से जरूर दिखाएं, क्योंकि यह घर पर खुद ब खुद ठीक नहीं होते। इसे ठीक होने में चार दिन से लेकर एक सप्ताह भी लग सकता है। इसमें एपिडर्मिस के साथ ही डर्मिस भी क्षतिग्रस्त होती है।

थर्ड डिग्री बर्न

थर्ड डिग्री बर्न में तो डॉक्टर को बिना दिखाए काम बनता ही नहीं। घाव में इंफेक्शन भी होने का खतरा रहता है। इसमें त्वचा की तीनों परत पर जलने का असर होता है। इससे त्वचा सफेद या काली और सुन्न पड़ जाती है। जिस जगह पर जला होता है, वहां हेयर फॉलिकल, स्वेट ग्लैंड और तंत्रिकाओं के सिरे नष्ट हो जाते हैं। इस स्थिति में दर्द, फफोले और सूजन होने के साथ-साथ रक्‍त संचरण बाधित हो जाती है। यदि कोई इंसान 80 प्रतिशत तक जल चुका है, तो उसके बचने की उम्मीद भी बहुत कम रहती है।

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जल जाएं तो क्या करें झटपट उपाय

1 जले हुए स्थान को गर्म कपड़ा या कंबल से न ढंके। कुछ देर जले हुए स्थान पर ठंडा पानी डालें, इससे जलन से राहत मिलेगी और फफोले भी नहीं बनेंगे।

2 अधिक जलने पर खुद से कोई भी क्रीम न लगाएं। हल्का जला हो, तो किसी मेडिकल स्टोर से अच्छी सी क्रमी खरीद कर अप्लाई करें।

3 प्राथमिक उपचार के तौर पर जले हुए अंग पर सोफरामाइसिन भी लगा सकते हैं। 20 से 30 प्रतिशत जलने पर खुद से कोई इलाज न करें और बिना देर किए हुए डॉक्टर के पास जाएं।

4 एलोवेरा जेल या एंटीबायोटिक क्रीम है, तो उसे जले हुए भाग पर लगा सकते हैं। एलोवेरा घाव भरने के साथ ही त्वचा को ठंडक भी देता है।

5 घाव को खुला न छोड़ें। उसके ऊपर ढीली पट्टी या न चिपकने वाली पट्टी बांध लें। इससे इंफेक्शन होने का डर नहीं रहता।

6 जलने के बाद संक्रमण होने की आशंका अधिक रहती है, ऐसे में पीड़ित व्यक्ति को टिटनेस का इंजेक्शन जरूर लगवाएं।

इन घरेलू उपचार को भी आजमाएं

जले हुए स्थान पर आलू पीसकर लेप लगाएं। इससे शीतलता का अनुभव होगा।

तुलसी के पत्तों का रस जले हुए हिस्से पर लगाएं। इससे दाग नहीं होगा।

तिल को पीसकर पेस्ट बनाएं। इसे जलने वाले भाग पर लगाएं। जलन और दर्द नहीं होगा। तिल से दाग-धब्बे भी चले जाते हैं।

गाजर पीसकर लगाने से जले हुए हिस्से में आराम मिलता है।

जलने पर नारियल का तेल लगाएं। इससे जलन कम होगी और आराम मिलेगा। इन घरेलू उपायों को अाजमाने से डर लगता है,तो बेहतर होगा कि आप किसी आयुर्वेदाचार्य की सलाह ले लें।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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