
Also Read
Medically Verified By: Dr. Soumya Shetty
Fibroids Kya Hota Hai: फाइब्रॉयड होने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि महिला को गर्भधारण में परेशानी ही होगी। बहुत-सी महिलाएं ऐसी होती हैं जिन्हें फाइब्रॉइड्स होते हैं, फिर भी वे बिना किसी इलाज के प्राकृतिक रूप से गर्भवती हो जाती हैं। अक्सर फाइब्रॉइड शब्द सुनते ही महिलाएं डर जाती हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि फाइब्रॉइड्स एक आम समस्या है, खासकर उन महिलाओं में जो प्रजनन आयु यानी कि बच्चा पैदा करने की उम्र में होती हैं। फाइब्रॉएड (Uterine Fibroids) गर्भाशय (बच्चेदानी) की मांसपेशियों में बनने वाली गैर-कैंसरयुक्त गांठ होती है, जिन्हें मायोमा या रसौली भी कहा जाता है।
सोशल मीडिया और गलत जानकारी की वजह से महिलाओं को यह लगता है कि फाइब्रॉयड्स होने का मतलब अब गर्भधारण संभव नहीं है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी की फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉक्टर सौम्या शेट्टी बताती हैं। कुछ फाइब्रॉइड्स गर्भधारण में समस्या पैदा कर सकते हैं, लेकिन बहुत-से फाइब्रॉइड्स ऐसे भी होते हैं जो न तो गर्भ ठहरने में रुकावट बनते हैं और न ही स्वस्थ प्रेग्नेंसी में। फाइब्रॉएड का असर इस बात पर निर्भर करता है कि वह कहां है, कितना बड़ा है और किस प्रकार का है।
फाइब्रॉइड्स गर्भाशय में उनकी जगह के अनुसार तीन प्रकार के होते हैं:
यह जानना बहुत जरूरी है कि हर महिला जिसे फाइब्रॉइड है, उसे गर्भधारण की समस्या हो यह जरूरी नहीं है।
जो फाइब्रॉइड गर्भाशय की बाहरी सतह पर होते हैं, वे आमतौर पर गर्भधारण में कोई परेशानी नहीं करते। ये न तो अंडे के ठहरने (implantation) में बाधा डालते हैं और न ही शुक्राणुओं की गति को रोकते हैं। इसलिए महिलाओं को बेवजह डरने की जरूरत नहीं है- गर्भधारण संभव होता है।
छोटे फाइब्रॉइड्स अक्सर कोई लक्षण नहीं देते और प्रेग्नेंसी में रुकावट नहीं बनते। कई महिलाओं को तो यह भी पता नहीं होता कि उन्हें फाइब्रॉइड है, जब तक कि किसी सामान्य जांच या अल्ट्रासाउंड में इसका पता न चले। इसलिए बिना डॉक्टर से मिले किसी नतीजे पर न पहुंचे।
बहुत-सी महिलाएं फाइब्रॉयड्स होने के बावजूद बिना किसी इलाज के गर्भधारण करती हैं और स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं। कई मामलों में फाइब्रॉएड का पता गर्भावस्था के दौरान किए गए स्कैन में चलता है।
अगर फाइब्रॉइड से ज्यादा दर्द नहीं हो रहा, अत्यधिक ब्लीडिंग नहीं है और गर्भधारण में कोई दिक्कत नहीं आ रही, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह नहीं देते। ऐसे मामलों में सिर्फ नियमित जांच और निगरानी ही काफी होती है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।
अगर फाइब्रॉइड्स गर्भधारण में परेशानी पैदा करते हैं, तो आज ऐसे इलाज और सर्जरी उपलब्ध हैं जिनसे गर्भाशय को नुकसानपहुंचाए बिना फाइब्रॉइड हटाया या छोटा किया जा सकता है। जैसे-
इन सभी उपचारों का उद्देश्य फर्टिलिटी को सुरक्षित रखना होता है।
फाइब्रॉयड्स होने का मतलब यह नहीं है कि महिला कभी मां नहीं बन सकती। फाइब्रॉइड्स की पहचान अल्ट्रासाउंड, पेल्विक जांच, हिस्टेरोस्कोपी और एमआरआय जैसी जांचों से की जा सकती है। हर महिला का केस अलग होता है। बहुत-सी महिलाएं फाइब्रॉइड्स के साथ भी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करती हैं और सफल मातृत्व का अनुभव करती हैं।
इसलिए डरें नहीं, घबराएं नहीं और सही सलाह के लिए फर्टिलिटी विशेषज्ञ से जरूर संपर्क करें। महिलाओं को फाइब्रॉइड्स के बारे में सही जानकारी देना और गर्भधारण से जुड़े सभी सवालों के जवाब देना बेहद जरूरी है। ताकि वे बिना डर के सही निर्णय ले सकें।