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बच्चों में चंचलता एक स्वभाविक गुण है, इससे न हो परेशान। © Shutterstock
एडीएचडी यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर बच्चों की एक बीमारी है। इससे ग्रस्त बच्चा कहीं भी टिक कर नहीं बैठ पाता। ध्यान केंद्रित न कर पाने के कारण उसे पढ़ाई में तो दिक्कत आती ही है, साथ ही अन्य व्यवहार संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे बच्चे बहुत चंचल होते हैं। पर इसका यह मतलब नहीं कि हर चंचल बच्चे को आप एडीएचडी से ग्रस्त मानने लगें। जानें क्या होती है ऐसे बच्चों की पहचान।
क्या है एडीएचडी
एडीएचडी (ADHD) स्वभाव या व्यहार से सम्बंधित विकारों का समूह है। इसे हम विकारों का समूह इस लिए कहते हैं क्यूंकि इसमें बच्चे को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे कि बच्चे को ध्यान केन्द्रित करने में दिक्कत आती है - inattentiveness, बहुत ज्यादा क्रियाशील रहता है - hyperactive और उसमे आवेग में आ कर काम करने के गुण होते हैं - impulsiveness।
ये हो सकते हैं लक्षण
तीन साल की उम्र पार करने के बाद भी अगर आप के बच्चे को आप की बात पर ध्यान देने में दिक्कत हो, तो यह एडीएचडी के लक्षण हो सकते हैं। लेकिन बिना डोक्टर से संपर्क किये आप इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकते।
बच्चे में एडीएचडी (ADHD) के लक्षण छोटे उम्र से ही दिखने लगते हैं। लेकिन जैसे - जैसे बच्चा बड़ा होता है उसमे ये लक्षण और ज्यादा उभर कर सामने आते हैं। उदहारण के लिए आप बच्चे में एडीएचडी (ADHD) के लक्षणों को ज्यादा बेहतर तरीके से तब पहचान सकती हैं जब वो स्कूल जाना शुरू करता है।
शिशु में एडीएचडी (ADHD) के अधिकांश मामले 6 से 12 साल के उम्र में सामने आते हैं।
एडीएचडी के लक्षणों में उम्र से साथ सुधर होता जाता है। लेकिन फिर भी जिन बच्चों में बचपन में एडीएचडी के लक्षण सामने आते हैं, उनमें वयस्क होने पर भी एडीएचडी के लक्षणों का कुछ प्रभाव देखा जा सकता है। यानी कि उम्र के साथ एडीएचडी के लक्षणों में सुधार तो होता है लेकिन यह पूरी तरह से समाप्त नहीं होता।
जिन व्यक्तियों में एडीएचडी के लक्षण होते हैं, उनमे और भी जटिलताएं देखने को मिल सकती है। ऐसे बच्चों को सोने में परेशानी होती है और ये एंग्जाइटी के भी शिकार पाए जाते हैं।
ऐसे बच्चे किसी विषय पर देर तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं, जल्द आवेग में आ जाते हैं और इनमें अति क्रियाशीलता के लक्षण पाए जाते हैं।
इन बच्चों में स्कूल में पढाई के वक्त ध्यान केन्द्रित करने में मुश्किल आती है। यह समस्या उसके व्यहार को भी प्रभावित करेगी। उसे कहीं एक जगह बैठ के काम करने में दिक्कत होती है। किसी काम को शुरू करते ही बोर हो जाएगा।
लापरवाही या इनअटेन्टिव
अतिक्रिया शीलता यानी Hyperactivity
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आवेग में आ कर काम करना यानी Impulsivity भी देखने को मिलती है।
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रखें इन बातों का ध्यान