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चूहों से दुनियाभर में फैलीं ये खतरनाक बीमारियां, करोड़ों की गई जान- जानें हर आउटब्रेक की कहानी डिटेल में

चूहे सिर्फ घर का सामान ही खराब नहीं करते, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं। इनके जरिए फैलने वाले संक्रमणों ने दुनियाभर में करोड़ों लोगों की जान ली है।

Written By Anju Rawat
Updated : May 12, 2026 6:11 PM IST

disease cause by rats (image source: ChatGPT)

हाल के दिनों में एक क्रूज शिप से जुड़े हंटावायरस के मामलों और मौतों ने दुनियाभर में चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, यह वायरस संक्रमित चूहों के मल, पेशाब और लार के संपर्क में आने से इंसानों तक पहुंचता है। लेकिन, हंटावायरस कोई पहली ऐसी बीमारी नहीं है, जो चूहों की वजह से होती है। इतिहास में कई बार चूहों से जुड़े संक्रमणों ने बड़े स्तर पर तबाही मचाई है। कभी ब्लैक डेथ जैसी महामारी ने करोड़ों लोगों की जान ली, तो कभी लासा फीवर और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों ने अलग-अलग देशों में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा किया। यही वजह है कि rodent-borne diseases (चूहों से होने वाली बीमारियां) आज भी दुनिया के लिए एक बड़ा पब्लिक हेल्थ कंसर्न माना जाता है। आइए जानते हैं चूहों से जुड़ी ऐसी ही खतरनाक बीमारियों और उनके बड़े आउटब्रेक के बारे में-

Image source: ChatGPT

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1. हंटावायरस

हंटावायरस एक जूनोटिक वायरस है, जो कृन्तकों (वे जानवर, जिनके आगे के दांत लगातार बढ़ते रहते हैं जैसे- चूहे, गिलहरी) को संक्रमित करते हैं और फिर इंसानों में फैलता है। यह वायरस बेहद गंभीर होता है, इंसानों में यह वायरस मौत का कारण बन सकता है। CDC के अनुसार, अमेरिका में हंटावायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं, इसमें फेफड़े और हृदय बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं। वहीं, यूरोप और एशिया में हंटावायरस रीनल सिंड्रोम के मामले ज्यादा दर्ज होते हैं, यह बीमारी किडनी और रक्त वाहिकाओं को ज्यादा प्रभावित करती है।

कब और कहां हुए आउटब्रेक?

साल 1993 में अमेरिका में हंटावायरस का पहला आउटब्रेक हुआ था। इसके बाद भी, अलग-अलग देशों में हंटावायरस के मामले सामने आते रहते थे। अभी तक अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप और एशिया में हंटावायरस के अलग-अलग प्रकार मिलते रहे हैं। मई 2026 में एक अंतरराष्ट्रीय क्रूज शिप MV Hondius पर भी इसके मामले सामने आए, जिसमें कई मौतें भी हुईं।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, एशिया और यूरोप में हंटावायरस की मृत्यु दर 1 से 15 फीसदी तक है। जबकि, अमेरिका में हंटावायरस से काफी ज्यादा मौतें (50 फीसदी) होती हैं। अनुमान है कि इस वायरस से हर साल एक लाख से ज्यादा लोग संक्रमित होते हैं। इसमें सबसे ज्यादा मामले एशिया और यूरोप में दर्ज किए जाते हैं।

यह वायरस चूहों के मल, पेशाब या लार के संपर्क में आने से फैलता है। यह वायरस फेफड़ों और किडनी को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। कई मामलों में यह वायरस जानलेवा साबित होता है।

Image Source: ChatGPT

2. ब्लैक डेथ

ब्लैक डेथ येरसिनिया पेस्टिस (Yersinia pestis) बैक्टीरिया से होने वाली एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, इसे प्लेग भी कहा जाता है। यह भी चूहों के जरिए फैलने वाली एक बीमारी है। ब्लैक डेथ को इतिहास की सबसे घातक महामारियों में से एक माना जाता है। यह संक्रमण चूहों के पिस्सुओं के जरिए इंसानों में फैलता है। इस बीमारी से संक्रमित लोगों में आमतौर पर 1 से 7 दिनों के भीतर लक्षण महसूस होना शुरू हो जाते हैं। इसमें अचानक बुखार आना, ठंड लगना, सिर और शरीर में दर्द, कमजोरी, उल्टी और मतली आदि शामिल हैं। गंभीर मामलों में फेफड़ों और खून में संक्रमण हो सकता है।

कब और कहां हुए आउटब्रेक?

इस बीमारी ने 1347 से लेकर 1351 (14वीं शताब्दी) में कोहराम मचा दिया था। शुरुआत में यह बीमारी सेंट्रल एशिया और चीन के कुछ क्षेत्रों में फैली थी। इसके बाद इस बीमारी ने यूरोप, इटली, फ्रांस और इंग्लैंड समेत कई देशों में अपने पैर पसार दिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इस बीमारी की वजह से यूरोप की लगभग 30 से 60 फीसदी आबादी खत्म हो गई थी। यानी ब्लैक डेथ से करोड़ों लोग ने अपनी जान गंवाई।

इसके बाद, 19वीं और 20वीं शताब्दी में ब्लैक डेथ महामारी ने अपना प्रकोप दिखाया। उस समय पर भारत, चीन, अफ्रीका और अमेरिका में ब्लैक डेथ के सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे। 1896 से 1920 के बीच में पश्चिमी भारत और मुंबई में ब्लैक डेथ के बड़े आउटब्रेक सामने आए थे। वर्तमान में इस बीमारी से सबसे ज्यादा डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, मेडागास्कर और पेरू प्रभावित हैं।

आपको बता दें कि प्लेग सीधे हवा से नहीं फैलती है। जब चूहे, प्लेग बैक्टीरिया से संक्रमित हो जाते हैं और पिस्सू (बिना पंख वाले कीड़े) चूहे का खून चूसते हैं। फिर जब ये पिस्सू इंसानों को काटते हैं, तो यह बैक्टीरिया इंसानों के शरीर में चला जाता है और वे संक्रमित हो जाते हैं।

3. लेप्टोस्पायरोसिस

लेप्टोस्पायरोसिस एक जूनोटिक (जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाला) बैक्टीरिया संक्रमण है, जो लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया के कारण होता है। बाढ़ या भारी बारिश के बाद इस बीमारी के मामले ज्यादा सामने आते हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, आंखों में लालिमा और किडनी-लिवर डैमेज इस बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।

कब और कहां हुए आउटब्रेक?

लेप्टोस्पायरोसिस की पहचान साल 1886 में जर्मनी में हुई थी। लेकिन, इसके बाद 1907 से 1915 के बीच में वैज्ञानिकों ने लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया को अलग-अलग देशों में आडेंटिफाइ किया। इसस पता चला कि यह बीमारी जानवरों से फैलती है, खासकर चूहों से। 20वीं शताब्दी तक आते-आते यह बीमारी दुनियाभर के कई देशों जैसे- भारत, श्रीलंका, ब्राजील और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैल गई। बारिश के मौसम और गंदगी वाले इलाकों में इसका खतरा ज्यादा रहता है। भारत में लेप्टोस्पायरोसिस के सबसे ज्यादा मामले केरल, महाराष्ट्र, असम और तमिल नाडु में दर्ज हुए थे। अगर हाल ही की बात करें, तो इस बीमारी के केरल में मामले दर्ज होते हैं।

Microbiologyjournal के अनुसार, लेप्टोस्पायरोसिस केरल के ज्यादातर हिस्सों में बेहद आम बीमारी है। यह बीमारी काम से भी जुड़ी हुई है, क्योंकि ऑयस्टर शेल (सीप/घोंघे के खोल) इकट्ठा करने वाले लोगों में 82 फीसदी तक आम है। वहीं, बारिश के मौसम में इस बीमारी में 74 फीसदी तक बढ़ोतरी देखी गई है। साल 2018 में केरल में आई बाढ़ के बाद लेप्टोस्पायरोसिस का एक बड़ा प्रकोप हुआ, जिसमें लगभग 70 लोगों की मौत हो गई।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लेप्टोस्पाइरोसिस एक जीवाणु रोग है जो मनुष्यों और जानवरों दोनों को प्रभावित करता है। यह संक्रमित चूहों या अन्य जानवरों के मूत्र के सीधे संपर्क में आने फैलता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है, लेकिन यह बेहद दुर्लभ है। यह संक्रमित चूहों के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैलता है।

Image Source: ChatGPT

4. लासा बुखार

लासा बुखार पश्चिमी अफ्रीका में चूहों से फैलने वाला एक गंभीर और वायरल रक्तस्रावी रोग है। तेज बुखार, सिरदर्द, थकान और उल्टी आदि इसके आम लक्षण माने जाते हैं। लेकिन, गंभीर मामलों में ब्लीडिंग और ऑर्गन फेल हो सकते हैं। इस संक्रमण के 2-21 दिन बाद लक्षण सामने आते हैं। हालांकि, 80 फीसदी मामलों में लक्षण हल्के होते हैं। कुछ मामलों में लासा बुखार जानलेवा भी हो सकता है। वैसे तो लासा बुखार से पीड़ित अधिकांश लोगों में हल्के लक्षण होते हैं। लेकिन, गंभीर मामलों में यह जानलेवा हो सकता है। लगभग 80 फीसदी लोगों में इसके हल्के लक्षण महसूस होते हैं। वहीं, 5 में से 1 व्यक्ति में यह बीमारी गंभीर हो सकती है। इस बीमारी से पीड़ित 15 फीसदी लोग अपनी जान गंवा देते हैं।

कब और कहां हुए आउटब्रेक?

CDC के अनुसार, यह बीमारी मुख्य रूप से पश्चिम अफ्रीका में पाई जाती है। खासकर Nigeria, Liberia और Sierra Leone में इसके हजारों मामले सामने आते हैं। लासा बुखार पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में पाए जाने वाले एक चूहे से फैलने वाला एक वायरल रोग है। इसके पहले केस की पहचान 1969 में Nigeria के Lassa town में पहली बार हुई थी। इसलिए इसका नाम भी Lassa Fever पड़ा। बाद में इस बीमारी के मामले यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड स्टेट्स और जर्मनी में भी दर्ज किए गए।

आपको बता दें कि यह बीमारी Mastomys नामक चूहों से फैलती है। इनके मल-मूत्र के संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है। इसके अलावा, यह संक्रमित चूहों के लार, मूत्र या मल के संपर्क में आने से फैलता है। इतना ही नहीं, यह बुखार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी आसानी से फैल सकता है।

5. साल्मोनेलोसिस

साल्मोनेला एक बैक्टीरिया है, जो फूड प्वाइजनिंग और दस्त रोग का कारण बन सकता है। WHO के अनुसार, यह दुनिया में डायरिया फैलाने वाले 4 बड़े कारणों में शामिल है। यह आंतों को संक्रमित करता है और शरीर में टॉक्सिंस जमा करता है। बार-बार दस्त लगना, बुखार, पेट में ऐंठन और उल्टी आदि इसके लक्षण हो सकते हैं। आमतौर पर यह कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। संक्रमण की चपेट में आने के 7 से 72 घंटे बाद लक्षण नजर आ सकते हैं। यह बीमारी लगभग 2–7 दिन तक रह सकती है।

कब और कहां हुए आउटब्रेक?

साल्मोनेलोसिस बैक्टीरिया की सबसे पहली बार साल 1885 में अमेरिका में पहचान हुई थी। हालांकि, इस बैक्टीरिया का पहला मामला कब दर्ज हुआ, इसकी जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट में उपलब्ध नहीं है। WHO के अनुसार, हर साल लगभग 55 करोड़ लोग दूषित भोजन खाने से बीमार पड़ते हैं। इसमें लगभग 22 करोड़ बच्चे शामिल होते हैं। 1980से 1990 के बीच में यूएसए में बड़े आउटब्रेक आए, लेकिन इन्हें अंडा और मीट से जोड़ा गया।

यह बीमारी भी चूहों से फैलती है। यह संक्रमित चूहे के मल और पेशाब के संपर्क में आने से स्वस्थ व्यक्ति में फैल सकता है। लेकिन, यह सिर्फ चूहों तक सीमित बीमारी नहीं है। यह दूषित खाना खाने से भी फैलती है। खासकर, अंडा, चिकन, मांस, दूषित सब्जियां और दूध इसके मुख्य कारण माने जाते हैं।

Disclaimer: लेख में आपने चूहों ने होने वाली बीमारियों के बारे में पढ़ा। चूहों ने दुनियाभर में कई तरह की बीमारियां फैलाई हैं और हो सकता है कि भविष्य में भी कई लोग चूहों की वजह से होने वाली बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। इसलिए, चूहों से सतर्कता बहुत जरूरी है। इन बीमारियों से बचाव के लिए सफाई बहुत जरूरी होती है। वहीं, अगर शरीर में कोई भी लक्षण महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।