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Written By: Shabnam Khan | Updated : January 4, 2017 8:12 PM IST
ऽ भारतीय लोग आनुवांषिक तौर पर घुटने की आर्थराइटिस से अधिक ग्रस्त होते हैं। इसके अलावा सांस्कृतिक रीति रिवाजों के कारण भारतीय लोगों के घुटनों का बहुत इस्तेमाल होता है जिससे घुटने की आर्थराइटिस का खतरा बढ़ता है।
बढ़ती उम्र में अर्थराइटिस यानी गठिया रोग का खतरा बढ़ जाता है। इस बीमारी का मुख्य कारण शरीर में यूरिक एसिड की अधिकता होना होता है। जब यूरिक एसिड शरीर में अधिक हो जाता है तो वह शरीर के जोड़ो में छोटे-छोटे क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है इसी कारण जोड़ो में दर्द और ऐंठन होती है। इस बीमारी में जोड़ों में गांठें बन जाती हैं और उसमें दर्द होता है, इसलिए इसे गठिया कहते हैं। अर्थराइटिस कई प्रकार का होता है। रूमेटाइड अर्थराइटिस, गाउट, सिरॉइसिस अर्थराइटिस (Psoriatic arthritis), ऑस्टियोअर्थराइटिस इनमें से प्रमुख हैं। सभी में शरीर के अलग-अलग जोड़ों में दरेद होता है। (इसे भी पढ़ें, दादी माँ के नुस्ख़े #4: घरेलु उपायों से गठिया के दर्द से राहत पायें)
लेकिन जोड़ों में दर्द हमेशा अर्थराइटिस नहीं होता। कई बार जोड़ों को अधिक दबाव पड़ने या किसी अंदरूनी चोट के कारण भी ऐसा दर्द हो सकता है। तो फिर आप अर्थराइटिस के दर्द की पहचान किस तरह करेंगे? हम आपको कुछ ऐसे लक्षण बता रहे हैं जो अर्थराइटिस में दिखते हैं। इससे आपको इस बीमारी की पहचान करन में आसानी होगी, और आप डॉक्टर के पास आगे के उपचार के लिए समय से पहुंच पाएंगे।
अर्थराइटिस के लक्षण
अगर आपको ये सभी या इनमें से कुछ लक्षण दिखते हैं तो आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए, अर्थराइटिस का जल्दी पता चल जाने पर उसका उपचार आसान हो जाता है।
चित्र स्रोत – Getty Images
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