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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:41 AM IST
अगर आपको सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या बेचैनी हो रही हो तो डॉक्टर से सम्पर्क करना और टेस्ट कराना ही सबसे अच्छा तरीका होगा और अगर डॉक्टर दिल की किसी बीमारी के बारे में बताता है तो आपको एंजियोग्राफी कराने की सलाह दी जा सकती है। लेकिन बहुत से लोगों को पता नहीं कि एंजियोग्राफी में क्या होता है। हमने एशियन हार्ट इंस्टिट्यूट, प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी एंड रिहैबिलेशन डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. निलेश गौतम से जानने की कोशिश की कि जब किसी व्यक्ति को एंजियोग्राफी करानी हो तो उसे किन बातों के लिए तैयार रहना चाहिए।
1. ज़्यादातर लोग यह सवाल पूछते हैं कि एंजियोग्राफी से पहले उन्हें किस प्रकार की दवाइयों का सेवन रोक देना चाहिए। तो अगर आप डायबिटीज़ की कोई दवा खाते हैं तो आपको एंजियोग्राफी वाले दिन उन्हें नहीं खाना चाहिए। लेकिन अगर आप खून को पतला करने की कोई दवा काते हैं तो उन्हें खाते रहें।
2. अगर आपकी एंजियोग्राफी होनी है तो आपको दो घंटे पहले से कुछ भी नहीं खाना है। इसलिए एंजियोग्राफी वाले दिन सुबह हल्का नाश्ता करें।
3. आमतौर पर एंजियोंग्राफी में 15 – 20 मिनट का समय लगता है क्योंकि इस प्रक्रिया में केवल इस बात का पता लगाया जाता है कि कहीं दिल में किसी प्रकार की गांठ तो नहीं जो रक्त के प्रवाह में रूकावट डाल रही हो। इसलिए इन बातों का पता लगने से आप आगे की जांच और प्रक्रिया के लिए तैयार रह सकेंगे।
4. एंजियोग्राफी के दौरान आपको कोई लोकल एनस्थिसिया दिया जाता है। इसका मतलब है कि मरीज़ को पता होता है कि उसके आसपास क्या हो रहा है। जबकि सामान्य एनस्थिसिया में मरीज़ को पता नहीं चलता कि उसके साथ क्या हो रहा है। इसलिए तब तक डॉक्टर से एंजियोग्राय़फी के लिए न कहें जब तक कि आप पूरी तरह तैयार न हों।
5. एक बार एंजियोग्राफी हो जाने के बाद अगर डॉक्टर एंजियोप्लास्टी करने की बात कहे तो उसी दिन करा लेना ठीक होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आपके दिल में दोनों बार ट्यूब डाली जाती है और एंजियोप्लास्टी के समय इस ट्यूब में से केवल एक वायर गुज़ारा जाता है।
6. अगर किसी कारणवश, मरीज़ या उसके परिवार का कोई सदस्य इस प्रक्रिया से मना कर दे तो ट्यूब निकाल दी जाती है और मरीज़ को घर भेज दिया जाता है। मरीज़ को बाद में बुलाया जाता है और फिर एक बार ट्यूब डाली जाती है, जिसका मतलब है कि मरीज़ को उसी प्रक्रिया से दोबारा गुज़रना पड़ता है।
7. अगर एंजियोग्राफी हाथों से की जाती है तो मरीज़ दो घंटों के भीतर घर जा सकता है। आजकल इसी पद्धति का इस्तेमाल ज़्यादा किया जाता है, जबकि पहले ट्यूब को ग्रॉइन की मदद से डाला जाता था। लेकिन ग्रॉइन से ट्यूब डाली जाने पर मरीज़ को 6-8 घंटे तक अस्पताल में ही रहना होता है।
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अनुवादक -Sadhna Tiwari
चित्र स्रोत- Shutterstock