Advertisement

क्या टीबी या तपेदिक ठीक हो सकता है?

जैसे ही आपको टीबी के शुरुवाती लक्षण दिखें बिना देरी किये इलाज शुरू करवाएं!

टीबी के मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है और इसके शिकार हर उम्र के लोग होते हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा लोग इसी बीमारी के कारण मरते हैं। खासतौर पर भारत जैसे देश में बच्चों में यह समस्या तेजी से फ़ैल रही है। हालांकि इसका यह भी कारण बताया जाता है कि हमारे देश में इस बीमारी को लेकर लोगों में जानकारी की कमी है और गलत जानकारी की वजह से वे समय रहते इसका इलाज नहीं करवा पाते हैं। कुछ लोगों को ऐसा भी लगता है कि टीबी एक लाइलाज जानलेवा बीमारी है जबकि ऐसा नहीं है। टीबी से ही जुड़ी कुछ ख़ास बातों के बारे में हमने मुंबई स्थित टीबी हॉस्पिटल के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. ललित आनंदे से बातचीत की।

उन्होंने बताया कि कि अगर सही समय पर इस बीमारी का पता चल जाये तो इसका इलाज संभव है। अगर आपका टीबी का टेस्ट पॉजिटिव आया है तो बिना देरी किये हुए डॉक्टर के पास जायें और वे जो ट्रीटमेंट और दवाइयां बताएं उस कोर्स को पूरा करें। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आपने  दवाइयां बीच में खाना बंद कर दिया तो ये बैक्टीरिया उस दवा के प्रभाव को निष्क्रिय करने लगता है। फिर ऐसे मामले में आपको और ज्यादा पावरफुल दवाइयों का सेवन करना पड़ेगा। इसलिए जितनी जल्दी हो सके दवाइयों का सेवन शुरू करें और बीच में कभी भी न छोड़ें। टीबी के मरीजों को अपने खानपान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए

ट्यूबरक्लोसिस में किसी भी तरह की कोई स्टेज नहीं होती है इसलिए आप जितना लेट करेंगें आपकी स्थिति उतनी ही खराब होती जायेगी। पल्मोनेरी टीबी के केस में आपके फेफड़े काफी तेजी से ख़राब होने लगते हैं। इसलिए शुरुवाती लक्षण दिखते ही इनका इलाज शुरू कर देना चाहिए। अगर आपने सही समय पर इसका इलाज नहीं किया तो ये बैक्टीरिया शरीर के बाकी अंगों को भी प्रभावित करने लगता है।

Also Read

More News

पल्मोनरी टीबी (Pulmonary TB) के लगभग 90% मामलों में बैक्टीरिया शरीर के अन्य हिस्सों जैसे कि ब्रेन, आँतों में फैलने लगते हैं। तेजी से वजन कम होना, बुखार आना, शरीर में बहुत कमजोरी होना ही टीबी के प्रमुख लक्षण है और यह इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है कि यह बीमारी शरीर के किस अंग में है। जैसे कि अगर किसी के इन्टेस्टनल लाइनिंग में ये बैक्टीरिया फ़ैल चुके हैं तो उसे पेट में तेज दर्द होने के साथ कब्ज़ की शिकायत भी होने लगती है। इसी तरह अगर ये बैक्टीरिया दिमाग तक पहुँच गये हैं तो शरीर में ऐठन या मरोड़ की शिकायत होने लगती है। इसके अलावा टीबी के बैक्टीरिया आपके जननांगो और स्किन को भी प्रभावित करने लगते हैं। इसलिए कोई भी शुरुवाती लक्षण दिखे तो बिना देरी किये डॉक्टर से अपनी जांच करवाएं।

Read this in English

अनुवादक: Anoop Singh

चित्र स्रोत: Shutterstock

Total Wellness is now just a click away.

Follow us on