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पढ़ना एक सुखद आदत है जो आपके दिमाग की क्षमता बढ़ाती है और याददाश्त भी बढ़ाती है। इसी कारण विशेषज्ञ, आजकल के माता-पिता को सलाह देते हैं कि वे अपने बच्चों को 6 माह की छोटी उम्र से ही किताबों से परिचित कराये, पर मुख्य बात यह है कि आप क्या और कैसे पढ़े जो आपके मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए अच्छा हो। जैसे आप रात को सोने से पहले पढ़ते हैं। दिन में पढ़ने के बजाय रात में पढ़ना आपके मूड और सोने की आदतों को कई तरीको से प्रभावित कर सकता है। आइये जानते हैं रात में पढने से हम पर क्या क्या प्रभाव पड़ सकता है।
इलेक्ट्रानिक डिवाइस/गैजेटस पर पढ़ना
टेक्नोलाजी की सहायता से पढ़ना ज्यादा आसान हो गया है आपको जानकारी या टाइम पास के लिए पढ़ने के 1000 पेजों की किताब को ढोना नहीं पड़ता। सब कुछ डिजिटल फार्मेट में आपके ई-बुक, स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटाप में आ जाता है। जहाँ इसे पढ़ने के लिए मात्र एक क्लिक की जरूरत होती है, वहीँ यह आपकी सेहत को कई तरीकों से ख़राब भी करता है। इन गैजेट्स पर रात के समय पढ़ना और ज्यादा नुकसान पहुचाता है। यह केवल आपकी आँखों को नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि यह आपकी दिनचर्या को भी प्रभावित करता है। आप देर से सोते हैं और अगली सुबह कम उर्जावान महसूस करते हैं। टेक्सास युनिवर्सिटी के साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर के अध्ययन के अनुसार रात के समय प्रकाश उत्सर्जित करने वाले डिवाइस पर ई-बुक पढ़ने से मिलेटानिन नामक हार्मोन, जो स्वाभाविक तरीके से सोने में मदद करता है कम मात्रा में निकलता है। इसका एक कारण यह है कि इन डिवाइस से निकलने वाली शार्ट-वेबलेंथ की किरणे रात में एक बार अलर्ट करती हैं जो आपके बायोलाजिकल क्लाक को ख़राब कर देती है।
लेकिन अगर आप किताबें रात में ही पढ़ना चाहते हैं और वो कम उत्सर्जन वाली स्क्रीन का चुनाव करते हैं फिर भी यह फायदेमंद नहीं साबित होगा। शायद आपने नए आधुनिक जमाने की की ई-लिंक स्क्रीन के बारे में सुना हो जो उत्सर्जन नहीं करती हैं। लेकिन आप इन उत्सर्जन न करने वाली डिवाइस को लेने की जल्दी न करें क्योंकि आप्थेलैयिक और साइकोलॉजिकल आप्टिक्स को 2012 की रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार एल सी डी और ई-लिंक स्क्रीन पर रात में पढ़ते समय आँखो पर समान प्रभाव पड़ता है।
किताबें पढ़ना:- जो अध्ययन रात में इलेक्ट्रानिक डिवाइस पर कम पढ़ने की सलाह को देता है, उसी के अनुसार किताबे पढ़ने से आपकी आँख, दिमाग और नींद पर बिलकुल उल्टा असर पड़ता है। किताबें पढ़ने से तनाव कम होता है, कल्पना शक्ति बढ़ती है, आप कम अलर्ट रहते हैं जो आपको आराम देता है और शांतिपूर्वक सोने में मदद करता है। अगर आपको समझ में नहीं आता की क्या पढ़ें तो आप कुछ भी पढ़ सकते हैं बस उत्तेजक न हों।
अखबार पढ़ना:- हम सब लोग बचपन से ही अखबार को सुबह पढ़ते आये हैं। वैसे भी देखा जाए तो अखबार को सुबह ही पढ़ना चाहिए लेकिन रात में भी अख़बार पढ़ने में कोई खराबी नहीं है बस ऐसे खबरें नहीं पढ़ना चाहिए जो आपकी नींद ख़राब करें। हल्की-फुल्की, प्रेरणास्पद और रोचक ख़बरें आपको आराम देती हैं तथा अच्छी नींद आती है।
मूल स्रोत - Is night time reading ruining your health?
अनुवादक – Anoop Singh
चित्र स्रोत - Shutterstock
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