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उल्टी व उबकाई दूर करे शहद-लौंग, जानिये कैसे

सर्दियों में कई बार ज्‍यादा खाने पर उबकाई आने लगती है, इससे बचने के लिए ये नुस्‍खा ज़रूर ट्राई करें!

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:22 AM IST

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अनुवादक – Usman Khan

शरीर में कमजोरी और स्‍वास्‍थ्‍य में किसी तरह की गड़बड़ी मतली या उबकाई का कारण बन सकती है। मतली उल्टी का एक एहसास है। जब किसी को मतली का एहसास होता है, तब उसके दिल की धड़कन बढ़ जाती है, पसीना आने लगता है, मुंह से लार निकलने लगती है और पेट में गड़बड़ी महसूस होने लगती है। नींद पूरी नहीं होना भी इसका एक कारण हो सकता है। हालांकि बैक्‍टीरिया के कारण अपच की समस्‍या ही इसका सबसे प्रमुख कारण है। 'ऑल अबाउट हर्बल रेमेडीज' के लेखक डॉक्‍टर गिरिजा खन्‍ना के अनुसार, ये ज़रूरी नहीं है कि उबकाई आने पर दवाईयों का ही सहारा लिया जाए। एक घरेलू नुस्‍खे के द्वारा भी इस समस्‍या से निपटा जा सकता है। ये नुस्‍खा है लौंग और शहद का मिश्रण। डॉक्‍टर के अनुसार, इस मिश्रण को खाने से मतली में आराम मिलता है। पढ़ें- मतली और उल्टी होने के 9 कारणों के बारे में जाने।

लौंग और शहद 

मतली से निपटने के लिए लौंग पाउडर और शहद के मिश्रण को लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। लौंग में केवल एंटी-इन्फ्लैमेटरी (anti-inflammatory) तत्‍व ही नहीं होते, बल्कि इसे नेचुरल ऐनिस्थेटिक (anaesthetic) के रूप में भी जाना जाता है, जो पेट के अंदरूनी हिस्से को सुन्न कर देता है। इससे उल्‍टी रोकने में भी मदद मिलती है। दूसरी ओर शहद के एंटीबैक्टिरियल गुण पेट में गड़बड़ी के लिए जिम्‍मेदार बैक्टिरिया से लड़ने में मदद करते हैं और पाचन तंत्र को सही रखते हैं।

इसका इस्‍तेमाल कैसे करें

  • 4 से 5 लौंग को भून लें।
  • उसके बाद उसका पाउडर बना लें।
  • एक चुटकी पाउडर लें और उसमें एक चम्‍मच शहद मिला दें।
  • उबकाई आने पर इस मिश्रण को चाट लें। इससे आराम मिलेगा।
  • गर्भवती महिलाएं भी इस नुस्‍खे का उपयोग कर सकती हैं।

चित्र स्रोत - Shutterstock

संदर्भ: 

  • Bhowmik, D., Kumar, K. S., Yadav, A., Srivastava, S., Paswan, S., & Dutta, A. S. (2012). Recent trends in Indian traditional herbs Syzygium aromaticum and its health benefits.Journal of Pharmacognosy and Phytochemistry,1(1), 6-17.
  • Milind, P., & Deepa, K. (2011). Clove: a champion spice.Int J Res Ayurveda Pharm,2, 47-54.