मिर्गी के रोगी से जुड़े 8 मिथक

क्या मिर्गी के रोगी शादी के लिए अयोग्‍य होते हैं?

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:13 AM IST

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मिर्गी एक खतरनाक बीमारी है। इसमें रोगी को दौरा पड़ता है शरीर अकड़ जाता है और मुंह से झाग आने लगता है। हालांकि इस बीमारी को लेकर लोगों के बीच अलग-अगल धारणाएं बनी हुई हैं। कुछ लोग इस बीमारी को भूत-प्रेत का साया तक मानते हैं। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कुछ लोग मिर्गी के मरीज को डॉक्‍टर के पास ले जाने की बजाय बाबाओं के पास ले जाना उचित समझते हैं। इसके पीछे उनका मत होता है कि मरीज पर किसी राक्षस या चुड़ैल का साया है। इतना ही नहीं कुछ लोग मिर्गी के मरीज को पागल तक करार देते हैं। कई बार देखा गया है कि लोग मिर्गी के मरीज को दौरा पड़ने के वक्‍त जूता या चप्‍पल सुंघाने लगते हैं। दरअसल ऐसे ही कई मिथक इस बीमारी से जुड़े हैं। आइए जानते हैं कि क्‍या हैं वो मिथक। पढ़ें- मिर्गी के मरीजों के लिए पेट के बल सोना आकस्मिक मौत का बढ़ाता है खतरा

मिथक 1

मिर्गी से पीड़ित लोग मानसिक रूप से कमजोर होते हैं। 

क्‍या है सच्‍चाई- मिर्गी दिमाग के असंतुलन होने के कारण होती है। इसमें तंत्रिका कोशिकाएं कुछ समय के लिए प्रभावित हो जाती हैं जिससे मरीज की भावना, उत्‍तेजना और व्‍यवहार बदल जाता है। कुछ मामलों में मरीज अपने दिमाग का संतुलन भी खो बैठता है। हालांकि दिमाग और शरीर के अन्‍य हिस्‍से सामान्‍य रहते हैं। मेन्टल रीटार्डेशन के साथ कुछ लोगों को मिर्गी का दौरा पड़ सकता है लेकिन मिर्गी का रोगी को कभी मेन्टल रीटार्डेशन नहीं हो सकता और ना ही उसका आईक्‍यू कम हो सकता है।

मिथक 2

मिर्गी के सभी मामलों में रोगी का शरीर ऐंठ जाता है। 

क्‍या है सच्‍चाई- मिर्गी के दौरे के कई प्रकार होते हैं। कुछ मामलों में रोगी की संवेदनाएं बदल जाती हैं, कुछ मामलों में रोगी दोहरा काम करते हैं, कुछ मामलों में औरस (auras) का अनुभव हो सकता है। हालांकि मिर्गी के कई मामलों में रोगी के शरीर में ऐंठन हो जाना सामान्‍य है लेकिन सभी में नहीं।

मिथक 3

मिर्गी आनुवांशिक बीमारी है। 

क्‍या है सच्‍चाई- हालांकि मिर्गी का कारण आनुवांशिक नहीं है। नर्व सेल को प्रभावित करने वाले सभी कारक, असामान्य मस्तिष्क विकास, बीमारी या क्षति मिर्गी का कारण बन सकती है। इनके अलावा ब्रेन ट्यूमर, दिमागी बुखार, बुखार, अल्जाइमर रोग, सिर की चोटों और यहां तक कि शराब के अन्य संक्रमण भी इसके होने के कारण बन सकते हैं।

मिथक 4

मिर्गी का दौरा किसी भी समय आ सकता है। 

क्‍या है सच्‍चाई- नींद की कमी, चमकती रोशनी, तनाव, शराब, मासिक धर्म के दौरान हार्मोनल परिवर्तन, धूम्रपान आदि जैसे कारण मिर्गी के हमलों को तेज कर सकते हैं। पढ़ें- ऑटिस्टिक बच्चों के सही तरह से देखभाल करने के 6 टिप्स

मिथक 5

मिर्गी का रोगी दूसरे लोगों पर निर्भर हो जाता है। 

क्‍या है सच्‍चाई- मिर्गी के रोगी उचित इलाज और सावधानियों के साथ एक सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं। उनके परिवार और दोस्तों को उनकी हालत को समझने की जरूरत है और उन्‍हें पता होता है कि वों मरीज की आपात स्थिति में कैसे मदद कर सकते हैं।

मिथक 6

मिर्गी का दौरा पड़ते समय रोगी को जोर से पकड़ लेना चाहिए। 

क्‍या है सच्‍चाई - मिर्गी के रोगी को कभी दबाना नहीं चाहिए। उसके आसपास से खतरनाक वस्‍तु हटा देनी चाहिए। उसके मुंह को सीधा रखना चाहिए। उसके कपड़ों को ढीला कर देना चाहिए। अगर उसने चश्‍मा पहना है तो उसे हटा दें। उसके मुंह में कुछ भी डालने का प्रयास ना करें। आम तौर पर मिर्गी का दौरा 5 मिनट तक रहता है। अगर इससे अधिक रहता है तो उसे तुरंत अस्‍पताल ले जाएं।

मिथक 7

मिर्गी के रोगी शादी के लिए अयोग्‍य होते हैं। 

क्‍या है सच्‍चाई- भारत में महिलाओं के मामले में ये धारणा गलत है। उचित उपचार के साथ रोगी एक सामान्‍य जीवन जी सकते हैं। हालांकि इस  धारणा को शिक्षा और जागरुकता के माध्‍यम से रोका जा सकता है।

मिथक 8

मिर्गी से पीड़ित महिलाओं के बच्चे नहीं हो सकते। 

क्‍या है सच्‍चाई- मिर्गी या मिर्गी विरोधी दवाएं प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं कर सकती हैं। यहाँ तक कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं डॉक्टर की देखरेख में अपनी दवाई ले सकती हैं।

मूल स्रोत -Top myths about epilepsy busted

अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock


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