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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन (डब्ल्यूएचओ) ने ये घोषित किया है कि प्रोसेस्ड मीट कोलोरेक्टल कैंसर का एक बड़ा कारण है। भारत में कोलोरेक्टल या कोलोन कैंसर के मामलों में इज़ाफा हुआ है। ये जानलेवा बीमारी 50 साल के बाद अधिकतर होती है। इस बीमारी का आनुवांशिकता से गहरा संबंध है लेकिन, खराब खानपान भी इसका एक कारण है।स्वस्थ खानपान और जीवनशैली अधिकतर बीमारियों को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। विटामिन डी कोलोन कैंसर को दूर रखने में मददगार होता है, इसलिए केसर का इस्तेमाल फायदेमंद है।
अध्ययनों में ये बात सामने आई है कि केसर में कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव करने की क्षमता होती है। केसर में पाया जाने वाला एक घटक क्रोसिन (Crocin) कोलोरेक्टल कैंसर सेल्स को नष्ट करने में मदद करता है। ये अध्ययन तीन प्रकार की कोलोन सेल्स पर हुआ था और केसर ने तीनों के लिए असर दिखाया। केसर में मौजूद नए थोसायनिन (anthocyanin), लाइकोपीन (lycopene) और कैरोटीन (carotene) में भी एंटी-ट्यूमर प्रभाव होते हैं। एक और तत्व कैरोटीनॉइड (carotenoid) अपने एंटी-ऑक्सीडेंट्स प्रभावों के कारण फ्री रैडिकल्स की सफाई करते हैं, जिससे कैंसर का जोखिम कम होता है। (इसे भी पढ़ें, कैंसर से लड़ने वाले 13 आहार के बारे में जानें)
कैसे करें केसर का इस्तेमाल
केसर बहुत महंगा होता है। इसे खुले हाथ से यानी अधिक मात्रा में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। केसर के कुछ रेशे दूध या फिर अपने डेज़र्ट में मिलाएं। इसे खुशबू और रंग के लिए स्टू और करी में भी मिलाया जा सकता है। किसी भी रेसिपी में मिलाने के लिए केसर के रेशों को पहले गर्म दूध या पानी में भिगाकर रखना चाहिए।
मूल स्रोत –Saffron milk can lower your risk of colon cancer!
अनुवादक – Shabnam Khan
चित्र स्रोत -Getty
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