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लीवर हमारे शरीर का सबसे व्यस्त रहने वाला अंग है। पाचन रस बनाने से लेकर हानिकारक जहरीले पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने तक यह 500 से अधिक काम करता है। दुर्भाग्यवश आजकल की लाइफ स्टाइल के साथ जिसमें ज्यादा जंक फ़ूड खाना, ज्यादा शराब और सिगरेट पीना, अत्यधिक तनाव और खुद से दवा लेना शामिल है, लीवर से सम्बंधित बीमारियाँ बहुत तेजी से बढ़ी हैं लेकिन कुछ ऐसे तरीकें हैं जो इन ख़राब आदतों के द्वारा आपके लीवर पर होने वाले नुकसान को कम करते हैं और साथ ही आपको सेहतमंद भी रखते हैं। यहाँ कुछ प्राकृतिक उपचार हैं जिन्हें आप इस्तेमाल कर सकते हैं।
1) आंवला - आंवला विटामिन सी का अच्छा स्रोत है। यह लीवर को ठीक रखता है, आंवले का आयुर्वेद में लीवर की बीमारियों को ठीक करने के लिए बहुत इस्तेमाल हुआ है। नई रिसर्च से पता चला है कि आंवले में लीवर को प्रोटेक्ट करने वाला गुण पाया जाता है, हालांकि इस बारे में ठीक से कुछ नहीं कहा जा सकता की यह हेपाटाइटिस को ठीक करता है या नहीं। आंवला च्यवनप्राश का प्रमुख तत्व है जो इम्युनिटी बढ़ाने, पाचन और लीवर को ठीक रखता है।
इस्तेमाल करने का तरीका - इसे कच्चा ही खाना अच्छा होता है फिर भी इसे हम सलाद या रायते में भी डालकर खा सकते हैं।
2) मुलेठी - जेठी मधु या मुलेठी का आयर्वेद में बहुत पहले से नान एल्कोहल फैटी लीवर सम्बंधित बीमारियों के उपचार के लिए हो रहा है। ऐसी बीमारियों में ट्रांस्मिनेज एंजाइम का ब्लड लेवल जिसे हम एएलटी या एएसटी कहते हैं, खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। रिसर्च के अनुसार मुलेठी इस एंजाइम के असर को कम करती है जो हमारे लीवर के लिए फायदेमंद है।
इस्तेमाल करने का तरीका - मुलेठी को पीसकर पाउडर बना लें फिर चाय बनाते समय इसे उबलते पानी में डाल दें। कुछ देर भीगने के बाद इसे पानी में अच्छी तरह मिला दें।
3) अमृथ या गुडची- अमृथ एक और जड़ी-बूटी है जिसके बारे में आयुर्वेद मानता है की इसमे अधिक दिनों तक जवान रखने वाले गुण पाए जाते हैं, यह हमारे आसपास के बगीचों में उगती है। यह लीवर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालती है और लीवर की काम करने की क्षमता को मजबूत करती है। अमृथ को लम्बे समय तक इस्तेमाल करने से कोई नुकसान नहीं होता, हालांकि आयुर्वेद डाक्टरों के अनुसार अगर मरीज के लीवर में बहुत ज्यादा टॉक्सिन है तो इसका इस्तेमाल लीवर की समस्या को बढ़ा सकता है। इसलिए डाक्टरों की सलाह के अनुसार ही इसका प्रयोग करना चाहिए।
4) हल्दी - आवश्यक एंटी-आक्सीडेंट के साथ हल्दी लीवर को ठीक रखती है। कुछ अध्ययनों के अनुसार एंटीवायरल गुणों के कारण हल्दी हेपेटाइटिस बी और सी के वायरस को रोकने में मददगार है।
इस्तेमाल करने का तरीका - रोज खाना पकाने में या दूध के साथ लें।
5) फ्लैक्ससीड(अलसी का बीज) - कुछ रिसेप्टर साईट अपने साथ हार्मोन्स को बाँध लेती हैं और इन हार्मोन्स को खून में पहुँचाती रहती हैं जिसके कारण इन हार्मोन्स को अलग करने के लिए लीवर को ज्यादा काम करना पड़ता है। अध्ययन के अनुसार फ्लैक्सीड में पाया जाने वाला सायटोकान्स्टीटयूट, रिसेप्टर साइट्स को हार्मोन्स बाँधने से रोकता है, जिससे लीवर का बोझ हल्का होता है।
इस्तेमाल करने का तरीका - फ्लैक्सीसीड्स को साबुत ही टोस्ट या सलाद में मिलाकर खायें।
6) सब्जियाँ - कुछ सब्जियों में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो लीवर में महत्वपूर्ण एंजाइम को बढ़ाने में मदद करते हैं, चुकंदर, पत्तागोभी, गाजर,प्याज और लहसुन जैसी सब्जियाँ कैंसर रोधी होती हैं। ब्रोकली, प्याज और लहसुन शरीर को सल्फर देते हैं जो लीवर के डीटाक्सिफिकेशन रिएक्सन में मदद करता है।
मूल स्रोत - 6 effective home remedies for a healthy liver
अनुवादक – Anoop Singh
चित्र स्रोत - Shutterstock
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