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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:12 AM IST
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अगर आप डाइबीटिक हैं तो ब्लड-शुगर लेवल को नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से ब्लड-शुगर टेस्ट करवाते रहें। क्योंकि डायबिटीज़ मरीजों का अगर ब्लड शुगर लेवल बढ़ गया तो डाइबीटिक रेटिनोपैथी (diabetic retinopathy), डाइबीटिक न्यूरोपैथी (diabetic nephropathy) , डाइबीटिक नेफ्रोपैथी (diabetic neuropathy) , डाइबीटिक फूट (diabetic foot) और हर्ट डिज़ीज (heart disease) की समस्या हो सकती है। इसलिए बिना नजरअंदाज किये इन टेस्ट को जरूर करें-
एचबीए1सी टेस्ट (HbA1C test)- इस टेस्ट को करने से डॉक्टर को पता चलता है कि डायबिटीज़ के लिए किया गया इलाज असरदार रूप से काम कर रहा है कि नहीं।अगर आप रोज घर पर ब्लड टेस्ट करते हैं तो भी इस टेस्ट को करें, इससे ब्लड-शुगर लेवल की पूरी सही जानकारी मिल जाती है, यहाँ तक कि पिछले महिने का भी लेखा-जोखा मिल जाता है।
ब्लड-प्रेशर- जब भी आप डॉक्टर के पास जायें अपना ब्लड-प्रेशर चेक करवाना न भूलें। अगर ब्लड-प्रेशर कंट्रोल में नही है तो संतुलित आहार और सही समय पर दवा लेकर आप ब्लड-प्रेशर को कंट्रोल में ला सकते हैं। ब्लड-प्रेशर के कोई लक्षण आम तौर पर नजर नहीं आते हैं, लेकिन इससे आपको हृदय रोग और दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। पढ़े- डाइबीटिज टाइप 2 से लड़ने में पौष्टिक नाश्ता करता है मदद
लिपिड प्रोफाइल – अगर आप मोटे हैं या आपका काम ज्यादा देर तक बैठ कर करना है तो आप हर साल नियमित रूप से ब्लड-कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसेराइड लेवल को चेक करवाना न भूलें। अगर आपका ब्लड-शुगर लेवल बढ़ेगा तो आपका कोलेस्ट्रॉल लेवल भी बढ़ेगा, जो सीधे दिल पर असर करेगा। इसलिए ब्लड-शगुर लेवल और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखने के लिए अपने डायट और एक्सरसाइज़ पर ध्यान दें।
आंखों का चेकअप- अनियंत्रित ब्लड-शुगर लेवल का असर आंखो के रेटिना के ब्लड-वेसल पर पड़ता है जिससे डाइबीटिक रेटिनोपैथी, ग्लूकोमा और कैटरैक्ट होने का भय रहता है। इसलिए नियमित रूप से अपनी आंख की जांच साल में एक बार ज़रूर करवायें। पढ़े- 5 सामान्य तरीकों से मधुमेह (डाइबीटिज) को नियंत्रित करें
किडनी फंक्शन टेस्ट- अगर आप डाइबीटिक पेशेन्ट हैं तो किडनी के फंक्शन पर ध्यान देने की बहुत ज़रूरत है। क्योंकि हाई ब्लड-शुगर होने पर किडनी के ब्लड-वेसल को क्षति पहुँचती है। हाँ, हाइपरटेनशन के मरीजों को किडनी के बीमारी का खतरा बहुत ज्यादा रहता है।
नर्व डैमेज के लिए फिज़िकल इग्ज़ैमनेशन - हाई ब्लड शुगर के कारण जब नर्व को क्षति पहुँचती है तब सूजन, दस्त, चक्कर आना या बार-बार मूत्र होना जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं। अगर इग्ज़ैमनेशन के दौरान किसी प्रकार के क्षति की आशंका नजर आती है तो इएमजी (electromyogram) टेस्ट करवा सकते है।
दांतो की जांच- अगर आप डायबिटीज़ के मरीज़ और आपका ब्लड-शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं रहता है तो आपको कैविटी या दांतों का प्रॉब्लम होने की संभावना हो सकती है। अगर मूसड़ों की बीमारी जल्दी ठीक नहीं हो रही हैं तो आपको सचेत होने की ज़रूरत है। डायबिटीज़ के मरीज़ को साल में दो बार अपने दांतो की जांच करवानी चाहिए।
याद रहे कि अगर आप डाइबीटिक हैं तो हेल्दी लाइफ स्टाइल, हेल्दी डायट, मेडिकेशन, नियमित चेकअप आपको हेल्दी तरीके से जीने में मदद करेगा।
मूल स्रोत - 7 life-saving tests for every diabetic
अनुवादक – Mousumi Dutta
चित्र स्रोत - Shutterstock
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