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अनुवादक – Shabnam Khan
क्या आपको मालूम है कि 300 से अधिक एंजाइम और हार्मोन के काम करने के लिए ज़िंक कितना ज़रूरी है? ज़िंक का अनुकूल स्तर मीठा खाने की ललक को नियंत्रित करता है और इसके कई और फायदे भी हैं। डायटीशियन और स्पोर्ट्स न्यूट्रीशनिस्ट दीपशिखा अग्रवाल कहती हैं कि ज़िंकयुक्त चीज़ें खाने से अर्थराइटिस के दर्द में भी आराम मिलता है।
ज़िक कैसे करता है मदद?
रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के जोड़ों में इनफ्लेमेशन हो जाता है। हड्डियों का मिनरलाइज़ेशन (mineralisation) करने के लिए ज़िंक ज़रूरी तत्व है और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए भी ये सहायक है। एक अध्ययन में इस बात का संकेत दिया है कि मेनोपॉज़ होने के बाद जो महिलाएं अधिक मात्रा में ज़िंक लेती हैं उनका अर्थराइटिस (ख़ासतौर पर रूमेटाइड अर्थराइटिस) का जोखिम कम हो जाता है। ज़िंक एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी काम करता है जो फ्री रैडिकल को कम करने में सहायक होते हैं। फ्री रैडिकल इनफ्लेमेशन और बड़ी गंभीर बीमारियों के कारक हो सकते हैं। एक अन्य अध्ययन में ज़िंक के निम्न स्तर और ऑस्टियोपरॉसिस के बीच संबंध स्थापित किया गया है। ये इस बात की ओर संकेत करता है कि ज़िंक की खुराक बढ़ाने से हड्डियों की मज़बूती पर अच्छा असर पड़ता जिससे कि अर्थराइटिस के लक्षण कम होते हैं। (इसे भी पढ़ें - इन लक्षणों से करें अर्थराइटिस की पहचान)
ज़िंक सप्लीमेंट लेना हमेशा ज़रूरी नहीं होता। आप अपने खानपान में थोड़े बदलाव लाकर भी अपनी ज़िंक की आवश्यकता पूरी कर सकते हैं। खाने में अदरक, तोफू, पालक आदि शामिल करने से आपको अर्थराइटिस के दर्द में राहत महसूस होगी। बिना डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह के ज़िंक सप्लीमेंट न लें।
चित्र स्रोत – Shutterstock
संदर्भ:
1. Mierzecki, A., Strecker, D., & Radomska, K. (2011). A pilot study on zinc levels in patients with rheumatoid arthritis. Biological trace element research,143(2), 854-862.
2. Mutlu, M., Argun, M., Kilic, E., Saraymen, R., & Yazar, S. (2007). Magnesium, zinc and copper status in osteoporotic, osteopenic and normal post-menopausal women. Journal of International Medical Research, 35(5), 692-695.