पैन्क्रियाज कैंसर (Pancreas cancer) एक ऐसी बीमारी है जिसका शुरुवात में तो पता ही नहीं चलता है और धीरे धीरे जब आप पूरी तरफ इसकी चपेट में आ जाते हैं तब जाकर आपको इसके कुछ लक्षण दिखने शुरू होते हैं। हाल ही में आयी एक रिपोर्ट के अनुसार यूनाइटेड स्टेट्स में लगभग 20% मरीजों को एक साल बाद जाकर यह पता चला की वे इस कैंसर के शिकार हैं। ऐसा ही कुछ आंकड़ा भारतीयों के साथ भी है। दिन प्रति दिन पैन्क्रियाज कैंसर के मरीजों की संख्या तो बढती जा रही है लेकिन लोगों में अब भी जानकारी का बहुत अभाव है। साइटकेयर मेडिकल ऑन्कोलॉजी के सीनियर कंसलटेंट डॉ प्रसाद नारायणन बता रहे हैं कि आखिर क्यों इस कैंसर को शुरुवात में पहचानना इतना मुश्किल है।
एनाटोमी के हिसाब से अग्नाशय (Pancreas) शरीर में बहुत अंदर छिपा हुआ स्थित होता है और इसके आस पास इससे बहुत बड़े बड़े साइज़ के अंग होते हैं। इसमें लीवर, गॉल ब्लैडर आदि महत्वपूर्ण अंग आते हैं। इसके पेट में इतने अंदर छिपे होने के कारण ही इसमें हुई परेशानियों को पता लगाना बाकी अंगों की तुलना में काफी कठिन होता है।
पैंक्रियास इतना अंदर स्थित होता है कि इसमें मौजूद ट्यूमर को बाहर से महसूस कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है, न किसी तरह की कोई सूजन दिखाई देती है ना ही कोई गांठ महसूस होती है। यही कारण है कि अधिकतर क्लिनिक इस कैंसर का पता लगाने के लिए इमेजिंग तकनीक या ब्लड टेस्ट का इस्तेमाल करते हैं।
कई बार अग्नाशय के कैंसर को लेकर ग़लतफ़हमी हो जाती है। जैसे की कई बार उसके आस पास के अंगों के ट्यूमर इतना बढ़ जाता है कि शुरुवाती जांच में ऐसा लगने लगता है जैसे पैन्क्रियाज का ही कैंसर हो। जिस कारण से मेडिकल जांच में मुश्किलें आने लगती हैं।
पैन्क्रियाज कैंसर का कोई अपना ख़ास लक्षण नहीं होता है जो उसे दूसरों से अलग करें। कई बार दूसरी बीमारियों के लक्षण बहुत पैन्क्रियाज कैंसर के लक्षणों से बहुत ज्यादा मैच करने लगते हैं। जैसे कि सीरम बिलीरुबिन में अनियमित बढ़ोतरी पैन्क्रियाज कैंसर का मुख्य मक्षण है लेकिन ये समस्या हेपेटाइटिस, गॉल स्टोन और अन्य बीमारियों के कारण भी हो सकती है। इसी तरह पेट फूलना, अपच की समस्या और एसिडिटी ये भी पैन्क्रियाज कैंसर के लक्ष्ण तो हैं लेकिन ये समस्याएं कई अन्य पेट से जुड़ी बीमारियों के कारण भी होती हैं। इसलिए लक्षणों के आधार पर इसका सही पता लगा पाना मुश्किल हो जाता है।
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